डीएमएफ की 5.38 लाख रुपये की लागत से स्थापित सोलर हाईमास्ट से विद्यार्थियों की सुविधा और सुरक्षा हुई मजबूत,
मनेंद्रगढ़। एमसीबी जिले के दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं को मजबूत करने के लिए जिला प्रशासन द्वारा किए जा रहे प्रयास अब जमीन पर सकारात्मक बदलाव के रूप में दिखाई दे रहे हैं। भरतपुर विकासखंड के विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा आवासीय विद्यालय, नौढिया में स्थापित सोलर हाईमास्ट इसका एक प्रभावी उदाहरण है। जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) मद से 5.38 लाख रुपये की लागत से स्थापित इस सोलर हाईमास्ट ने विद्यालय परिसर में रात्रिकालीन प्रकाश व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ विद्यार्थियों की सुरक्षा और सुविधा को भी मजबूती दी है।
130 किलोमीटर दूर दुर्गम क्षेत्र में पहुंचा स्थायी उजाला
विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा आवासीय विद्यालय नौढिया जिला मुख्यालय से करीब 130 किलोमीटर दूर दुर्गम एवं वनांचल क्षेत्र में स्थित है। आवासीय विद्यालय होने के कारण यहां विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए रात के समय पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था बेहद आवश्यक थी।
विद्यालय परिसर में पहले बिजली गुल होने की स्थिति में अंधेरा छा जाता था। इस समस्या को देखते हुए जिला प्रशासन एमसीबी की पहल पर क्रियान्वयन एजेंसी क्रेडा के माध्यम से सोलर हाईमास्ट संयंत्र स्थापित किया गया। सौर ऊर्जा आधारित यह संयंत्र दिन में सूर्य की रोशनी से ऊर्जा संचित करता है और रात में उसी ऊर्जा का उपयोग विद्यालय परिसर को रोशन करने के लिए करता है।
बिजली गुल होने पर भी परिसर में बनी रहती है रोशनी
सोलर हाईमास्ट की स्थापना के बाद विद्यालय की रात्रिकालीन प्रकाश व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। बिजली आपूर्ति बाधित होने के बावजूद सोलर हाईमास्ट के माध्यम से परिसर में रोशनी बनी रहती है। संयंत्र अपने आसपास करीब 50 मीटर तक के क्षेत्र को प्रकाशमान करता है।
इससे रात के समय विद्यार्थियों के आवागमन में सुविधा होने के साथ विद्यालय परिसर में सुरक्षा का वातावरण भी मजबूत हुआ है। आवासीय विद्यालय होने के कारण यह सुविधा विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए विशेष रूप से उपयोगी साबित हो रही है।
विद्यार्थियों और शिक्षकों ने जताया आभार
विद्यालय के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने सोलर हाईमास्ट की सुविधा को उपयोगी बताते हुए जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया है। उनका कहना है कि पहले बिजली चले जाने पर विद्यालय परिसर में अंधेरा हो जाता था, लेकिन अब सौर ऊर्जा से संचालित हाईमास्ट के कारण रात में भी पर्याप्त प्रकाश उपलब्ध रहता है। इससे दैनिक गतिविधियों और आवागमन में सुविधा के साथ सुरक्षा की भावना भी बढ़ी है।
स्वच्छ ऊर्जा के साथ आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम
नौढिया विद्यालय में स्थापित सोलर हाईमास्ट केवल प्रकाश व्यवस्था का साधन नहीं है, बल्कि दूरस्थ क्षेत्र में सौर ऊर्जा और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक सार्थक पहल भी है। इससे पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम करने के साथ विद्यालय परिसर में निरंतर और बेहतर प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित हुई है।
डीएमएफ मद से 5.38 लाख रुपये की लागत से किया गया यह कार्य दूरस्थ क्षेत्र की वास्तविक जरूरत को पूरा करने के साथ बैगा विद्यार्थियों को सुरक्षित, सुविधाजनक और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में जिला प्रशासन की महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया है।




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