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12 Jun 2026
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EXCLUSIVE: जलवायु संकट की उल्टी गिनती शुरू, सिर्फ 4 साल दूर 1.5°C की खतरनाक सीमा; धरती रिकॉर्ड रफ्तार से हो रही गर्म वैज्ञानिकों की चेतावनी: ग्रीनहाउस

नई वैश्विक जलवायु रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि मानव गतिविधियों के कारण पृथ्वी का तापमान 1.37°C तक बढ़ चुका है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि मौजूदा उत्सर्जन जारी रहा तो दुनिया अगले चार वर्षों में 1.5°C की सीमा पार कर स...

EXCLUSIVE: जलवायु संकट की उल्टी गिनती शुरू, सिर्फ 4 साल दूर 1.5°C की खतरनाक सीमा; धरती रिकॉर्ड रफ्तार से हो रही गर्म वैज्ञानिकों की चेतावनी: ग्रीनहाउस
EXCLUSIVE: जलवायु संकट की उल्टी गिनती शुरू, सिर्फ 4 साल दूर 1.5°C की खतरनाक सीमा; धरती रिकॉर्ड रफ्तार से हो रही गर्म वैज्ञानिकों की चेतावनी: ग्रीनहाउस। फोटो: आज का दिन न्यूज़

Climate Story | विशेष रिपोर्ट

कई वर्षों तक जलवायु परिवर्तन को भविष्य का संकट माना जाता रहा। ऐसा खतरा, जिसका सामना आने वाली पीढ़ियों को करना पड़ेगा। लेकिन अब वैज्ञानिकों का कहना है कि वह भविष्य दरअसल हमारे वर्तमान में आ चुका है। नई वैश्विक रिपोर्ट के अनुसार पृथ्वी पहले से कहीं अधिक तेज़ी से गर्म हो रही है और यदि मौजूदा हालात जारी रहे तो दुनिया अगले चार वर्षों के भीतर 1.5 डिग्री सेल्सियस की महत्वपूर्ण सीमा पार कर सकती है।

Indicators of Global Climate Change (IGCC) की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2025 में मानव गतिविधियों के कारण वैश्विक तापमान औद्योगिक काल से पहले के स्तर की तुलना में 1.37 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि वर्तमान उत्सर्जन दर जारी रही तो दुनिया 1.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा को पार कर जाएगी, जिसे जलवायु परिवर्तन के सबसे खतरनाक प्रभावों से बचने के लिए वैश्विक लक्ष्य माना गया था।

रिपोर्ट तैयार करने में 17 देशों की 56 संस्थाओं से जुड़े 70 से अधिक वैज्ञानिकों ने योगदान दिया है। इनमें जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी पैनल (IPCC) से जुड़े कई प्रमुख विशेषज्ञ भी शामिल हैं।

पृथ्वी में बढ़ रहा ऊर्जा असंतुलन

रिपोर्ट का सबसे चिंताजनक निष्कर्ष केवल बढ़ता तापमान नहीं, बल्कि पृथ्वी का बढ़ता ऊर्जा असंतुलन है। वैज्ञानिक इसे "अर्थ एनर्जी इम्बैलेंस" कहते हैं। इसका अर्थ है कि पृथ्वी जितनी ऊर्जा अंतरिक्ष में वापस भेजती है, उससे कहीं अधिक ऊर्जा अब अपने भीतर रोक रही है। यही अतिरिक्त ऊर्जा महासागरों, वातावरण, बर्फ और भूमि में जमा होकर वैश्विक तापमान को लगातार बढ़ा रही है।
लीड्स विश्वविद्यालय के प्रीस्टली सेंटर फॉर क्लाइमेट फ्यूचर्स के निदेशक और रिपोर्ट के प्रमुख लेखक प्रोफेसर पियर्स फॉर्स्टर के अनुसार पृथ्वी का ऊर्जा असंतुलन अब रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है और पिछले कुछ दशकों में यह लगभग दोगुना हो गया है।

रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन

रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024 में वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन 56.8 अरब टन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य तक पहुंच गया, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। इसका सबसे बड़ा कारण जीवाश्म ईंधनों का निरंतर उपयोग है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि पिछले दस वर्षों में दर्ज लगभग पूरी अतिरिक्त गर्मी मानव गतिविधियों की वजह से हुई है। यूरोपीय मौसम पूर्वानुमान केंद्र की कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस से जुड़ी डॉ. सामंथा बर्गेस के मुताबिक पिछले दशक की लगभग पूरी गर्मी इंसानों द्वारा पैदा की गई है और इसके प्रभाव अब दुनिया भर में लोगों की आजीविका तथा पारिस्थितिक तंत्र पर साफ दिखाई देने लगे हैं।

समुद्र का बढ़ता जलस्तर बढ़ा रहा खतरा

रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2025 तक वैश्विक समुद्र स्तर वर्ष 1901 की तुलना में 23 सेंटीमीटर बढ़ चुका है। समुद्र स्तर बढ़ने की रफ्तार भी लगातार तेज हो रही है।
रॉयल नीदरलैंड्स इंस्टीट्यूट फॉर सी रिसर्च की डॉ. एमी स्लांगेन का कहना है कि यह बदलाव छोटा दिखाई दे सकता है, लेकिन इससे दुनिया के निचले तटीय इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ रहा है और लाखों लोगों की आजीविका प्रभावित हो रही है।

समुद्री ऊष्मा लहरें बनी नई चुनौती

रिपोर्ट में पहली बार समुद्री ऊष्मा लहरों (Marine Heatwaves) को भी शामिल किया गया है। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में दुनिया ने 65 ऐसे दिन देखे जब समुद्र में अत्यधिक गर्मी की स्थिति बनी रही।

दक्षिण कोरिया की पुसान नेशनल यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर जून-यी ली के अनुसार वर्ष 1991 के बाद से समुद्री ऊष्मा लहरों वाले दिनों की संख्या तीन गुना से अधिक बढ़ चुकी है। इसका असर समुद्री जैव विविधता, मत्स्य उत्पादन, तटीय अर्थव्यवस्था और मौसम प्रणालियों पर पड़ रहा है।
सिर्फ तीन साल का बचा कार्बन बजट

रिपोर्ट का सबसे गंभीर संकेत दुनिया के शेष कार्बन बजट को लेकर है। यदि वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस के भीतर सीमित रखना है तो वर्ष 2026 की शुरुआत में उपलब्ध कार्बन बजट केवल 130 अरब टन कार्बन डाइऑक्साइड रह जाएगा। मौजूदा उत्सर्जन दर को देखते हुए यह बजट लगभग तीन वर्षों में समाप्त हो सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन की घड़ी अब केवल चल नहीं रही, बल्कि तेज़ी से आगे बढ़ रही है। दुनिया लंबे समय तक तापमान के आंकड़ों पर बहस करती रही, लेकिन यह रिपोर्ट एक बड़ा सवाल सामने रखती है—धरती कितनी गर्म हो चुकी है, उससे भी अधिक महत्वपूर्ण यह है कि धरती कितनी तेज़ी से गर्म हो रही है।

आने वाले वर्षों में यही सवाल तय करेगा कि दुनिया जलवायु संकट को नियंत्रित कर पाएगी या उसके पीछे दौड़ती रह जाएगी।

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