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02 Sep 2026
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शिक्षकों की 10 सूत्रीय मांगों को लेकर शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने खोला मोर्चा, DEO को सौंपा ज्ञापन,

शिक्षकों की 10 सूत्रीय मांगों को लेकर शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने खोला मोर्चा, DEO को सौंपा ज्ञापन,
शिक्षकों की 10 सूत्रीय मांगों को लेकर शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने खोला मोर्चा, DEO को सौंपा ज्ञापन,। फोटो: आज का दिन न्यूज़

बीईओ कार्यालयों की कार्यप्रणाली और लंबित प्रकरणों पर जताई नाराजगी, मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी

राजनांदगांव। जिले के शासकीय स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों की विभिन्न सेवा संबंधी और व्यावहारिक समस्याओं को लेकर छत्तीसगढ़ शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय का रुख किया। मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल ने जिला शिक्षा अधिकारी राजनांदगांव से मुलाकात कर शिक्षकों से जुड़ी समस्याओं के निराकरण की मांग को लेकर 10 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा।

प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मोर्चा के जिला संयोजक गोपी वर्मा, विष्णु शर्मा और नीलेश रामटेके ने संयुक्त रूप से किया। चर्चा के दौरान पदाधिकारियों ने विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) कार्यालयों में शिक्षकों के लंबित प्रकरणों और पूर्व में जारी निर्देशों के क्रियान्वयन को लेकर नाराजगी जताई।

मोर्चा पदाधिकारियों का आरोप है कि विकासखंड स्तर पर कई जायज कार्य लंबे समय से लंबित हैं तथा जिला कार्यालय से जारी कुछ निर्देशों का अपेक्षित रूप से पालन नहीं हो रहा है। उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी से मामलों में हस्तक्षेप कर समयबद्ध निराकरण कराने की मांग की।

शिक्षक संघर्ष मोर्चा की 10 प्रमुख मांगें

1. पाक्षिक के स्थान पर मासिक परीक्षा व्यवस्था लागू हो

मोर्चा ने हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों में संचालित पाक्षिक परीक्षाओं की व्यवस्था पर पुनर्विचार करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि हर 15 दिन में परीक्षा होने से विषय शिक्षकों को पाठ्यक्रम पूरा कराने और नियमित अध्यापन के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पा रहा है।

मोर्चा ने पूर्व की तरह मासिक परीक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग की है।

2. शनिवार को स्कूलों का संचालन प्रातःकालीन पाली में हो

जिले के जिन हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों में शनिवार को दोपहर की पाली में कक्षाएं संचालित होती हैं, वहां शनिवार को प्रातःकालीन पाली में स्कूल लगाने का आदेश जारी करने की मांग की गई है।

मोर्चा का कहना है कि इससे शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों को सुविधा मिल सकती है।

3. शिक्षा विभाग में NGO के हस्तक्षेप पर रोक की मांग

मोर्चा ने स्कूलों और शिक्षा विभाग की गतिविधियों में गैर-सरकारी संगठनों (NGO) के बढ़ते हस्तक्षेप पर भी आपत्ति जताई है।

संगठन का आरोप है कि विभिन्न गतिविधियों के कारण शिक्षकों के नियमित अध्यापन कार्य प्रभावित होते हैं और उन पर अतिरिक्त कार्य एवं मानसिक दबाव बढ़ता है। मोर्चा ने इस संबंध में स्पष्ट व्यवस्था बनाने की मांग की है।

4. लंबित सेवा पुस्तिकाओं का संधारण और सत्यापन कराया जाए

एलबी संवर्ग के शिक्षकों की संविलियन से पूर्व की सेवा पुस्तिकाओं के संधारण एवं आवश्यक सत्यापन का मुद्दा भी उठाया गया।

मोर्चा का कहना है कि विकासखंड कार्यालयों में लंबित प्रक्रिया के कारण सेवा संबंधी सत्यापन प्रभावित हो रहा है। संगठन ने जिले के सभी संबंधित विकासखंडों में सेवा पुस्तिकाओं का संधारण और सत्यापन पारदर्शी तरीके से जल्द पूरा कराने की मांग की है।

5. GPF पासबुक का नियमित संधारण हो

पुरानी पेंशन योजना (OPS) से संबंधित GPF खाते एवं पासबुक के संधारण का मुद्दा भी मांग पत्र में शामिल है।

मोर्चा के अनुसार OPS व्यवस्था लागू होने के बाद शिक्षकों के वेतन से संबंधित कटौती की जा रही है, लेकिन GPF पासबुक के संधारण को लेकर विकासखंड स्तर पर प्रक्रिया पूरी नहीं होने की शिकायतें हैं। संगठन ने इस संबंध में तत्काल आवश्यक निर्देश जारी करने की मांग की।

6. उच्च परीक्षाओं में शामिल होने की लंबित अनुमति जारी हो

शैक्षणिक योग्यता बढ़ाने के लिए उच्च परीक्षाओं में शामिल होने के इच्छुक सहायक शिक्षक, शिक्षक और व्याख्याताओं के लंबित आवेदनों का भी मामला उठाया गया।

मोर्चा ने कहा कि कई आवेदन लंबे समय से कार्यालयों में लंबित हैं। ऐसे मामलों का परीक्षण कर पात्र शिक्षकों को नियमानुसार शीघ्र अनुमति आदेश जारी किए जाएं।

7. सेवानिवृत्त और मृत शिक्षकों के स्वत्वों का भुगतान हो

सेवानिवृत्त तथा मृत शिक्षकों के लंबित पेंशन, ग्रेच्युटी और अर्जित अवकाश नकदीकरण जैसे स्वत्वों के भुगतान का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया।

मोर्चा का कहना है कि ऐसे मामलों में देरी से सेवानिवृत्त कर्मचारियों और मृत शिक्षकों के परिवारों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। संगठन ने इन प्रकरणों का प्राथमिकता के आधार पर निराकरण करने की मांग की है।

8. हाई-हायर सेकेंडरी परीक्षाओं का विकेंद्रीकरण हो

मोर्चा ने त्रैमासिक, अर्धवार्षिक और वार्षिक परीक्षाओं के आयोजन एवं प्रश्नपत्र निर्धारण को लेकर भी व्यवस्था में बदलाव की मांग की है।

संगठन का कहना है कि इन परीक्षाओं का आयोजन स्कूल स्तर पर करने और आवश्यक अधिकार प्राचार्यों को देने से स्थानीय स्तर पर व्यवस्थाएं अधिक सुचारू रूप से संचालित की जा सकती हैं।

9. जनगणना कार्य के बदले अर्जित अवकाश का संधारण हो

जनगणना कार्य में लगाए गए शिक्षक-कर्मचारियों को ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान किए गए शासकीय कार्य के एवज में पात्रतानुसार अर्जित अवकाश (EL) का लाभ देने की मांग की गई है।

मोर्चा ने संबंधित विकासखंड शिक्षा अधिकारियों को सेवा पुस्तिकाओं में पात्र कर्मचारियों का अर्जित अवकाश दर्ज करने के लिए आवश्यक निर्देश जारी करने की मांग की है।

10. पंचायत विभाग के शिक्षकों के नियमितीकरण की प्रक्रिया तेज हो

पंचायत विभाग के अंतर्गत कार्यरत ऐसे सहायक शिक्षक, शिक्षक और व्याख्याता जिनका नियमितीकरण अब तक नहीं हो पाया है, उनके प्रकरणों का शीघ्र निराकरण करने की मांग भी की गई।

मोर्चा ने प्रशासनिक कारणों से लंबित मामलों की समीक्षा कर पात्र कर्मचारियों के नियमितीकरण की प्रक्रिया तेज करने की मांग रखी।

मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन की चेतावनी

प्रतिनिधिमंडल ने जिला शिक्षा अधिकारी के समक्ष स्पष्ट किया कि शिक्षकों की समस्याओं के निराकरण में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। मोर्चा पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि पूर्व में जिला कार्यालय से जारी निर्देशों के बावजूद कुछ मामलों में विकासखंड स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।

संगठन ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया और लंबित प्रकरणों का निराकरण नहीं हुआ तो शिक्षक संघर्ष मोर्चा जिले में आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होगा। संगठन की ओर से उग्र आंदोलन और तालाबंदी की चेतावनी भी दी गई है।

DEO ने दिया समस्याओं के निराकरण का आश्वासन

जिला शिक्षा अधिकारी ने प्रतिनिधिमंडल की ओर से रखी गई समस्याओं और मांगों को गंभीरता से सुनने तथा नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया। संगठन के अनुसार DEO ने लंबित मामलों की समीक्षा करने और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित ब्लॉक अधिकारियों को तलब करने की बात भी कही है।

अब शिक्षकों की नजर जिला शिक्षा विभाग की आगामी कार्रवाई पर है। यदि 10 सूत्रीय मांगों में शामिल लंबित सेवा मामलों और प्रशासनिक समस्याओं पर समयबद्ध कार्रवाई होती है तो शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद है। वहीं, मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होने की स्थिति में मामला आंदोलन की दिशा में आगे बढ़ सकता है।

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