LIVEभारत और दुनिया की हर बड़ी खबर
14 Jul 2026
ब्रेकिंग
विश्व मंच पर चमकी बस्तर की ढोकरा कला: प्रधानमंत्री मोदी ने न्यूजीलैंड के पीएम को भेंट की ट्री ऑफ लाइफ शिल्पकृति, खून से चिट्ठी और भारी तनाव के बीच दुर्ग में रोके गए विद्यामितान शिक्षक, क्या बस्तर-सरगुजा के नौनिहालों का भविष्य बनाने वाले अतिथि ही रहेंगे?खून से चिट्ठी और भारी तनाव के बीच दुर्ग में रोके गए विद्यामितान शिक्षक, क्या बस्तर-सरगुजा के नौनिहालों का भविष्य बनाने वाले 'अतिथि' ही रहेंगे?एमसीबी में जनसंख्या स्थिरता पखवाड़े की शुरुआत: जागरूकता रथ को CMHO डॉ. अविनाश खरे ने दिखाई हरी झंडी, चिरमिरी पुलिस का तेज रफ्तार बाइकरों पर बड़ा एक्शन : तीन मॉडिफाइड साइलेंसर जब्त, 60 हजार का जुर्माना, नियमों का पालन करने वालों का किया गया सम्मान

विश्व मंच पर चमकी बस्तर की ढोकरा कला: प्रधानमंत्री मोदी ने न्यूजीलैंड के पीएम को भेंट की ट्री ऑफ लाइफ शिल्पकृति,

विश्व मंच पर चमकी बस्तर की ढोकरा कला: प्रधानमंत्री मोदी ने न्यूजीलैंड के पीएम को भेंट की ट्री ऑफ लाइफ शिल्पकृति,
विश्व मंच पर चमकी बस्तर की ढोकरा कला: प्रधानमंत्री मोदी ने न्यूजीलैंड के पीएम को भेंट की ट्री ऑफ लाइफ शिल्पकृति, । फोटो: आज का दिन न्यूज़

कूटनीतिक उपहार में शामिल हुई छत्तीसगढ़ की जनजातीय धरोहर, वैश्विक स्तर पर मिली नई पहचान

रायपुर, 13 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का क्षण तब सामने आया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन को बस्तर की विश्वप्रसिद्ध ढोकरा 'ट्री ऑफ लाइफ' (जीवन वृक्ष) धातु शिल्पकृति भेंट की। प्रधानमंत्री के इस विशेष कूटनीतिक उपहार ने छत्तीसगढ़ की पारंपरिक जनजातीय कला और सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान दिलाई है।

प्रधानमंत्री द्वारा विदेशी राष्ट्राध्यक्ष को उपहार के रूप में बस्तर की ढोकरा शिल्पकृति का चयन राज्य के जनजातीय शिल्पकारों के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इससे न केवल छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक सम्मान मिला है, बल्कि स्थानीय हस्तशिल्प और कलाकारों को भी नई पहचान मिलने की उम्मीद बढ़ी है।

जनजातीय कला को मिल रही वैश्विक पहचान

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार जनजातीय संस्कृति, लोककलाओं और पारंपरिक शिल्प के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए लगातार कार्य कर रही है। विभिन्न योजनाओं के माध्यम से कलाकारों और शिल्पकारों को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिसके सकारात्मक परिणाम अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी दिखाई दे रहे हैं।

संस्कृति विभाग भी लोककला, जनजातीय परंपराओं और पारंपरिक हस्तशिल्प के संरक्षण, प्रचार-प्रसार और नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। बस्तर की ढोकरा कला का वैश्विक कूटनीतिक उपहार का हिस्सा बनना इन प्रयासों की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

हजारों वर्ष पुरानी है ढोकरा कला

बस्तर की ढोकरा कला विश्व की सबसे प्राचीन धातु शिल्प परंपराओं में से एक मानी जाती है। इसे 'लॉस्ट वैक्स कास्टिंग' (मोम सांचा ढलाई) तकनीक से तैयार किया जाता है। पूरी तरह हाथ से बनाई जाने वाली प्रत्येक शिल्पकृति अपनी बनावट और कलात्मक अभिव्यक्ति के कारण अद्वितीय होती है। यह कला पीढ़ियों से जनजातीय समुदायों की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा रही है।

'ट्री ऑफ लाइफ' का विशेष महत्व

प्रधानमंत्री द्वारा भेंट की गई 'ट्री ऑफ लाइफ' शिल्पकृति भारतीय संस्कृति में जीवन, समृद्धि, प्रकृति और मानव के बीच संतुलन का प्रतीक मानी जाती है। यह भारतीय परंपरा के कल्पवृक्ष की अवधारणा को दर्शाती है और न्यूजीलैंड के माओरी समुदाय की जीवन और प्रकृति से जुड़ी सांस्कृतिक मान्यताओं से भी सामंजस्य स्थापित करती है। इसी कारण यह शिल्पकृति सांस्कृतिक संवाद और वैश्विक मानवीय मूल्यों का भी प्रतीक बन गई है।

स्थानीय शिल्पकारों को मिलेगा लाभ

विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक उपहार के रूप में बस्तर की ढोकरा कला का चयन होने से राज्य के जनजातीय शिल्पकारों का उत्साह बढ़ेगा, स्थानीय हस्तशिल्प को नए बाजार मिलेंगे और छत्तीसगढ़ की समृद्ध कला, संस्कृति एवं जनजातीय विरासत को वैश्विक स्तर पर और अधिक पहचान मिलेगी।

यह खबर कैसी लगी?

शेयर करें

Admin

Admin

पाठकों की टिप्पणियां 0