20 अगस्त को लाई के हसदेव नदी इंटकवेल में होगी बड़ी मॉक एक्सरसाइज; भारी बारिश, जलभराव, सर्पदंश, आकाशीय बिजली और सड़क संपर्क टूटने जैसी परिस्थितियों की होगी मैदानी परीक्षा
मनेंद्रगढ़। संभावित बाढ़ आपदा के दौरान राहत और बचाव कार्यों में किसी भी तरह की देरी न हो, इसके लिए मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले में ‘जीरो डिले’ रिस्पॉन्स सिस्टम तैयार किया जा रहा है। इसी उद्देश्य से मंगलवार को राज्य स्तरीय टेबल टॉप एक्सरसाइज-मॉक एक्सरसाइज ऑन फ्लड डिजास्टर इन छत्तीसगढ़ के तहत जिले की आपदा प्रबंधन तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई।
अभ्यास के दौरान लगातार भारी बारिश, नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने, निचले इलाकों में जलभराव, गांवों का संपर्क टूटने, सड़क-पुल क्षतिग्रस्त होने, बिजली एवं संचार व्यवस्था बाधित होने और लोगों के फंसने जैसी काल्पनिक परिस्थितियां सामने रखी गईं। इन परिस्थितियों में सूचना मिलने से लेकर रेस्क्यू, राहत और सामान्य स्थिति बहाल होने तक हर विभाग की भूमिका और आपसी समन्वय को परखा गया।
सूचना मिलते ही सक्रिय होगा पूरा तंत्र
टेबल टॉप एक्सरसाइज में यह रणनीति तैयार की गई कि बाढ़ की सूचना मिलते ही नियंत्रण कक्ष सक्रिय हो, समयबद्ध चेतावनी जारी हो और बचाव दल एवं आवश्यक संसाधनों को तत्काल प्रभावित क्षेत्रों के लिए रवाना किया जाए।
एसएमएस, सायरन, मुनादी, स्थानीय संचार माध्यमों और मैदानी अमले के जरिए चेतावनी गांवों तक पहुंचाने पर जोर दिया गया। मोबाइल नेटवर्क और बिजली बाधित होने की स्थिति में वैकल्पिक संचार व्यवस्था तैयार रखने की रणनीति भी बनाई गई।
लक्ष्य रखा गया कि आपदा के दौरान निर्णय और कार्रवाई के बीच न्यूनतम समय हो और जिला मुख्यालय से लेकर ग्राम स्तर तक पूरा तंत्र एक साथ सक्रिय हो।
सभी विभागों की जिम्मेदारी तय
बाढ़ को बहु-विभागीय आपदा मानते हुए राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, पुलिस, नगर सेना एवं अग्निशमन, स्वास्थ्य, जल संसाधन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, लोक निर्माण, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, नगरीय निकाय, विद्युत, खाद्य, परिवहन, पशुपालन, वन एवं दूरसंचार विभाग के बीच समन्वय पर विशेष जोर दिया गया।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग समग्र समन्वय और निगरानी करेगा। पुलिस एवं सुरक्षा बल सुरक्षा तथा यातायात व्यवस्था संभालेंगे, जबकि अग्निशमन और प्रशिक्षित बचाव दल रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटेंगे। आवश्यकता पड़ने पर एसडीआरएफ और एनडीआरएफ जैसी विशेषज्ञ एजेंसियों की सहायता लेने की तैयारी भी रखी जाएगी।
बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांगों की निकासी पहले
काल्पनिक आपदा परिदृश्य में कमजोर और संवेदनशील वर्गों की सुरक्षित निकासी को प्राथमिकता दी गई। बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, दिव्यांगजनों, बीमार व्यक्तियों और अकेले रहने वाले लोगों को सबसे पहले सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की रणनीति बनाई गई।
राहत शिविरों में भोजन, स्वच्छ पेयजल, शौचालय, स्वास्थ्य सुविधा, सुरक्षा और आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी चर्चा हुई। स्वास्थ्य विभाग को मेडिकल टीम, एंबुलेंस और जरूरी दवाओं के साथ तैयार रखने तथा गंभीर मरीजों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
बाढ़ के साथ सर्पदंश और आकाशीय बिजली से भी निपटने की तैयारी
भारी बारिश के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में सर्पदंश और आकाशीय बिजली के बढ़ते खतरे को भी आपदा प्रबंधन योजना में शामिल किया गया।
ग्रामीणों को मौसम संबंधी चेतावनियों के प्रति सजग करने, गरज-चमक के दौरान खुले स्थानों और पेड़ों के नीचे नहीं रहने तथा सुरक्षित भवनों में शरण लेने के लिए जागरूक करने पर जोर दिया गया।
सर्पदंश की स्थिति में झाड़-फूंक के बजाय तत्काल स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने और स्वास्थ्य संस्थानों में आवश्यक उपचार उपलब्ध रखने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।
नाव से लेकर लाइफ जैकेट तक, संसाधनों की होगी जांच
बाढ़ संभावित क्षेत्रों में नाव, लाइफ जैकेट, रस्सी, टॉर्च, संचार उपकरण, जनरेटर, प्राथमिक उपचार सामग्री, भोजन और पेयजल सहित आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता की समीक्षा की गई।
तहसील, विकासखंड और ग्राम स्तर पर तैराकों, नाव चालकों, बचाव दलों और प्रशिक्षित स्वयंसेवकों की सूची अद्यतन रखने तथा जरूरत पड़ते ही उनकी सेवाएं लेने की व्यवस्था पर भी चर्चा हुई।
विद्युत विभाग को जलभराव वाले क्षेत्रों में विद्युत दुर्घटनाओं की रोकथाम और स्थिति सामान्य होने पर बिजली आपूर्ति जल्द बहाल करने की रणनीति पर काम करने को कहा गया। वहीं लोक निर्माण और ग्रामीण यांत्रिकी सेवा को क्षतिग्रस्त सड़क एवं पुलों का तत्काल आकलन कर वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराने की तैयारी रखने पर जोर दिया गया।
रेस्क्यू के बाद भी जारी रहेगी निगरानी
आपदा प्रबंधन की रणनीति को केवल रेस्क्यू तक सीमित नहीं रखा गया है। राहत से लेकर पुनर्वास तक की पूरी प्रक्रिया को योजना में शामिल किया गया है।
प्रभावित परिवारों का पंजीयन, नुकसान का आकलन, खाद्यान्न एवं पेयजल की निरंतर आपूर्ति और सामान्य जनजीवन की जल्द बहाली पर भी ध्यान दिया गया। पशुपालन विभाग को पशुओं के लिए चारा, उपचार और सुरक्षित स्थान की व्यवस्था तथा खाद्य विभाग को राहत सामग्री उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी दी गई।
20 अगस्त को लाई में होगी असली परीक्षा
टेबल टॉप एक्सरसाइज में तैयार रणनीति की 20 अगस्त को मैदानी परीक्षा होगी। जिले के तहसील नागपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत लाई स्थित हसदेव नदी इंटकवेल में व्यापक मॉक एक्सरसाइज आयोजित की जाएगी।
इस दौरान बाढ़ की सूचना मिलने के बाद नियंत्रण कक्ष की सक्रियता, चेतावनी की गांवों तक पहुंच, बचाव दलों की तैनाती, फंसे लोगों की सुरक्षित निकासी और राहत शिविरों के संचालन की गति को परखा जाएगा।
मॉक एक्सरसाइज में सूचना से लेकर रेस्क्यू, स्वास्थ्य सेवा, राहत, संचार, विद्युत एवं सड़क बहाली और सामान्य स्थिति की वापसी तक पूरी प्रक्रिया को व्यावहारिक रूप से जांचा जाएगा। अभ्यास के दौरान सामने आने वाली कमियों को चिन्हित कर वास्तविक आपदा से पहले उनमें सुधार किया जाएगा।
लक्ष्य—आपदा के समय कोई देरी नहीं
एमसीबी जिले में यह अभ्यास महज औपचारिक मॉकड्रिल नहीं, बल्कि संभावित बाढ़ के दौरान ‘जीरो डिले रिस्पॉन्स’ की क्षमता विकसित करने की तैयारी है। लक्ष्य है कि सूचना मिलते ही नियंत्रण कक्ष सक्रिय हो, चेतावनी गांवों तक पहुंचे, प्रशिक्षित अमला और संसाधन तत्काल रवाना हों और संवेदनशील लोगों को प्राथमिकता से सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा सके।
टेबल टॉप एक्सरसाइज में अपर कलेक्टर अनिल सिदार, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल विश्वकर्मा, एसडीएम लिंगराज सिदार, एस. शेखर मिश्रा, विजयेन्द्र सारथी, प्रशिक्षु एसडीएम स्वप्निल वर्मा, नेहा खलखो, तहसीलदार यादवेंद्र कैवर्त एवं श्रुति धुर्वे सहित आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारी उपस्थित रहे।




पाठकों की टिप्पणियां 0