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25 Jun 2026
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महिला आयोग की सख्त सुनवाई: 11 मामलों में कार्रवाई, खदान दुर्घटना पीड़िता को मुआवजा व रोजगार दिलाने की पहल,

महिला आयोग की सख्त सुनवाई: 11 मामलों में कार्रवाई, खदान दुर्घटना पीड़िता को मुआवजा व रोजगार दिलाने की पहल,
महिला आयोग की सख्त सुनवाई: 11 मामलों में कार्रवाई, खदान दुर्घटना पीड़िता को मुआवजा व रोजगार दिलाने की पहल,। फोटो: आज का दिन न्यूज़

भरण-पोषण मामले में अनुपस्थित पक्षकारों पर आयोग सख्त, 8 जुलाई को बिलासपुर में अगली सुनवाई

मनेंद्रगढ़। महिलाओं को त्वरित न्याय एवं राहत उपलब्ध कराने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक की अध्यक्षता में महिला आयोग की जिला स्तरीय सुनवाई आयोजित की गई। यह आयोग की प्रदेश स्तर पर 403वीं तथा मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले में दूसरी सुनवाई थी।

सुनवाई के दौरान सरगुजा संभाग अंतर्गत एमसीबी जिले के कुल 11 प्रकरणों पर विचार किया गया, जिनमें से 5 मामलों का मौके पर ही निराकरण कर नस्तीबद्ध कर दिया गया।

सबसे महत्वपूर्ण मामले में वेस्ट कॉलरी चिरमिरी की खदान दुर्घटना में मृत कर्मी स्वर्गीय नर्मदा सिंह की पत्नी ने आयोग को बताया कि दुर्घटना के बाद अब तक उसे मुआवजा नहीं मिला है। अनुकंपा नियुक्ति के बजाय उसे ठेका श्रमिक के रूप में कार्य दिया गया था, जिसे नवंबर 2025 में समाप्त कर दिया गया। इससे दो बच्चों के भरण-पोषण का गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने प्रोटेक्शन ऑफिसर को निर्देश दिए कि आवेदिका को पुनः रोजगार उपलब्ध कराने, वेतन संबंधी जानकारी जुटाने तथा मुआवजा भुगतान की स्थिति की रिपोर्ट प्रस्तुत करें। यदि एसईसीएल द्वारा मुआवजा नहीं दिया गया है तो आयोग आवश्यक अनुशंसा करेगा।

घरेलू हिंसा से जुड़े एक मामले में दोनों पक्ष आयोग के समक्ष उपस्थित हुए। आयोग ने समझौते का प्रयास किया, लेकिन आवेदिका ने साथ रहने से इंकार कर दिया। आयोग ने विधिक कार्रवाई एवं सुलह प्रयास जारी रखने की सलाह देते हुए मामला नस्तीबद्ध कर दिया।

एक अन्य मामले में दोनों पक्षों के बीच समझौता हो जाने की जानकारी मिलने पर आयोग ने आवेदिका के अनुरोध पर प्रकरण समाप्त कर दिया। वहीं संपत्ति विवाद से जुड़े मामले में आयोग ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों का निराकरण राजस्व अथवा दिवानी न्यायालय के माध्यम से किया जा सकता है और आवश्यक सलाह देते हुए प्रकरण नस्तीबद्ध किया गया।

भरण-पोषण से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में आवेदिका अपनी 10 वर्षीय पुत्री के साथ उपस्थित हुई, जबकि सभी अनावेदक अनुपस्थित रहे। आवेदिका ने बताया कि बच्ची के पालन-पोषण और शिक्षा का पूरा खर्च वह स्वयं उठा रही है तथा अनावेदक लगभग 30 हजार रुपये मासिक आय होने के बावजूद कोई आर्थिक सहायता नहीं दे रहा है। उसने 15 हजार रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण की मांग की।

मामले को गंभीर मानते हुए आयोग ने अगली सुनवाई 8 जुलाई को बिलासपुर में निर्धारित की है। साथ ही पुलिस अधीक्षक बिलासपुर को पत्र भेजकर संबंधित अनावेदकों की अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए जाएंगे। आयोग ने स्पष्ट किया कि लगातार अनुपस्थिति की स्थिति में संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध भी कार्रवाई की जा सकती है।

सुनवाई के दौरान कुछ अन्य मामलों में समझौता होने अथवा न्यायालय में प्रकरण लंबित होने के कारण आयोग ने मामलों को नस्तीबद्ध किया।

महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने कहा कि आयोग महिलाओं को त्वरित न्याय, उनके अधिकारों की रक्षा तथा पारिवारिक, सामाजिक और आर्थिक समस्याओं के समाधान के लिए पूरी संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रहा है। सुनवाई के माध्यम से पीड़ित महिलाओं को शीघ्र राहत और न्याय उपलब्ध कराने का प्रयास लगातार जारी रहेगा।

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