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20 Aug 2026
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डॉ. तीजन बाई की स्मृति रहेगी अमर: गनियारी के शासकीय हाई-हायर सेकेंडरी स्कूल का नाम अब डॉ. तीजन बाई के नाम पर, शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने की घोषण

डॉ. तीजन बाई की स्मृति रहेगी अमर: गनियारी के शासकीय हाई-हायर सेकेंडरी स्कूल का नाम अब डॉ. तीजन बाई के नाम पर, शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने की घोषण
डॉ. तीजन बाई की स्मृति रहेगी अमर: गनियारी के शासकीय हाई-हायर सेकेंडरी स्कूल का नाम अब डॉ. तीजन बाई के नाम पर, शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने की घोषण। फोटो: आज का दिन न्यूज़
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रायपुर/गनियारी। छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को विश्व पटल पर नई पहचान दिलाने वाली पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई को राज्य सरकार ने अनूठी श्रद्धांजलि देने का निर्णय लिया है। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने घोषणा की है कि डॉ. तीजन बाई के गृहग्राम गनियारी स्थित शासकीय हाई-हायर सेकेंडरी स्कूल का नाम बदलकर "डॉ. तीजन बाई शासकीय हाई-हायर सेकेंडरी विद्यालय, गनियारी" रखा जाएगा। इसे राज्य सरकार द्वारा महान लोककलाकार के प्रति स्थायी सम्मान के रूप में देखा जा रहा है।

शनिवार को शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव गनियारी स्थित उनके निवास पहुंचे, जहां उन्होंने पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इसके बाद वे अंतिम यात्रा और अंतिम संस्कार में भी शामिल हुए तथा परिजनों से मुलाकात कर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।

मंत्री यादव ने कहा कि डॉ. तीजन बाई केवल छत्तीसगढ़ की नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत की अमूल्य धरोहर थीं। उन्होंने पंडवानी जैसी लोककला को देश-विदेश में नई प्रतिष्ठा दिलाई और अपने अद्वितीय व्यक्तित्व एवं कला-साधना से करोड़ों लोगों को प्रभावित किया।

उन्होंने कहा कि डॉ. तीजन बाई का संपूर्ण जीवन लोककला, लोकपरंपरा और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण एवं संवर्धन को समर्पित रहा। उनका संघर्ष, समर्पण और उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेंगी।

श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि गनियारी के विद्यालय का नामकरण केवल औपचारिक निर्णय नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक अस्मिता को सम्मान देने का प्रयास है। इससे आने वाली पीढ़ियां डॉ. तीजन बाई के जीवन, संघर्ष और विश्वस्तरीय योगदान से निरंतर प्रेरणा ले सकेंगी।

राज्य सरकार का यह निर्णय डॉ. तीजन बाई की स्मृतियों को स्थायी रूप से संजोने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सांस्कृतिक और शैक्षणिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने भी इस घोषणा का स्वागत करते हुए इसे महान लोककलाकार के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि बताया है।

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