धारणी करीन स्व-सहायता समूह ने स्थानीय वनोपज को दिया नया रूप, वन मंत्री केदार कश्यप ने की महिलाओं के नवाचार की सराहना
रायपुर/जगदलपुर, 27 अगस्त 2026। बस्तर की महिलाओं ने स्थानीय वनोपज के मूल्य-संवर्धन और नवाचार के जरिए आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की है। बकावंड स्थित वन धन विकास केंद्र के धारणी करीन स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने बस्तर के ऑर्गेनिक काजू और शुद्ध ऑर्गेनिक गुड़ से बिना अतिरिक्त चीनी वाली स्वास्थ्यवर्धक काजू-कतली तैयार की है।
समूह की महिलाओं ने जगदलपुर सर्किट हाउस में प्रदेश के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप से सौजन्य भेंट कर उन्हें काजू-कतली भेंट की। मंत्री ने मिठाई के स्वाद के साथ महिलाओं की नवाचारी सोच और उद्यमिता की सराहना की।
ऋण से शुरू हुआ सफर, नवाचार तक पहुंचा समूह
धारणी करीन स्व-सहायता समूह ने मुख्य वन संरक्षक कार्यालय, जगदलपुर के रिवॉल्विंग फंड से ऋण लेकर बाजार दर पर कच्चे काजू की खरीद से अपने काम की शुरुआत की।
काजू के प्रसंस्करण और बिक्री से लाभ मिलने के बाद समूह की महिलाओं ने उत्पाद में मूल्य-संवर्धन करते हुए काजू-कतली तैयार करने का प्रयोग शुरू किया। ऑर्गेनिक काजू और ऑर्गेनिक गुड़ के मेल से तैयार इस उत्पाद को बाजार में अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है।
वर्तमान में काजू-कतली 500 ग्राम और 1 किलोग्राम की पैकेजिंग में उपलब्ध है।
बस्तर दशहरा और दीपावली पर ‘संजीवनी’ में मिलेगी काजू-कतली
त्योहारी सीजन में इस उत्पाद को आम लोगों तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। बस्तर दशहरा और दीपावली के दौरान विभागीय ‘संजीवनी’ आउटलेट्स के माध्यम से काजू-कतली की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने की योजना है।
इससे स्थानीय वनोपज से तैयार उत्पाद को बड़ा बाजार मिलने के साथ स्व-सहायता समूह की महिलाओं की आय और उद्यमिता को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
वन मंत्री ने दिए हरसंभव सहयोग के निर्देश
वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने समूह की महिलाओं के प्रयासों की सराहना करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक विभागीय सहयोग उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
उन्होंने मुख्य वन संरक्षक सुश्री स्टाइलो मंडावी, मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) श्री उत्तम कुमार गुप्ता और वनमंडलाधिकारी श्री दीपेश कपिल को समूह की गतिविधियों को आगे बढ़ाने में हरसंभव सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए।
स्थानीय वनोपज से आत्मनिर्भरता की नई राह
धारणी करीन स्व-सहायता समूह की पहल यह दिखाती है कि स्थानीय वनोपज को केवल कच्चे रूप में बेचने के बजाय उसका प्रसंस्करण और मूल्य-संवर्धन कर ग्रामीण महिलाएं बेहतर बाजार और आय के अवसर पैदा कर सकती हैं।
बस्तर के काजू को पारंपरिक मिठाई के नए रूप में बाजार तक पहुंचाने की यह पहल स्थानीय उत्पादों को पहचान दिलाने के साथ महिला स्व-सहायता समूहों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।




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