चिरमिरी। एसईसीएल चिरमिरी क्षेत्र के एक कामगार की जन्मतिथि और समयपूर्व सेवानिवृत्ति से जुड़े विवाद में केंद्रीय सरकार औद्योगिक न्यायाधिकरण (CGIT), जबलपुर ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायाधिकरण ने प्रबंधन की उस कार्रवाई को खारिज कर दिया, जिसके आधार पर कामगार बारेलाल को समय से पहले सेवानिवृत्त किया गया था। न्यायाधिकरण ने स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट में दर्ज जन्मतिथि को मान्य मानते हुए कामगार को सेवा की निरंतरता के साथ बकाया वेतन और अन्य आनुषंगिक लाभ देने का आदेश दिया है।
यह मामला राष्ट्रीय कॉलरी वर्कर्स फेडरेशन यूनियन के महामंत्री भागवत प्रसाद दुबे द्वारा कामगार के पक्ष में उठाया गया था। यूनियन ने जन्मतिथि से जुड़े विवाद में प्रबंधन की कार्रवाई को चुनौती देते हुए कामगार के अधिकारों की लड़ाई लड़ी।
मेडिकल रिकॉर्ड के आधार पर बदली गई थी जन्मतिथि
मामला कामगार बारेलाल, सहायक फोरमैन, कुरासिया कॉलरी की जन्मतिथि से जुड़ा है। उपलब्ध विवरण के अनुसार वर्ष 1983 में नियुक्ति के दौरान मेडिकल जांच के आधार पर प्रबंधन ने उनकी जन्मतिथि 26 सितंबर 1957 दर्ज की थी।
हालांकि, कामगार ने रोजगार कार्यालय और कार्यभार ग्रहण करते समय अपना स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट प्रस्तुत किया था, जिसमें जन्मतिथि 2 जनवरी 1960 दर्ज थी।
कामगार ने सेवा में आने के कुछ वर्षों बाद ही वर्ष 1992 में जन्मतिथि सुधारने के लिए आवेदन किया था। आरोप है कि आवेदन के बावजूद प्रबंधन ने इस पर समय रहते कार्रवाई नहीं की और बाद में दर्ज जन्मतिथि के आधार पर उन्हें समयपूर्व सेवानिवृत्ति की स्थिति में पहुंचा दिया गया।
स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट को माना सही दस्तावेज
CGIT जबलपुर के पीठासीन अधिकारी पी.के. श्रीवास्तव, एच.जे.एस. (सेवानिवृत्त) ने मामले की सुनवाई के बाद कामगार के पक्ष में Award पारित किया।
न्यायाधिकरण ने निर्देश दिया कि कामगार बारेलाल की जन्मतिथि 2 जनवरी 1960 मानी जाए, जो उनके स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट में दर्ज है।
फैसले में शिक्षित कर्मचारी की जन्मतिथि निर्धारित करने के संबंध में Implementation Instruction No. 76 का भी उल्लेख किया गया। न्यायाधिकरण के अनुसार संबंधित नियमों के तहत मान्यता प्राप्त संस्थान से जारी स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट में दर्ज जन्मतिथि को महत्व दिया जाना चाहिए।
समयपूर्व रिटायरमेंट का असर खत्म, मिलेगा पूरा बैक वेज
फैसले का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा कामगार को मिलने वाले वित्तीय और सेवा संबंधी लाभ हैं। न्यायाधिकरण ने कामगार को उसकी सही जन्मतिथि के आधार पर नियुक्ति से लेकर वास्तविक सेवानिवृत्ति तक सेवा में मानने का निर्देश दिया है।
इसके साथ ही उन्हें पूर्ण बैक वेज, सेवा की निरंतरता तथा सेवानिवृत्ति से संबंधित अन्य सभी आनुषंगिक एवं पोस्ट-रिटायरल लाभ देने के निर्देश दिए गए हैं।
अर्थात विवादित समयपूर्व सेवानिवृत्ति के कारण सेवा से बाहर रहने की अवधि का प्रभाव कामगार के सेवा लाभों पर नहीं पड़ेगा।
90 दिन में करना होगा भुगतान
CGIT ने प्रबंधन को फैसले की तारीख से 90 दिनों के भीतर सभी देय लाभों का भुगतान करने का निर्देश दिया है।
निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं किए जाने की स्थिति में 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का प्रावधान भी किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का भी उल्लेख
न्यायाधिकरण ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण निर्णयों का भी हवाला दिया। इनमें दीपाली गुंडू सुरवासे तथा हिंदुस्तान टिन वर्क्स से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए गलत तरीके से सेवा समाप्ति या सेवानिवृत्ति की स्थिति में सेवा निरंतरता और बैक वेज से संबंधित सिद्धांतों पर विचार किया गया।
इस कानूनी आधार के साथ न्यायाधिकरण ने कामगार के सेवा एवं वित्तीय अधिकारों को बहाल करने की दिशा में आदेश जारी किया।
भागवत प्रसाद दुबे की पहल से मामला पहुंचा न्यायाधिकरण तक
राष्ट्रीय कॉलरी वर्कर्स फेडरेशन यूनियन के महामंत्री भागवत प्रसाद दुबे ने इस मामले को कामगार के अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा मानते हुए उठाया। यूनियन की ओर से जन्मतिथि के दस्तावेज और कामगार के पूर्व आवेदन सहित मामले को मजबूती से रखा गया।
फैसले के बाद यूनियन ने इसे श्रमिक अधिकारों की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।
प्रबंधन की कार्रवाई पर उठे सवाल
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह रहा कि जब कामगार के पास नियुक्ति के समय ही स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट उपलब्ध था और वर्ष 1992 में जन्मतिथि सुधार के लिए आवेदन भी प्रस्तुत किया गया था, तो उस पर समय रहते निर्णय क्यों नहीं लिया गया।
CGIT के फैसले ने इसी विवाद के कानूनी पहलू पर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट में दर्ज जन्मतिथि को आधार माना है।
श्रमिक अधिकारों के लिए महत्वपूर्ण फैसला
CGIT का यह Award केवल बारेलाल के व्यक्तिगत सेवा विवाद तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि कोलियरी कर्मचारियों की जन्मतिथि, सेवा अवधि और सेवानिवृत्ति से जुड़े मामलों के संदर्भ में भी इसे महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
फैसले से स्पष्ट है कि सेवा रिकॉर्ड में जन्मतिथि को लेकर विवाद होने पर उपलब्ध वैधानिक दस्तावेजों और लागू नियमों की अनदेखी कर किसी कर्मचारी को समयपूर्व सेवानिवृत्त करना गंभीर कानूनी विवाद का कारण बन सकता है।
मुख्य बिंदु एक नजर में
कामगार: बारेलाल, सहायक फोरमैन, कुरासिया कॉलरी
विवाद: जन्मतिथि और समयपूर्व सेवानिवृत्ति
पुरानी दर्ज जन्मतिथि: 26 सितंबर 1957
स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट की जन्मतिथि: 2 जनवरी 1960
न्यायालय: केंद्रीय सरकार औद्योगिक न्यायाधिकरण, जबलपुर
निर्णय: कामगार के पक्ष में
आदेश: सेवा निरंतरता और पूर्ण बैक वेज
अन्य लाभ: सेवाकालीन एवं पोस्ट-रिटायरल लाभ
भुगतान की समय-सीमा: 90 दिन
देरी पर ब्याज: 6 प्रतिशत वार्षिक
मामला उठाने वाले: राष्ट्रीय कॉलरी वर्कर्स फेडरेशन यूनियन के महामंत्री भागवत प्रसाद दुबे




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