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अवैध अतिक्रमण पर निगम ने चलाया बुल्डोजर : तेज बारिश के बाद घरों में घुसा था पानी,नाले पर पर अवैध नाहर पब्लिक स्कूल का मेन गेट तोड़ा, कबाड़ की दुकाने भी हटाई

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भरत शर्मा की रिपोर्ट

आज का दिन न्यूज रतलाम, बारिश के नजदीक आते ही अब जिम्मेदारों की नींद खुल चुकी है। इस बीच शहर के संत रविदास चौक करमदी रोड पर घरो में पानी जा घुसा था। जिसके बाद निगम की टीम मौके पर पहुंची। यहां लोगों ने नाले पर अवैध रूप से पक्की दुकाने बनाई हुई थी। वहीं एक निजी स्कूल नाहर पब्लिक स्कूल का मेन गेट अवैध रूप से नाले पर बना मिला। 

शुक्रवार की सुबह 5 बजे जब लगातार पौन घंटे तेज बारिश हुई थी तब नाले के चौक होने से हरमाला रोड क्षेत्र में घरों और दुकानों में पानी घुस गया था। जिसमे नाले के चौक होने से इस समस्या का सामना क्षेत्रवासियों को करना पड़ा इसके बाद से यह नजर में आया। नालों की सफाई की बारी जब शनिवार को हरमाला रोड़ स्थित नाले की आई तो यहां बड़ा अतिक्रमण देखने को मिला। यहां पर घरों और दुकानों से बीचों बीच से नाला गुजर रहा है। यह कोई छोटा मोटा नाला भी नही बल्कि नाला भी करीब 10 फिट गहराई वाला नाला मकानों में दबा हुआ है। शनिवार की सुबह जब सफाई के लिए स्वस्थ अधिकारी एपी सिंह के साथ विभाग की टीम पहुंची तो यहां यह स्थिति दिखी। इसी नाले का जाम खोलने के लिए एक एक मकान में से फर्श हटाया गया तो यहां नाले का पानी ऊपर तक लबालब भरा हुआ जो ये नाले में फंसा सर्वाधिक कचरा दर्शा रहा था। स्वस्थ के कर्मचारियों ने मेहनत कर ढेर सारा कचरा मलबा निकलकर जमा किया लेकिन नाले का पानी जस की तस ही भरा रहा। इसके बाद इसी नाले पर बना नाहर पब्लिक स्कूल के मुख्य द्वार की तरफ से खुदाई कर चेक किया गया लेकिन संतुष्टि नहीं मिल रही थी। इसके बाद मजबूरन पंजा चलाना पड़ा और फिर शाम होते होते सुलभ कॉम्प्लेक्स के पास बनी कबाड़ी की दुकान अवैध निर्माण मानते हुए नाले के ऊपर बने निर्माण को जेसीबी ने ध्वस्त किया। इसके बाद करीब 8 बजे के आसपास नाले पर बने अवैध नाहर पब्लिक स्कूल के मुख्य द्वार को तोड़ा गया। यहां स्कूल संचालक मनोहर नाहर की कट्टर बीजेपी वाली राजनीति फेल हो गए। अब इसी लाइन करमदी रोड़ चौराहे तक कुछ मकान भी है। इनपर रहवासियों से चर्चा कर इन्ही के द्वारा नाले पर अवैध निर्माण तुड़वाए जाएंगे। 

नाला रिकॉर्ड में साठ गांठ से हो गया गायब 

दरअसल यह मकान पट्टे के में मिली जमीन पर बने हुए है। जिनके मकान नल पर अवैध रूप से बने हैं उनका कहना है कि हमारे पास बाकायदा निगम की परमिशन और विकास शुल्क भी जमा है। रहवासियों ने कहा कि हमारे पास 1980 का एक पेपर है जिसमे नपती के मुताबिक नाला हमारी ही जमीन पर आ रहा है और नाले का कोई रिकॉर्ड शासन या नजूल के पास है ही नही। इसका मतलब कि साथ गांठ से इस नाले का अस्तित्व में होने के बावजूद इसे रिकॉर्ड गायब कर दिया गया और अब इसका हर्जाना क्षेत्रवासियों को भुगतना पड़ रहा है। अब ऐसी स्थिति में अतिक्रमण तो तोड़ा जा भी रहा है और जिनके मकान है उन्हें खुद ही तोड़ना पड़ेगा और नाले को अतिक्रमण से मुक्त करना होगा। इसके अलावा लोगो का यह भी कहना था कि लिखा पढ़ी में यह भी तय हुआ है कि नाले की समय समय पर निर्माणाधीन भवनों से ही सफाई करवानी होगी। 

अतिक्रमण के विरोध में उतरे क्षेत्रवासी

जब नाले की सफाई के लिए कबाड़ी की दुकान ध्वस्त कर दी गई और नाहर पब्लिक स्कूल के मुख्य द्वार के भी नाले पर अतिक्रमण होने से और इसे नही तोड़ने को लेकर लोग सड़क पर विरोध में उतर आए थे। लेकिन स्कूल वालों की राजनीति नहीं चली और निगम की जेसीबी का पंजा स्कूल के मुख्य द्वार पर चल गया। इसके बाद चक्काजाम बंद हुआ।

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