मनेंद्रगढ़। विश्व रेबीज दिवस के अवसर पर सेवा संकल्प अभियान के तहत पशुधन विकास विभाग मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर द्वारा जिले के विभिन्न संस्थानों में रेबीज नियंत्रण एवं जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। अभियान के दौरान जिले में कुल 76 श्वानों का निःशुल्क एंटी रेबीज टीकाकरण किया गया। इसके साथ ही श्वानों की डिवर्मिंग कर पशुपालकों और आम नागरिकों को रेबीज से बचाव के उपायों की जानकारी दी गई।
अभियान के तहत मनेन्द्रगढ़ में 37, खड़गवां में 13 और भरतपुर में 26 श्वानों को रेबीज से बचाव का टीका लगाया गया।
विभाग ने लोगों को पालतू श्वानों का नियमित टीकाकरण कराने तथा पशुओं के काटने की घटनाओं को गंभीरता से लेने के लिए जागरूक किया।
रेबीज से बचाव में समय पर टीकाकरण जरूरी
डॉ. विनीत कुमार भारद्वाज ने बताया कि रेबीज एक गंभीर वायरल बीमारी है, जो संक्रमित पशु के काटने या उसके संपर्क में आने से मनुष्य सहित अन्य पशुओं में फैल सकती है। लक्षण दिखाई देने के बाद बीमारी बेहद गंभीर हो सकती है, इसलिए बचाव के लिए समय पर टीकाकरण महत्वपूर्ण है।
उन्होंने बताया कि श्वानों को निर्धारित समय पर एंटी रेबीज वैक्सीन और आवश्यक बूस्टर डोज लगवाना चाहिए। यदि किसी पालतू पशु को संदिग्ध रूप से संक्रमित श्वान या जंगली पशु काट ले, तो उसे तत्काल पशु चिकित्सालय ले जाकर चिकित्सकीय सलाह और आवश्यक उपचार कराया जाना चाहिए।
कुत्ते के काटने पर 15 मिनट तक धोएं घाव
जागरूकता कार्यक्रम के दौरान लोगों को बताया गया कि कुत्ते के काटने पर घाव को तुरंत बहते पानी से कम से कम 15 मिनट तक अच्छी तरह धोना चाहिए। इसके बाद जल्द से जल्द स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर चिकित्सक की सलाह के अनुसार रेबीज से बचाव का टीकाकरण कराया जाना चाहिए।
विभाग ने लोगों से अपील की कि काटने वाला कुत्ता सामान्य या टीकाकृत दिखाई देने पर भी चिकित्सकीय सलाह लेने में लापरवाही न करें। घाव पर मिर्च, तेल, मिट्टी या अन्य घरेलू पदार्थ लगाने से बचें और झाड़-फूंक के कारण उपचार में देरी न करें।
पालतू और निराश्रित श्वानों के टीकाकरण में करें सहयोग
पशुधन विकास विभाग के उप संचालक डॉ. तनवीर अहमद ने आमजन से पालतू पशुओं को श्वान के काटने की घटना को हल्के में नहीं लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में तत्काल नजदीकी पशु चिकित्सालय से संपर्क कर चिकित्सकीय सलाह एवं उपचार लेना चाहिए।
उन्होंने लोगों से अपने पालतू श्वानों के साथ-साथ गली-मोहल्लों में रहने वाले निराश्रित श्वानों के नियमित टीकाकरण में भी सहयोग करने की अपील की।
विभाग के अनुसार नियमित टीकाकरण और लगातार जन-जागरूकता के माध्यम से रेबीज संक्रमण के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है।




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