जनजातीय क्षेत्रों में पारंपरिक वैद्यों को बनाया जाएगा स्वास्थ्य दूत, टीबी, डेंगू, फाइलेरिया और मौसमी बीमारियों पर भी चला जागरूकता अभियान
मनेंद्रगढ़।
जनजातीय क्षेत्रों में मलेरिया एवं अन्य मौसमी बीमारियों की रोकथाम को जनआंदोलन का स्वरूप देने और पारंपरिक वैद्यों की सहभागिता बढ़ाने के उद्देश्य से विकासखंड भरतपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खड़गवां में सिरहा-गुनिया बैगा सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में स्वास्थ्य विभाग ने पारंपरिक जनजातीय नेतृत्व और आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था के समन्वय पर विशेष जोर देते हुए स्वास्थ्य जागरूकता का संदेश दिया।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाश खरे के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनीष प्रताप सिंह, जिला मलेरिया सलाहकार संजीत सिंह सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ मां महामाया के जयघोष एवं पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ किया गया तथा सिरहा, गुनिया, बैगा और माता-पुजारियों का सम्मान किया गया।
डॉ. अविनाश खरे ने कहा कि जनजातीय समाज में सिरहा, गुनिया और बैगा अत्यंत सम्मानित एवं प्रभावशाली होते हैं। यदि उन्हें स्वास्थ्य विभाग के रोग नियंत्रण कार्यक्रमों से जोड़ा जाए तो मलेरिया, डेंगू, टीबी, फाइलेरिया सहित अन्य संक्रामक एवं मौसमी बीमारियों की समय पर पहचान, उपचार और रोकथाम में उल्लेखनीय सफलता मिल सकती है। उन्होंने सभी पारंपरिक वैद्यों से गांवों में स्वास्थ्य प्रहरी बनकर लोगों को बुखार होने पर तत्काल जांच कराने, मच्छरदानी के उपयोग, स्वच्छता, टीकाकरण और गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।
खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनीष प्रताप सिंह ने कहा कि पारंपरिक मान्यताओं और आधुनिक चिकित्सा पद्धति के समन्वय से जनजातीय क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। उन्होंने मलेरिया, डेंगू, फाइलेरिया, चिकनगुनिया, पीलिया, टीबी, एचपीवी (HPV) टीकाकरण, मधुमेह और सर्पदंश जैसी स्वास्थ्य समस्याओं के संबंध में विस्तृत जानकारी दी।
जिला मलेरिया सलाहकार संजीत सिंह ने कहा कि बुखार आने पर झाड़-फूंक या घरेलू उपचार में समय न गंवाते हुए तुरंत रक्त जांच करानी चाहिए। समय पर जांच और उपचार से मलेरिया जैसी गंभीर बीमारी से होने वाली जटिलताओं और मृत्यु को रोका जा सकता है। उन्होंने मच्छरदानी के नियमित उपयोग, जलभराव रोकने और स्वच्छता बनाए रखने की अपील की।
सम्मेलन में प्रतिभागियों को राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन (टीबी) कार्यक्रम, गैर-संचारी रोग (NCD), मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, नियमित टीकाकरण, पोषण, परिवार कल्याण, मधुमेह एवं उच्च रक्तचाप की जांच सहित विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम के समापन पर सिरहा, गुनिया, बैगा एवं माता-पुजारियों को सम्मानित किया गया। स्वास्थ्य विभाग ने उन्हें गांवों में स्वास्थ्य दूत की भूमिका निभाते हुए लोगों को समय पर जांच, उपचार और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।




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