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28 Sep 2026
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टीबी मुक्त भारत अभियान में एमसीबी का खड़गवां बना रोल मॉडल, घर-घर स्क्रीनिंग और आधुनिक जांच पर जोर

टीबी मुक्त भारत अभियान में एमसीबी का खड़गवां बना रोल मॉडल, घर-घर स्क्रीनिंग और आधुनिक जांच पर जोर
टीबी मुक्त भारत अभियान में एमसीबी का खड़गवां बना रोल मॉडल, घर-घर स्क्रीनिंग और आधुनिक जांच पर जोर। फोटो: आज का दिन न्यूज़

छत्तीसगढ़ के चयनित चार विकासखंडों में खड़गवां शामिल, जमीनी हकीकत परखने पहुंची केंद्रीय और राज्य स्तरीय संयुक्त टीम

चिरमिरी। ‘टीबी मुक्त भारत अभियान’ के तहत एमसीबी जिले का खड़गवां विकासखंड क्षय रोग उन्मूलन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत छत्तीसगढ़ से चयनित चार विशेष विकासखंडों में खड़गवां को शामिल किया गया है।

वर्ष 2025 में टीबी उन्मूलन के क्षेत्र में खड़गवां विकासखंड द्वारा हासिल की गई उपलब्धियों और टीबी मुक्त पंचायतों के दावों की जमीनी हकीकत परखने के लिए केंद्रीय एवं राज्य स्तरीय संयुक्त मूल्यांकन टीम खड़गवां पहुंची है। टीम अभियान के तहत किए जा रहे कार्यों की निर्धारित मानकों के आधार पर गहन समीक्षा कर रही है।

WHO और Jhpiego के विशेषज्ञ भी मूल्यांकन में शामिल

संयुक्त मूल्यांकन टीम में राज्य स्तरीय अधिकारियों के साथ वैश्विक संस्था Jhpiego और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के विशेषज्ञ भी शामिल हैं। टीम टीबी की पहचान, जांच, उपचार और संभावित मरीजों की खोज सहित अभियान के विभिन्न पहलुओं का मूल्यांकन कर रही है।

घर-घर पहुंचकर संभावित मरीजों की हो रही स्क्रीनिंग

खड़गवां विकासखंड के सभी गांवों में टीबी के संभावित मरीजों की पहचान के लिए सक्रिय खोज अभियान (Active Case Finding) चलाया जा रहा है। इसके तहत उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों और समूहों की पहचान कर स्वास्थ्य अमला घर-घर पहुंचकर लोगों की स्क्रीनिंग कर रहा है।

टीबी के संभावित लक्षण मिलने पर मरीजों की आगे की जांच कराई जा रही है। इसमें छाती का एक्स-रे और बलगम जांच शामिल है।

NAAT जांच से शुरुआती स्तर पर पहचान

टीबी की सटीक और जल्द पहचान के लिए NAAT (Nucleic Acid Amplification Test) मॉलिक्यूलर जांच का उपयोग किया जा रहा है। इस आधुनिक जांच के माध्यम से शुरुआती स्तर पर टीबी की पहचान में मदद मिल रही है।

किसी मरीज में टीबी की पुष्टि होने के बाद तत्काल उपचार शुरू किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीम मरीजों को निःशुल्क दवा उपलब्ध कराने के साथ नियमित फॉलोअप और निगरानी भी कर रही है।

क्या है टीबी मुक्त विकासखंड का मानक?

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार किसी क्षेत्र को ‘टीबी मुक्त’ घोषित करने के लिए प्रति एक हजार की आबादी पर नोटिफाइड यानी पंजीकृत टीबी मरीजों की संख्या एक या उससे कम होना आवश्यक है।

हालांकि, केवल मरीजों की संख्या कम होना ही टीबी मुक्ति का प्रमाण नहीं माना जाता। मूल्यांकन के दौरान यह भी देखा जा रहा है कि संभावित मरीजों की पहचान के लिए पर्याप्त संख्या में जांच की गई है या नहीं, ताकि जांच के अभाव में कोई मरीज छूट न जाए।

हर संभावित मरीज तक पहुंचना प्राथमिकता: डॉ. अविनाश खरे

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाश खरे ने कहा कि खड़गवां विकासखंड को टीबी मुक्त बनाना स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकताओं में शामिल है। विभाग का उद्देश्य केवल आंकड़ों में मरीजों की संख्या कम करना नहीं, बल्कि प्रत्येक संभावित मरीज तक पहुंचकर उसकी जांच और आवश्यक उपचार सुनिश्चित करना है।

उन्होंने बताया कि ग्रामीण स्तर पर मितानिनों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के माध्यम से घर-घर स्क्रीनिंग कराई जा रही है। आधुनिक NAAT मॉलिक्यूलर टेस्ट और डिजिटल एक्स-रे की मदद से टीबी की पहचान की प्रक्रिया को तेज किया गया है।

डॉ. खरे ने कहा कि खड़गवां में चल रहे सघन अभियान और उपचार व्यवस्था के आधार पर विभाग को उम्मीद है कि संयुक्त मूल्यांकन में विकासखंड टीबी मुक्ति के निर्धारित मानकों पर खरा उतरेगा।

‘टीबी हारेगा, देश जीतेगा’ के संकल्प के साथ स्वास्थ्य विभाग जमीनी स्तर पर टीबी उन्मूलन के प्रयासों को आगे बढ़ा रहा है।

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