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27 Oct 2026
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सुरक्षा कैंप बने जनसेवा के केंद्र, शहीद गुंडाधुर की धरती से बदल रही बस्तर की तस्वीर

सुरक्षा कैंप बने जनसेवा के केंद्र, शहीद गुंडाधुर की धरती से बदल रही बस्तर की तस्वीर
सुरक्षा कैंप बने जनसेवा के केंद्र, शहीद गुंडाधुर की धरती से बदल रही बस्तर की तस्वीर। फोटो: आज का दिन न्यूज़

पहले चरण में 70 कैंपों को ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा’ में बदलने की पहल, ग्रामीणों को मिल रहीं डिजिटल, बैंकिंग और स्वरोजगार से जुड़ी सुविधाएं

धनंजय राठौर, संयुक्त संचालक, जनसंपर्क संचालनालय, रायपुर

बस्तर। कभी नक्सल हिंसा और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण बुनियादी सुविधाओं से दूर रहने वाले बस्तर के गांवों में अब विकास और जनविश्वास को मजबूत करने की पहल की जा रही है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्थापित लगभग 200 सुरक्षा कैंपों को ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा’ के रूप में विकसित करने की योजना है। पहले चरण में 70 कैंपों को सेवा केंद्रों में बदलने का काम चल रहा है। इनके माध्यम से ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं, डिजिटल सेवाओं, बैंकिंग सुविधाओं और स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

गांवों तक पहुंच रहीं सरकारी सुविधाएं

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार बस्तर को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने पर जोर दे रही है। ‘नियद नेल्ला नार’ योजना के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। वहीं सेवा डेरा ग्रामीणों को आधार पंजीयन एवं अपडेट, केवाईसी, मोबाइल नंबर लिंक कराने तथा आय, जाति और जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जैसी ऑनलाइन सेवाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराने का माध्यम बन रहे हैं।Example Image

बैंक सखी के जरिए महिलाओं को बैंकिंग सेवाओं से जोड़ने के साथ नकदी निकासी, जमा और खाते से संबंधित सुविधाएं गांवों में उपलब्ध कराने की पहल की जा रही है। स्वास्थ्य परामर्श, आंगनबाड़ी और प्राथमिक शिक्षा जैसी सेवाओं तक पहुंच आसान बनाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

महिला समूहों को स्वरोजगार का संबल

सेवा डेरा स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक हुनर को आजीविका से जोड़ने में भी मददगार बन रहा है। नेतानार में गुंडाधुर महिला स्व-सहायता समूह की महिलाएं इमली का प्रसंस्करण कर पल्प तैयार कर रही हैं। समूह की सदस्य लंबी नाग के अनुसार, इस कार्य से महिलाएं सालाना एक लाख रुपये तक की आय अर्जित करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

पारंपरिक ढेंकी से चावल तैयार कर उसकी बिक्री और सिलाई प्रशिक्षण के जरिए भी महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर मिल रहे हैं। वहीं, ग्रामीण महिला सुखदेवी के लिए अपनी छोटी बच्ची का आधार कार्ड बनवाने जैसी सुविधा गांव के नजदीक उपलब्ध होना बड़ी राहत है।

आधुनिक पैकेजिंग से बाजार तक पहुंचेंगे स्थानीय उत्पाद

बस्तर के उत्पादों को बेहतर बाजार दिलाने के लिए अहमदाबाद स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन की टीम ने हाल ही में नेतानार का दौरा किया। टीम ने इमली प्रसंस्करण, सिलाई और पारंपरिक ढेंकी से चावल तैयार करने के कार्यों का जायजा लेकर उत्पादों की पैकेजिंग और ब्रांडिंग पर चर्चा की। इससे स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने और महिलाओं की आय बढ़ाने की संभावनाएं मजबूत होंगी।

गुंडाधुर की विरासत से विकास को नई दिशा

नेतानार शहीद वीर गुंडाधुर की जन्मस्थली है। वर्ष 1910 के भूमकाल विद्रोह में उन्होंने आदिवासी अस्मिता और जल-जंगल-जमीन के अधिकारों के लिए अंग्रेजी सत्ता के खिलाफ संघर्ष किया था। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 18 मई 2026 को नेतानार स्थित सीआरपीएफ कैंप परिसर में देश के पहले ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा’ जन सुविधा केंद्र का उद्घाटन किया था।Example Image

सुरक्षा कैंपों को सेवा केंद्रों में बदलने की यह पहल बस्तर के दूरस्थ गांवों तक शासन की सुविधाएं पहुंचाने, महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और ग्रामीणों के लिए आजीविका के नए अवसर विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसका उद्देश्य सुरक्षा के साथ विकास, सुशासन और जनविश्वास को मजबूत करना है।

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