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17 Jul 2026
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रथयात्रा हमारी आस्था और संस्कृति का महापर्व, छेरा-पहरा कर CM साय-राज्यपाल ने मांगा प्रदेश की समृद्धि का आशीर्वाद,

रथयात्रा हमारी आस्था और संस्कृति का महापर्व, छेरा-पहरा कर CM साय-राज्यपाल ने मांगा प्रदेश की समृद्धि का आशीर्वाद,
रथयात्रा हमारी आस्था और संस्कृति का महापर्व, छेरा-पहरा कर CM साय-राज्यपाल ने मांगा प्रदेश की समृद्धि का आशीर्वाद,। फोटो: आज का दिन न्यूज़

रायपुर, 17 जुलाई 2026: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और राज्यपाल श्री रमेन डेका ने आज राजधानी रायपुर के गायत्री नगर स्थित भगवान श्री जगन्नाथ मंदिर में भव्य रथयात्रा महोत्सव में भाग लिया। दोनों ने पूजा-अर्चना के बाद पारंपरिक **छेरा-पहरा** की पावन रस्म निभाकर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा से प्रदेश की सुख-समृद्धि, उत्तम वर्षा और किसानों की खुशहाली की कामना की।

मंदिर परिसर श्रद्धालुओं की भक्ति और उत्साह से गूंज उठा। वैदिक मंत्रोच्चार, भजन-कीर्तन और जय-जगन्नाथ के घोष के बीच भगवान की प्रतिमाओं को रथ पर विराजित किया गया और रथयात्रा का शुभारंभ हुआ।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा

रथयात्रा हमारी आस्था, लोकसंस्कृति, सामाजिक समरसता और जनभागीदारी का जीवंत महापर्व है। भगवान श्री जगन्नाथ किसानों के आराध्यदेव हैं। उनकी कृपा से ही समय पर वर्षा होती है, खेत लहलहाते हैं और प्रदेश में समृद्धि आती है।

मुख्यमंत्री ने भगवान से प्रार्थना की कि इस वर्ष छत्तीसगढ़ में भरपूर वर्षा हो, कृषि उत्पादन बढ़े और हर किसान खुशहाल बने। उन्होंने कहा कि यह पर्व सेवा, समर्पण, समानता और लोककल्याण का संदेश देता है।

राज्यपाल श्री रमेन डेका एवं मुख्यमंत्री श्री साय ने सोने की झाड़ू से छेरा-पहरा कर रथमार्ग का प्रतीकात्मक शुद्धिकरण किया। उन्होंने सभी प्रदेशवासियों को रथयात्रा की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान जगन्नाथ, बलभद्र एवं सुभद्रा का दिव्य आशीर्वाद पूरे छत्तीसगढ़ पर बना रहे और सभी के जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि का संचार हो।

 लेकिन यह है कि छत्तीसगढ़ में पुरी शैली की इस रथयात्रा को ओडिशा की उत्कल संस्कृति और दक्षिण कोसल की लोक परंपराओं का सशक्त सेतु माना जाता है। गायत्री नगर जगन्नाथ मंदिर में हर वर्ष बड़े उत्साह के साथ यह महापर्व मनाया जाता है।

इस अवसर पर सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल, विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, जनप्रतिनिधि, धार्मिक-सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी और हजारों श्रद्धालु मौजूद रहे।

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