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23 Jun 2026
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नीट धांधली के खिलाफ जंतर-मंतर पर गूंज रहा छात्रों का आक्रोश: कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले जारी है अनिश्चितकालीन धरनानई दिल्ली: नीट धांधली के खिलाफ जंतर-मंतर पर गूंज रहा छात्रों का आक्रोश: 'कॉकरोच जनता पार्टी' के बैनर तले जारी है अनिश्चितकालीन धरनानई दिल्ली: नीट धांधली के खिलाफ जंतर-मंतर पर गूंज रहा छात्रों का आक्रोश: 'कॉकरोच जनता पार्टी' के बैनर तले जारी है अनिश्चितकालीन धरनानई दिल्ली: नीट धांधली के खिलाफ जंतर-मंतर पर गूंज रहा छात्रों का आक्रोश: 'कॉकरोच जनता पार्टी' के बैनर तले जारी है अनिश्चितकालीन धरनानई दिल्ली: नीट धांधली के खिलाफ जंतर-मंतर पर गूंज रहा छात्रों का आक्रोश: 'कॉकरोच जनता पार्टी' के बैनर तले जारी है अनिश्चितकालीन धरना

नीट धांधली के खिलाफ जंतर-मंतर पर गूंज रहा छात्रों का आक्रोश: कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले जारी है अनिश्चितकालीन धरना

नीट धांधली के खिलाफ जंतर-मंतर पर गूंज रहा छात्रों का आक्रोश: कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले जारी है अनिश्चितकालीन धरना
नीट धांधली के खिलाफ जंतर-मंतर पर गूंज रहा छात्रों का आक्रोश: कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले जारी है अनिश्चितकालीन धरना। फोटो: आज का दिन न्यूज़

नई दिल्ली: नीट (NEET) परीक्षा की शुचिता को लेकर देश भर के छात्रों में पनपा असंतोष अब दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक बड़े जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। पिछले कई दिनों से यहाँ डटे हजारों छात्र और युवा अपने भविष्य को सुरक्षित करने के लिए लगातार सरकार से जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।

आंदोलन की शुरुआत और कॉकरोच जनता पार्टी का उदय

परीक्षाओं में कथित धांधली और पेपर लीक के आरोपों के बाद, छात्रों ने न्याय की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर डेरा डाला। आंदोलन को एक अनोखा नाम और पहचान देने के लिए छात्रों ने व्यंग्यात्मक रूप से कॉकरोच जनता पार्टी का गठन किया। यह नाम उस न्यायिक टिप्पणी के विरोध में चुना गया, जिसने छात्रों के संघर्ष को कमतर आंकने की कोशिश की थी। छात्रों का कहना है कि वे किसी पद के लिए नहीं, बल्कि अपनी मेहनत और हक के लिए लड़ रहे हैं।

प्रमुख पड़ाव और संघर्ष की कहानी:

प्रदर्शन का सिलसिला:धरना शुरू होने के पहले दिन से ही छात्रों की मांग स्पष्ट थी—पेपर लीक की निष्पक्ष जांच और शिक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार। जंतर-मंतर पर छात्र गर्मी और बारिश की परवाह किए बिना अपनी मांगों पर अडिग रहे हैं।

प्रतीकात्मक विरोध: छात्रों ने थाली-चम्मच बजाने से लेकर सड़कों पर बैठकर पढ़ाई करने तक, हर उस तरीके को अपनाया जिससे सरकार का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर खींचा जा सके।

समर्थन का दायरा बढ़ा: आंदोलन के शुरुआती दिनों में यह केवल छात्रों का सीमित समूह था, लेकिन अब इसे देश के विभिन्न किसान संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और अन्य युवा मंचों का व्यापक समर्थन मिल रहा है, जिसने इसे एक राष्ट्रीय मुद्दा बना दिया है।

प्रशासन से टकराव: धरना जारी रहने के दौरान पुलिस द्वारा पहचान पत्रों की जांच और प्रदर्शनकारियों को हटाने के प्रयासों ने तनाव भी पैदा किया, लेकिन छात्रों का जज्बा कम नहीं हुआ।

क्या है छात्रों की जायज मांगें?

प्रदर्शनकारी छात्रों और शिक्षाविदों का मानना है कि उनकी मांगें पूरी तरह से न्यायसंगत हैं:

1. पारदर्शिता सुनिश्चित हो: परीक्षाओं के आयोजन में पूरी पारदर्शिता हो ताकि किसी भी छात्र की मेहनत पर पानी न फिरे।

2. सख्त जवाबदेही: पेपर लीक के दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो और शिक्षा मंत्रालय की विफलता की जिम्मेदारी तय की जाए।

3. पीड़ितों को न्याय: प्रभावित छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए तत्काल ठोस कदम उठाए जाएं।

वर्तमान स्थिति

आज, धरने के कई दिन बीत जाने के बाद भी, जंतर-मंतर पर छात्रों का उत्साह कम नहीं हुआ है। विपक्ष के भी कई नेताओं ने इन छात्रों की मांगों का समर्थन किया है, जिससे अब सरकार पर दबाव बढ़ गया है।

छात्रों की यह लड़ाई केवल एक परीक्षा के बारे में नहीं है, बल्कि यह उन लाखों युवाओं के विश्वास की लड़ाई है जो सिस्टम से पारदर्शी और निष्पक्ष व्यवस्था की उम्मीद करते हैं। जब युवा सड़क पर उतरने को मजबूर हो, तो यह लोकतंत्र के लिए एक संकेत है कि संवाद की प्रक्रिया को और तेज और संवेदनशील बनाने की आवश्यकता है।

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