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28 Aug 2026
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खून से चिट्ठी और भारी तनाव के बीच दुर्ग में रोके गए विद्यामितान शिक्षक, क्या बस्तर-सरगुजा के नौनिहालों का भविष्य बनाने वाले अतिथि ही रहेंगे?

खून से चिट्ठी और भारी तनाव के बीच दुर्ग में रोके गए विद्यामितान शिक्षक, क्या बस्तर-सरगुजा के नौनिहालों का भविष्य बनाने वाले अतिथि ही रहेंगे?
खून से चिट्ठी और भारी तनाव के बीच दुर्ग में रोके गए विद्यामितान शिक्षक, क्या बस्तर-सरगुजा के नौनिहालों का भविष्य बनाने वाले अतिथि ही रहेंगे?। फोटो: आज का दिन न्यूज़

रायपुर/दुर्ग।

छत्तीसगढ़ की बुनियादी शिक्षा व्यवस्था को 11 वर्षों तक अपने कंधों पर संभालने वाले विद्यामितान (प्रांतीय अतिथि शिक्षक) अब आर-पार की लड़ाई के लिए सड़कों पर उतर आए हैं। नियमितीकरण और सेवा सुरक्षा की मांग को लेकर दुर्ग के हिंदी भवन से शुरू हुआ इन शिक्षकों का 'विधानसभा पैदल मार्च' भारी प्रशासनिक बंदिशों और तनाव के बीच घिर गया है।

तपती धूप और तेज बारिश के बीच जब 1,500 से अधिक शिक्षक विधानसभा का घेराव करने के लिए आगे बढ़े, तो पुलिस प्रशासन ने भारी बैरिकेडिंग कर उन्हें रोकने की कोशिश की। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच तीखी झड़प और धक्का-मुक्की देखने को मिली।

इच्छामृत्यु की मांग: आंदोलन में आया भावुक मोड़

यह आंदोलन केवल एक प्रशासनिक मांग नहीं, बल्कि उन हजारों परिवारों की पीड़ा बन चुका है जिन्होंने बस्तर और सरगुजा के वनांचलों, धुर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों और पहाड़ी दुर्गम रास्तों पर शिक्षा का दीप जलाए रखा। विडंबना देखिए कि जिन गुरुओं के पढ़ाए बच्चे आज डॉक्टर, इंजीनियर और पुलिस अफसर बनकर देश की सेवा कर रहे हैं, उन शिक्षकों का अपना भविष्य आज भी अधर में है।

निराशा का आलम यह है कि कई आंदोलनकारी शिक्षकों ने अपने खून से देश के राष्ट्रपति और प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम पत्र लिखकर 'इच्छामृत्यु' की मांग की है। शिक्षकों का कहना है कि 11 वर्षों के इस लंबे इंतजार में कई साथी आर्थिक तंगहाली के कारण दुनिया छोड़ गए, लेकिन सरकारों से सिर्फ खोखले आश्वासन ही मिले।

जनहित और व्यवस्था पर बड़ा सवाल

हम सरकार से कोई खैरात या उपकार नहीं मांग रहे हैं। यह हमारे 11 वर्षों के त्याग, श्रम और निष्ठा का न्यायपूर्ण सम्मान है। यदि नौनिहालों का भविष्य गढ़ने वाला शिक्षक ही मानसिक और आर्थिक रूप से असुरक्षित रहेगा, तो प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था का भविष्य कैसे सुरक्षित रह सकता है?"

प्रांतीय अतिथि शिक्षक (विद्यामितान) कल्याण संघ

क्या हैं प्रमुख मांगें?

नियमितीकरण: वर्षों से दूरस्थ क्षेत्रों में सेवाएं दे रहे विद्यामितान शिक्षकों का अविलंब संविलियन किया जाए।

समान कार्य-समान वेतन: नियमित शिक्षकों की तरह ही इन्हें भी सम्मानजनक मानदेय और सेवा शर्तें दी जाएं।

लिखित आदेश की जिद: संघ ने स्पष्ट किया है कि जब तक सरकार की ओर से ठोस लिखित आदेश नहीं आता, आंदोलन और राजधानी का घेराव समाप्त नहीं होगा।

फिलहाल, दुर्ग और रायपुर की सीमाओं पर पुलिस का कड़ा पहरा है और स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। अब देखना यह है कि संवेदनशील मामलों पर त्वरित निर्णय लेने वाली सरकार इन 'शिक्षादूतों' के दर्द पर कब मरहम लगाती है।

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