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12 Sep 2026
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समान नागरिक संहिता पर व्यापक मंथन, सामाजिक संगठनों और प्रतिनिधियों ने दिए अहम सुझाव।

समान नागरिक संहिता पर व्यापक मंथन, सामाजिक संगठनों और प्रतिनिधियों ने दिए अहम सुझाव।
समान नागरिक संहिता पर व्यापक मंथन, सामाजिक संगठनों और प्रतिनिधियों ने दिए अहम सुझाव।। फोटो: आज का दिन न्यूज़

विवाह-तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे मुद्दों पर हुई विस्तृत चर्चा

रायपुर, 11 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) के क्रियान्वयन की दिशा में गठित उच्च स्तरीय समिति की दो दिवसीय परामर्श बैठक में विभिन्न सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों, आयोगों और विशेषज्ञों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया गया। पुराना सर्किट हाउस के सभाकक्ष में आयोजित बैठक में समिति ने विवाह एवं तलाक, उत्तराधिकार एवं विरासत, भरण-पोषण तथा लिव-इन रिलेशनशिप जैसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील विषयों पर विभिन्न पक्षों से सुझाव आमंत्रित किए।

बैठक की अध्यक्षता भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी एवं समिति के सदस्य श्री एम.के. राउत ने की। इस दौरान समिति के सदस्य एवं वरिष्ठ अधिवक्ता श्री मोहन पवार भी उपस्थित रहे। PPT के माध्यम से समान नागरिक संहिता से जुड़े वर्तमान नियमों एवं कानूनी प्रावधानों की जानकारी भी प्रतिनिधियों को दी गई।

परामर्श के दौरान गोंडी धर्म संस्कृति संरक्षण समिति के प्रांतीय सचिव श्री गजानंद नुरूटी ने आदिवासी समाज की रूढ़िगत परंपराओं, विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान और मौलिक अधिकारों के संरक्षण का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने आदिवासी समुदाय की विशिष्ट सामाजिक एवं सांस्कृतिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए उन्हें समान नागरिक संहिता के दायरे से पृथक रखने का औपचारिक अनुरोध किया।

वहीं राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष श्री अमरजीत सिंह छाबड़ा ने लैंगिक समानता को प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने महिला और पुरुष को समान अधिकार देने, बेटे और बेटी को संपत्ति में समान उत्तराधिकार, विवाह एवं तलाक का अनिवार्य पंजीयन तथा संपत्ति और वसीयत से संबंधित स्पष्ट कानूनी प्रावधान सुनिश्चित करने का सुझाव दिया।

क्रिश्चियन समाज के श्री राजेश जॉन पाल सहित अन्य प्रतिनिधियों ने विवाह संस्था को लेकर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि विवाह को ईश्वर द्वारा निर्मित अटूट जोड़ी माना जाता है और इसे आसानी से विच्छेदित नहीं किया जाना चाहिए। प्रतिनिधियों ने लिव-इन रिलेशनशिप को सामाजिक रूप से स्वीकार्य नहीं मानने संबंधी अपनी राय भी समिति के समक्ष रखी।

बैठक में राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष श्रीमती वर्णिका शर्मा ने बच्चों के अधिकारों और उनकी सामाजिक सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार रखे। समिति के सदस्यों ने सभी प्रतिनिधियों के सुझावों को गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ सुना तथा कहा कि प्राप्त सुझावों और व्यावहारिक पक्षों का गहन अध्ययन कर एक समावेशी, संतुलित और निष्पक्ष मसौदा तैयार करने की दिशा में कार्य किया जाएगा।

परामर्श बैठक में अधिवक्ता संघ के वरिष्ठ अधिवक्ता श्री बृजेश पांडेय, अध्यक्ष श्री दिनेश देवांगन, अधिवक्ता परिषद के अध्यक्ष श्री प्रमोद तिवारी तथा वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्रीमती भारती राठौर ने समान नागरिक संहिता के प्रावधानों को अधिक प्रभावी, स्पष्ट और पारदर्शी बनाने के संबंध में अपने सुझाव दिए।

बैठक के दूसरे सत्र में कान्यकुब्ज ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष डॉ. सुरेश मिश्रा एवं श्री आशीष बाजपेयी ने अपने विचार एवं अभिमत समिति के समक्ष दर्ज कराए। इसी क्रम में मेडिकल एसोसिएशन के प्रतिनिधि डॉ. कुलदीप सोलंकी, डॉ. सुरभि दुबे एवं डॉ. के.पी. आजमानी ने भी समान नागरिक संहिता के संभावित क्रियान्वयन को लेकर अपने सुझाव समिति के समक्ष प्रस्तुत किए।

दो दिवसीय बैठक के माध्यम से समिति ने समाज के विभिन्न वर्गों की चिंताओं, अपेक्षाओं और सुझावों को समझने का प्रयास किया। प्राप्त सुझावों के आधार पर आगे की प्रक्रिया में सभी पक्षों के हितों और संवेदनशील सामाजिक विषयों को ध्यान में रखने की बात कही गई।

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