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19 Aug 2026
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कोलकाता में 21 जुलाई रैली से पहले सियासी टकराव, धर्मतला में धारा 163 लागू; टीएमसी ने हाई कोर्ट जाने का फैसला किया,

कोलकाता में 21 जुलाई रैली से पहले सियासी टकराव, धर्मतला में धारा 163 लागू; टीएमसी ने हाई कोर्ट जाने का फैसला किया,
कोलकाता में 21 जुलाई रैली से पहले सियासी टकराव, धर्मतला में धारा 163 लागू; टीएमसी ने हाई कोर्ट जाने का फैसला किया, । फोटो: आज का दिन न्यूज़

कोलकाता में 21 जुलाई शहीद दिवस रैली से पहले राजनीतिक माहौल एक बार फिर गरमा गया है। धर्मतला इलाके में कोलकाता पुलिस ने 2 जुलाई से 30 अगस्त तक धारा 163 लागू कर दी है, जिसके तहत पांच या उससे अधिक लोगों की सभा, रैली, जुलूस, धरना और प्रदर्शन पर रोक रहेगी। पुलिस का कहना है कि यह कदम संभावित हिंसक प्रदर्शनों और यातायात बाधा की आशंका को देखते हुए एहतियात के तौर पर उठाया गया है। इस आदेश के बाद टीएमसी की वार्षिक 21 जुलाई रैली को लेकर अनिश्चितता और बढ़ गई है, क्योंकि पार्टी का प्रमुख कार्यक्रम इसी इलाके में होता रहा है।

कोलकाता पुलिस का कहना है कि धर्मतला शहर का अत्यंत व्यस्त और संवेदनशील हिस्सा है, जहां किसी भी बड़े राजनीतिक जमावड़े का असर सीधे ट्रैफिक, सुरक्षा और आम लोगों की आवाजाही पर पड़ता है। इसी वजह से प्रशासन ने विस्तृत प्रतिबंधात्मक व्यवस्था लागू की है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इस क्षेत्र में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता है और भीड़ बढ़ने की आशंका को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। हालांकि इस आदेश ने राजनीतिक विवाद को और गहरा कर दिया है।

तृणमूल कांग्रेस ने इस कार्रवाई का कड़ा विरोध किया है। पार्टी ने साफ कहा है कि वह इस आदेश को चुनौती देने के लिए कलकत्ता हाई कोर्ट जाएगी। टीएमसी नेताओं का कहना है कि इतने लंबे समय तक पूरे इलाके में पाबंदी लगाना अनुचित है और इससे लोकतांत्रिक अधिकारों पर असर पड़ता है। पार्टी का यह भी तर्क है कि 21 जुलाई की रैली केवल राजनीतिक आयोजन नहीं, बल्कि टीएमसी के लिए भावनात्मक और संगठनात्मक रूप से बेहद अहम कार्यक्रम है, इसलिए इसे रोकने या सीमित करने की कोशिश स्वीकार्य नहीं है।

विपक्ष ने भी इस मामले में सरकार और प्रशासन पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। राजनीतिक हलकों में इसे विपक्षी आवाज़ों को कमजोर करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। दूसरी ओर, प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय किसी पार्टी के खिलाफ नहीं, बल्कि शहर में शांति बनाए रखने के लिए लिया गया है। फिलहाल निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि कलकत्ता हाई कोर्ट में टीएमसी की चुनौती पर क्या रुख सामने आता है और 21 जुलाई की रैली को लेकर आगे क्या स्थिति बनती है।

धर्मतला की यह पाबंदी सिर्फ एक राजनीतिक आदेश नहीं, बल्कि कोलकाता की नागरिक व्यवस्था, सुरक्षा और जनजीवन से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन गई है। व्यस्त बाजार, दफ्तर, परिवहन और आम आवागमन पर इसका असर महसूस किया जा सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मामला सिर्फ टीएमसी और प्रशासन के बीच नहीं, बल्कि पूरे शहर की सार्वजनिक जीवन व्यवस्था से जुड़ी बहस का केंद्र बना रहेगा।

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