आत्महत्या रोकथाम और मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम में चेतावनी संकेत पहचानने, संवेदनशील संवाद और समय पर मदद लेने पर दिया जोर।
मनेंद्रगढ़, 11 सितंबर 2026। विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर “आत्महत्या पर कथा को बदलना: बातचीत शुरू करें” विषय पर शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, लालपुर में विद्यार्थियों के लिए आत्महत्या रोकथाम एवं मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को मानसिक तनाव और भावनात्मक परेशानियों को नजरअंदाज न करने तथा जरूरत पड़ने पर समय रहते मदद लेने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाश खरे के निर्देशानुसार, जिला नोडल अधिकारी (मानसिक स्वास्थ्य) डॉ. नम्रता चक्रवर्ती के मार्गदर्शन तथा जिला कार्यक्रम प्रबंधक शिशिर जायसवाल के समन्वय में आयोजित किया गया। ए.के. नर्सिंग कॉलेज के शिक्षकों एवं नर्सिंग विद्यार्थियों ने कार्यक्रम का संचालन किया।
व्यवहार में बदलाव हो सकता है चेतावनी संकेत
पोस्टर और प्रदर्शनी पट्टिकाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को आत्महत्या से जुड़े संभावित चेतावनी संकेतों की जानकारी दी गई। इनमें व्यवहार एवं मनोदशा में अचानक बदलाव, परिवार या मित्रों से दूरी बनाना, लगातार निराशा व्यक्त करना तथा जीवन समाप्त करने संबंधी बातें करना प्रमुख संकेत बताए गए।
विद्यार्थियों को समझाया गया कि ऐसे संकेतों को हल्के में नहीं लेना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति के व्यवहार में इस तरह के बदलाव नजर आएं, तो उसकी बात बिना आलोचना किए और पूरी संवेदनशीलता के साथ सुनना मदद की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
संवाद से टूट सकता है अकेलेपन का एहसास
जागरूकता सत्र के दौरान नर्सिंग कॉलेज के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने स्कूली विद्यार्थियों से संवाद किया। बताया गया कि आत्महत्या जैसे संवेदनशील विषय पर खुलकर बातचीत करने से परेशान व्यक्ति को अपनी भावनाएं और समस्याएं साझा करने का अवसर मिलता है।
विद्यार्थियों को सलाह दी गई कि मानसिक परेशानी से जूझ रहे किसी व्यक्ति को अकेला छोड़ने के बजाय उससे बातचीत करें और जरूरत पड़ने पर परिवार, शिक्षक, परामर्शदाता या स्वास्थ्य विशेषज्ञ तक पहुंचने में उसकी मदद करें।
मानसिक स्वास्थ्य को दें प्राथमिकता
जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम की ओर से विद्यार्थियों, अभिभावकों और आमजन से मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की अपील की गई। अत्यधिक तनाव, निराशा अथवा भावनात्मक परेशानी को नजरअंदाज न करने तथा समय रहते किसी विश्वसनीय व्यक्ति से अपनी बात साझा करने और विशेषज्ञ सहायता लेने पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों को सकारात्मक आत्म-संवाद, योग, ध्यान तथा स्वयं के प्रति स्नेह एवं सम्मान जैसी स्वस्थ आदतों को जीवनशैली का हिस्सा बनाने की सलाह भी दी गई।
मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सहायता के लिए टेली-मानस हेल्पलाइन 14416 (24×7) और टेली-मानस मोबाइल ऐप का उपयोग किया जा सकता है।
कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि चुप्पी समस्या को बढ़ा सकती है, जबकि समय पर शुरू किया गया संवेदनशील संवाद मदद की राह खोल सकता है।




पाठकों की टिप्पणियां 0