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15 Aug 2026
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EXCLUSIVE | 42°C था तापमान, लेकिन शरीर ने महसूस किए 51°C! आखिर क्या है हीट इंडेक्स, वेट बल्ब और WBGT, जो बढ़ा रहे हैं गर्मी का खतरा?

EXCLUSIVE | 42°C था तापमान, लेकिन शरीर ने महसूस किए 51°C! आखिर क्या है हीट इंडेक्स, वेट बल्ब और WBGT, जो बढ़ा रहे हैं गर्मी का खतरा?
EXCLUSIVE | 42°C था तापमान, लेकिन शरीर ने महसूस किए 51°C! आखिर क्या है हीट इंडेक्स, वेट बल्ब और WBGT, जो बढ़ा रहे हैं गर्मी का खतरा?। फोटो: आज का दिन न्यूज़

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में हाल के दिनों में अधिकतम तापमान करीब 42 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, लेकिन मौसम विभाग की रिपोर्ट में "फील्स लाइक टेम्परेचर" यानी महसूस होने वाला तापमान 50 से 51 डिग्री सेल्सियस तक बताया गया। इसके बाद लोगों के मन में सवाल उठा कि जब थर्मामीटर 42 डिग्री दिखा रहा है, तो 50 डिग्री से अधिक तापमान कहां से आ गया?

दरअसल, यहां कोई नया तापमान नहीं मापा जा रहा है। थर्मामीटर अब भी वास्तविक तापमान 42 डिग्री ही दर्ज करता है। 50 या 51 डिग्री का आंकड़ा एक वैज्ञानिक अनुमान है, जिसे हीट इंडेक्स (Heat Index) या फील्स लाइक टेम्परेचर (Feels Like Temperature) कहा जाता है। यह बताता है कि हवा का तापमान और उसमें मौजूद नमी (Humidity) मिलकर इंसानी शरीर पर कितनी गर्मी का असर डाल रहे हैं।

शरीर सिर्फ तापमान नहीं, नमी भी महसूस करता है

अब तक आमतौर पर गर्मी का अंदाजा केवल तापमान देखकर लगाया जाता था, लेकिन इंसानी शरीर केवल तापमान नहीं महसूस करता। वह हवा में मौजूद नमी का भी प्रभाव झेलता है।

यदि तापमान 42 डिग्री हो और हवा शुष्क (सूखी) हो, तो शरीर से निकलने वाला पसीना तेजी से सूख जाता है और उसके साथ शरीर की गर्मी भी बाहर निकल जाती है। लेकिन यदि हवा में नमी अधिक हो, तो पसीना आसानी से नहीं सूखता। इससे शरीर का प्राकृतिक कूलिंग सिस्टम कमजोर पड़ जाता है और वही 42 डिग्री तापमान 50 डिग्री या उससे अधिक जैसा महसूस होने लगता है।

हीट इंडेक्स की भी अपनी सीमाएं हैं

विशेषज्ञ बताते हैं कि हीट इंडेक्स यह मानकर तैयार किया जाता है कि व्यक्ति छांव में है, उस पर सीधी धूप नहीं पड़ रही है और हवा सामान्य गति से चल रही है।

यदि कोई व्यक्ति तेज धूप में खड़ा हो, सड़क निर्माण, खेती, फैक्ट्री या अन्य मेहनत वाला काम कर रहा हो, तो शरीर को महसूस होने वाली गर्मी हीट इंडेक्स से भी अधिक हो सकती है। यही कारण है कि यह कोई अंतिम या वास्तविक तापमान नहीं, बल्कि सामान्य परिस्थितियों के आधार पर तैयार किया गया वैज्ञानिक अनुमान है।

इसके अलावा बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, पहले से बीमार लोगों और लंबे समय तक बाहर काम करने वाले श्रमिकों पर इसका प्रभाव अलग-अलग हो सकता है।

क्या है वेट बल्ब टेम्परेचर?

जलवायु परिवर्तन के साथ एक और शब्द तेजी से चर्चा में आया है—वेट बल्ब टेम्परेचर (Wet Bulb Temperature)। अक्सर लोग इसे ही हीट इंडेक्स समझ लेते हैं, जबकि दोनों अलग-अलग वैज्ञानिक मापदंड हैं।

यदि हीट इंडेक्स यह बताता है कि गर्मी शरीर को कैसी महसूस होगी, तो वेट बल्ब टेम्परेचर यह बताता है कि शरीर पसीने के जरिए खुद को कितना प्रभावी ढंग से ठंडा रख पा रहा है।

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वैज्ञानिकों के अनुसार यदि वेट बल्ब टेम्परेचर लंबे समय तक लगभग 35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाए, तो स्वस्थ व्यक्ति भी छांव में आराम करते हुए अपने शरीर को पर्याप्त ठंडा नहीं रख पाएगा। इसे इंसानी सहनशक्ति की सबसे खतरनाक सीमा माना जाता है।

हालांकि राहत की बात यह है कि हाल के दिनों में दिल्ली का वेट बल्ब टेम्परेचर लगभग 29 से 30 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा, जो असहज और जोखिम भरा जरूर है, लेकिन अभी उस चरम सीमा से नीचे है।

WBGT: बाहर काम करने वालों के लिए सबसे महत्वपूर्ण पैमाना

यदि कोई व्यक्ति तेज धूप में सड़क बना रहा हो, खेत में काम कर रहा हो, खिलाड़ी अभ्यास कर रहे हों या सैनिक प्रशिक्षण ले रहे हों, तो केवल हीट इंडेक्स या वेट बल्ब टेम्परेचर पर्याप्त नहीं होते।

ऐसी परिस्थितियों में विशेषज्ञ वेट बल्ब ग्लोब टेम्परेचर (WBGT) का उपयोग करते हैं। यह तापमान, नमी, धूप, हवा की गति और आसपास से मिलने वाली गर्मी—सभी कारकों को मिलाकर बताता है कि किसी स्थान पर काम करना कितना सुरक्षित है।

इसी वजह से सेना, खेल संगठन, फैक्ट्रियां और कई देशों के कार्यस्थल सुरक्षा मानकों में WBGT को सबसे भरोसेमंद पैमाना माना जाता है।

बदलते मौसम के साथ बदल रही है गर्मी को समझने की सोच

विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन ने केवल तापमान नहीं बढ़ाया है, बल्कि गर्मी को समझने का तरीका भी बदल दिया है।

पहले लोग केवल यह पूछते थे कि आज तापमान कितना है, लेकिन अब यह जानना भी जरूरी हो गया है कि शरीर इस गर्मी को किस तरह महसूस करेगा और क्या वह खुद को सुरक्षित रूप से ठंडा रख पाएगा।

आने वाले वर्षों में हीट इंडेक्स, वेट बल्ब टेम्परेचर और WBGT जैसे वैज्ञानिक मापदंड मौसम की जानकारी का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकते हैं और लोगों को हीट वेव से बचाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

 

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