जशपुर की नारी शक्ति को ‘साय’ का साथ: 5.22 करोड़ की लागत से बनेंगे 18 महतारी सदन, बदल रही है ग्रामीण महिलाओं की तस्वीर

Rishi thawait aajkadin

जशपुर की नारी शक्ति को ‘साय’ का साथ: 5.22 करोड़ की लागत से बनेंगे 18 महतारी सदन, बदल रही है ग्रामीण महिलाओं की तस्वीर

जशपुरनगर।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले की ग्रामीण महिलाएँ आज आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रही हैं। कभी सीमित संसाधनों में जीवन बिताने वाली ये महिलाएँ अब आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत होकर समाज में निर्णायक भूमिका निभा रही हैं। जिले में महिला सशक्तिकरण को नई ऊंचाई देने के लिए 5 करोड़ 22 लाख रुपये की लागत से 18 महतारी सदनों का निर्माण किया जा रहा है, जो ग्रामीण महिलाओं के लिए कौशल विकास और संगठन का प्रमुख केंद्र बनेंगे।

महतारी सदन: प्रशिक्षण और स्वावलंबन का नया ठिकाना

​ग्रामीण महिलाओं को संगठित करने के उद्देश्य से जिले की 18 पंचायतों में महतारी सदन भवनों की स्वीकृति दी गई है। प्रत्येक भवन के लिए 29 लाख रुपये की राशि आवंटित की गई है। इन सदनों में महिला स्व-सहायता समूहों को निम्नलिखित गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया जाएगा:

  • ​सिलाई-कढ़ाई और बुनाई
  • ​मशरूम उत्पादन और घरेलू उद्योग
  • ​हस्तशिल्प, पैकेजिंग और विपणन

​इन भवनों का निर्माण बगीचा, पत्थलगांव, मनोरा, जशपुर, कुनकुरी, कांसाबेल और फरसाबहार विकासखंडों की विभिन्न ग्राम पंचायतों में किया जा रहा है।

महतारी वंदन योजना: 448 करोड़ से मिला आर्थिक संबल

​जिले की दो लाख से अधिक महिलाओं के खातों में अब तक 448 करोड़ रुपये की राशि सीधे हस्तांतरित की जा चुकी है। इस आर्थिक सहयोग ने न केवल महिलाओं की आय बढ़ाई है, बल्कि उनके आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता में भी भारी वृद्धि की है।

ई-रिक्शा से बढ़ा आत्मसम्मान

​आर्थिक आजादी की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री ने 12 स्व-सहायता समूहों को ई-रिक्शा प्रदान किए हैं। आज ये महिलाएँ ई-रिक्शा चलाकर न केवल अपनी आजीविका कमा रही हैं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन को सुगम बना रही हैं।

"पहले प्रशिक्षण के लिए दूर जाना पड़ता था, अब गाँव में ही सुविधा मिलेगी। महतारी सदन हमारे लिए सशक्तिकरण की नींव है।"

सावित्री भगत (कुर्रोग) एवं रजनी पैंकरा (सोनक्यारी)

निष्कर्ष

​महतारी सदन, महतारी वंदन योजना और ई-रिक्शा वितरण जैसे प्रयासों से जशपुर की महिलाओं की पहचान बदल गई है। साय सरकार की ये पहलें ग्रामीण समाज में आर्थिक और सामाजिक बदलाव की एक नई कहानी लिख रही हैं।