बड़ा खुलासा: 2020 में जिस कांग्रेस सरकार ने शुरू किया था जमीन आवंटन और 2022 में चलवाए बुल्डोजर, आज वही पुनर्वास के मुद्दे पर खेल रही 'सियासी दांव'; 2026 में प्रशासनिक चिट्ठियों ने खोली जिम्मेदारी की पोल।
(प्रशांत सहाय/विद्यानंद ठाकुर aajkadinnews.com)
रायपुर। रायपुर जिले के धरसींवा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत नकटी का बहुचर्चित भूमि विवाद एक बार फिर चर्चा में है। उपलब्ध शासकीय दस्तावेजों, न्यायालयीन रिकॉर्ड, राजस्व अभिलेखों और विभागीय पत्राचार से स्पष्ट होता है कि यह पूरा मामला भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में शुरू हुआ, जब छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल के लिए भूमि आवंटन की प्रक्रिया प्रारंभ की गई। इसके बाद राजस्व विभाग ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की, लेकिन प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था नहीं होने से यह विवाद लगातार गहराता गया।
2020 में भूमि आवंटन की प्रक्रिया हुई शुरू
उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार 16 अक्टूबर 2020 को छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल, संभाग-4 सेजबहार के कार्यपालन अभियंता ने ग्राम नकटी स्थित खसरा नंबर 460, रकबा लगभग 15.479 हेक्टेयर भूमि को सामान्य आवासीय योजना के लिए आवंटित करने का प्रस्ताव शासन को भेजा।
इसके बाद 9 नवंबर 2020 को नायब तहसीलदार रायपुर ने राजस्व निरीक्षक और हल्का पटवारी को स्थल निरीक्षण एवं गणना प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश जारी किए। उसी दिन सार्वजनिक इश्तहार जारी कर आम नागरिकों से निर्धारित तिथि तक आपत्तियां आमंत्रित की गईं।
सीएमएचओ ने भी दी थी रिपोर्ट
24 जनवरी 2021 को तत्कालीन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) रायपुर ने नायब तहसीलदार को पत्र लिखकर बताया कि संबंधित भूमि स्वास्थ्य विभाग अथवा किसी स्वास्थ्य परियोजना के लिए शासन द्वारा आवंटित नहीं की गई है। इसलिए उक्त भूमि के आवंटन पर स्वास्थ्य विभाग को कोई आपत्ति नहीं है।
148 अतिक्रमणकारियों पर कार्रवाई
भूमि आवंटन प्रक्रिया के बाद राजस्व विभाग ने प्रकरण दर्ज कर 148 अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी किए। इनमें लगभग 100 मकान भी शामिल थे। 7 जनवरी 2022 को बेदखली वारंट जारी किया गया और 7 नवंबर 2022 को प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की। इसके बाद 22 फरवरी 2023 को राजस्व प्रकरण का निराकरण किया गया।
हालांकि प्रशासनिक दस्तावेजों में स्पष्ट उल्लेख है कि अतिक्रमण हटाने के बाद प्रभावित परिवारों के पुनर्वास अथवा वैकल्पिक व्यवस्था संबंधी कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिससे विवाद और असंतोष लगातार बना रहा।
2024-25 में दोबारा हुआ सर्वे, कई नाम हुए दर्ज
इसके बाद मामला तहसीलदार न्यायालय रायपुर में पहुंचा। वर्ष 2024-25 के राजस्व प्रकरण क्रमांक अ-68 में हल्का पटवारी की नई रिपोर्ट के आधार पर दोबारा सर्वे कराया गया। रिपोर्ट में लगभग 60 से अधिक व्यक्तियों के नाम, उनके कब्जे का स्वरूप, निर्मित मकान, बाउंड्रीवाल, पीएम आवास, निर्माणाधीन भवन एवं कब्जे का क्षेत्रफल दर्ज किया गया।
दस्तावेजों में कई स्थानों पर पीएम आवास से निर्मित मकानों का भी उल्लेख किया गया है, जिससे यह मामला और संवेदनशील बन गया।
सांसद ने उठाया मामला, मंत्री ने दिया जवाब
प्रभावित परिवारों की ओर से रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने राज्य शासन को पत्र लिखकर विषय उठाया। इसके जवाब में तत्कालीन मंत्री ओ.पी. चौधरी ने 2 फरवरी 2026 को लिखे पत्र में स्पष्ट किया कि विधायक कॉलोनी अथवा संबंधित भूमि के संबंध में अंतिम निर्णय किसी विभागीय मंत्री के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता, बल्कि उच्चस्तरीय समिति द्वारा लिया जाता है।
न्यायालयों तक पहुंचा विवाद
भूमि विवाद से जुड़े कई मामले विभिन्न न्यायालयों तक पहुंचे। उपलब्ध अभिलेखों में जल संसाधन विभाग से संबंधित अपील प्रकरण का भी उल्लेख है, जिससे स्पष्ट होता है कि भूमि अधिकार और कब्जे को लेकर कई वर्षों से न्यायिक प्रक्रिया चलती रही।
हाउसिंग बोर्ड की समिति से जुड़े नाम भी सामने आए
उपलब्ध दस्तावेजों में सदस्य सुविधा एवं सम्मान समिति के अध्यक्ष एवं सदस्यों की सूची भी संलग्न है। इसमें समिति के अध्यक्ष अजय चंद्राकर सहित कई सदस्यों के नाम दर्ज हैं। हालांकि उपलब्ध दस्तावेजों में इन सदस्यों की भूमिका या नकटी भूमि आवंटन संबंधी किसी निर्णय का प्रत्यक्ष उल्लेख नहीं है। इसलिए इनका नाम केवल दस्तावेज का हिस्सा होने के आधार पर उल्लेखित है।
नकटी जमीन मामला बना एक बड़ा सार्वजनिक मुद्दा
नकटी भूमि विवाद अब केवल अतिक्रमण हटाने का मामला नहीं रह गया है। यह भूमि आवंटन, प्रशासनिक निर्णय, बेदखली, पुनर्वास, आवासीय अधिकार और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ा एक बड़ा सार्वजनिक मुद्दा बन चुका है। उपलब्ध दस्तावेजों से यह स्पष्ट होता है कि विवाद की शुरुआत और प्रमुख प्रशासनिक कार्रवाई भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में हुई, जबकि बाद के वर्षों में यह मामला न्यायालय, राजस्व विभाग और शासन स्तर पर लगातार विचाराधीन रहा।
मामले की प्रमुख समयरेखा (Timeline)
16 अक्टूबर 2020: गृह निर्माण मंडल ने भूमि आवंटन का प्रस्ताव भेजा।
9 नवंबर 2020: नायब तहसीलदार ने जांच के आदेश एवं सार्वजनिक इश्तहार जारी किया।
24 जनवरी 2021: सीएमएचओ ने भूमि पर स्वास्थ्य विभाग की कोई आपत्ति नहीं होने की जानकारी दी।
7 जनवरी 2022: बेदखली वारंट जारी।
7 नवंबर 2022: 148 अतिक्रमणकारियों के विरुद्ध कार्रवाई।
22 फरवरी 2023: राजस्व प्रकरण का निराकरण।
2024-25: पुनः सर्वे एवं विस्तृत राजस्व रिपोर्ट।
2 फरवरी 2026: सांसद के पत्र पर मंत्री का जवाब।
कांग्रेस के रुख पर उठ रहे सवाल
नकटी भूमि विवाद में उपलब्ध शासकीय दस्तावेज बताते हैं कि भूमि आवंटन की प्रक्रिया वर्ष 2020 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में शुरू हुई। इसके बाद राजस्व जांच, सार्वजनिक सूचना, बेदखली वारंट जारी होने से लेकर वर्ष 2022 में अतिक्रमण हटाने जैसी प्रमुख प्रशासनिक कार्रवाई भी उसी कार्यकाल में हुई।
अब इसी मामले को लेकर कांग्रेस द्वारा विरोध-प्रदर्शन और सरकार को घेरने की रणनीति अपनाई जा रही है। ऐसे में राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठ रहा है कि जिस प्रक्रिया की शुरुआत और महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय कांग्रेस सरकार के समय हुए, उसी मुद्दे पर आज विरोध करना क्या उसके तत्कालीन फैसलों से अलग रुख नहीं दर्शाता?
हालांकि कांग्रेस का कहना है कि उसका विरोध प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और न्यायसंगत समाधान को लेकर है। वहीं सत्ता पक्ष का आरोप है कि कांग्रेस अपने शासनकाल के निर्णयों की जिम्मेदारी से बचने के लिए अब इस मुद्दे पर राजनीतिक आंदोलन कर रही है। उपलब्ध दस्तावेजों से यह स्पष्ट है कि भूमि आवंटन और प्रारंभिक प्रशासनिक कार्रवाई कांग्रेस शासनकाल में हुई थी, जबकि वर्तमान में इस मामले को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। ऐसे में अंतिम राजनीतिक निष्कर्ष पाठकों और जनता पर छोड़ना उचित होगा।













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