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29 Jul 2026
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रायपुर : 85 की उम्र में भी स्वच्छता का जज्बा बरकरार : तिरिथ राम साहू बना रहे गांव को प्लास्टिक मुक्त

रायपुर : 85 की उम्र में भी स्वच्छता का जज्बा बरकरार : तिरिथ राम साहू बना रहे गांव को प्लास्टिक मुक्त
रायपुर : 85 की उम्र में भी स्वच्छता का जज्बा बरकरार : तिरिथ राम साहू बना रहे गांव को प्लास्टिक मुक्त। फोटो: आज का दिन न्यूज़

घर-घर पहुंचकर दे रहे स्वच्छता का संदेश, ग्रामीणों के लिए बने प्रेरणास्रोत

रायपुर, 29 जुलाई 2026

स्वच्छ भारत मिशन को जन आंदोलन बनाने में उम्र कोई बाधा नहीं है। विकासखंड कवर्धा की ग्राम पंचायत धरमपुरा के 85 वर्षीय वरिष्ठ नागरिक श्री तिरिथ राम साहू इसका जीवंत उदाहरण हैं। जीवन के इस पड़ाव में भी वे पूरे उत्साह और समर्पण के साथ गांव को स्वच्छ एवं प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए लगातार अभियान चला रहे हैं। पिछले छह माह से श्री साहू प्रतिदिन सुबह गांव की गलियों की सफाई, प्लास्टिक कचरा संग्रहण तथा नालियों की सफाई में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। इसके साथ ही वे ग्रामीणों को खुले में कचरा नहीं फेंकने, गीले एवं सूखे कचरे को अलग-अलग रखने तथा प्लास्टिक का उपयोग कम करने के लिए लगातार प्रेरित कर रहे हैं। श्री तिरिथ राम साहू घर-घर जाकर लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करते हैं। कचरा संग्रहण के दौरान स्वच्छाग्रही दीदियों के साथ ग्रामीणों को सहयोग के लिए प्रेरित करते हैं तथा गांव में एकत्रित प्लास्टिक कचरे को संग्रहण केंद्र तक पहुंचाने में भी सक्रिय रहते हैं। स्वयं हमेशा कपड़े का थैला उपयोग कर वे दूसरों के लिए उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं।

कलेक्टर श्री गोपाल वर्मा ने श्री तिरिथ राम साहू के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि यही है असली जनभागीदारी। स्वच्छता अभियान तभी सफल होगा, जब समाज के हर वर्ग की सक्रिय भागीदारी होगी। तिरिथ राम साहू जैसे नागरिक पूरे जिले के लिए प्रेरणा हैं। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अभिषेक अग्रवाल ने कहा कि श्री तिरिथ राम साहू यह साबित करते हैं कि यदि सेवा का जज्बा हो तो उम्र कभी बाधा नहीं बनती। स्वच्छता के लिए उनका समर्पण युवाओं के लिए भी प्रेरणादायी है। ऐसे नागरिक वास्तव में स्वच्छता अभियान के ब्रांड एंबेसडर हैं। जिला समन्वयक श्री संजय सोनी ने बताया कि दादा जी के समझाने के तरीके से गांव में प्लास्टिक के उपयोग में लगभग 90 प्रतिशत तक कमी आई है। आज गांव में खुले में कचरा लगभग दिखाई नहीं देता और लोग स्वच्छता के प्रति पहले से अधिक जागरूक हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि दादा जी रोज उन्हें स्वच्छता के लिए प्रेरित करते हैं। उनके प्रयासों का असर यह है कि अब बच्चे भी कचरा डस्टबिन में ही डालते हैं और पूरा गांव पहले की तुलना में अधिक साफ एवं सुंदर दिखाई देता है।

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