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06 Jul 2026
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विकसित छत्तीसगढ़ की नई राह, चिंतन शिविर 3.0 से तय होगी शासन के अगले चरण की रूपरेखा,

विकसित छत्तीसगढ़ की नई राह, चिंतन शिविर 3.0 से तय होगी शासन के अगले चरण की रूपरेखा,
विकसित छत्तीसगढ़ की नई राह, चिंतन शिविर 3.0 से तय होगी शासन के अगले चरण की रूपरेखा, । फोटो: आज का दिन न्यूज़

रायपुर, 4 जुलाई 2026

छत्तीसगढ़ में सुशासन की कार्यसंस्कृति को नई गति देने के उद्देश्य से राजधानी रायपुर स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) में दो दिवसीय 'मंत्रिमंडल चिंतन शिविर 3.0' का आयोजन किया गया है। सुशासन एवं अभिसरण विभाग तथा IIM रायपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह शिविर लगातार तीसरे वर्ष हो रहा है, जो अब राज्य की प्रशासनिक सुधार प्रक्रिया का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुका है।

नवाचार और सुशासन का महा-मंथन

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने शिविर की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि, *"चिंतन शिविर केवल विचार-विमर्श का मंच नहीं, बल्कि शासन की कार्यसंस्कृति में निरंतर सुधार और नवाचार का सशक्त माध्यम है।"* पिछले दो वर्षों के शिविरों की सफलता का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि ई-ऑफिस प्रणाली, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 और सेवा सेतु जैसे क्रांतिकारी नवाचार इसी मंथन का परिणाम हैं। उल्लेखनीय है कि 'सेवा सेतु' के जरिए आज 36 विभागों की 520 से अधिक सेवाएं सीधे नागरिकों तक डिजिटल रूप में पहुंच रही हैं।

शिविर के प्रमुख सत्र और विशेषज्ञ सुझाव

चिंतन शिविर 3.0 के पहले दिन नेतृत्व विकास, तकनीकी एकीकरण और कृषि समृद्धि जैसे भविष्योन्मुखी विषयों पर गहन चर्चा हुई:

मूल्य-आधारित नेतृत्व: प्रसिद्ध आध्यात्मिक चिंतक गौर गोपाल दास ने जनप्रतिनिधियों के लिए सेवा-भाव, भावनात्मक संतुलन और नैतिक दायित्वों के महत्व पर जोर दिया।

डिजिटल गवर्नेंस: नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), 5G, ड्रोन तकनीक, ब्लॉकचेन और डेटा-आधारित प्रशासन के माध्यम से शासन को नागरिक-केंद्रित बनाने का रोडमैप प्रस्तुत किया।

कृषि से समृद्धि: कृषि अर्थशास्त्री डॉ. रमेश चंद और विशेषज्ञ टी. विजय कुमार ने प्राकृतिक खेती, जलवायु अनुकूल कृषि और फसल विविधीकरण के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के व्यावहारिक सुझाव दिए।

विकसित छत्तीसगढ़ 2047 का लक्ष्य

मुख्यमंत्री श्री साय ने स्पष्ट किया कि इस शिविर का मूल उद्देश्य शासन-प्रशासन को अधिक प्रभावी, आधुनिक, पारदर्शी और जनहितैषी बनाना है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि 3.0 संस्करण से निकले निष्कर्ष 'विकसित भारत 2047' के संकल्प के अनुरूप 'विकसित छत्तीसगढ़' के निर्माण की ठोस आधारशिला रखेंगे। इन सुझावों को जल्द ही नीतिगत और प्रशासनिक पहलों के रूप में धरातल पर उतारा जाएगा।

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