जशपुर: नकबार छात्रावास में बच्चों के भविष्य से खिलवाड़, अधीक्षक ने रसोइया-स्वीपर की मांग दबाई, बीईओ ने दी जानकारी

जशपुर: नकबार छात्रावास में बच्चों के भविष्य से खिलवाड़, अधीक्षक ने रसोइया-स्वीपर की मांग दबाई, बीईओ ने दी जानकारी

कांसाबेल: छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के ग्राम पंचायत नकबार स्थित 50 सीटर बालक छात्रावास में अव्यवस्थाओं का मुद्दा गर्माता जा रहा है। ग्रामीणों की शिकायत के बाद छात्रावास अधीक्षक द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण ने नए विवाद को जन्म दे दिया है, जिसमें मूलभूत सुविधाओं की मांग को ही गायब कर दिया गया है।

बीईओ का बयान: स्पष्टीकरण में रसोइया और स्वीपर का जिक्र नहीं

विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि अधीक्षक ने अपने जवाब में आगामी 23 फरवरी 2026 को बैठक आयोजित कर शाला प्रबंधन समिति के गठन की बात तो कही है, लेकिन ग्रामीणों की सबसे प्रमुख मांग—रसोइया और स्वीपर की नियुक्ति—का कोई उल्लेख नहीं किया गया है। जबकि ग्रामीणों ने अपने मूल आवेदन में स्पष्ट रूप से 'स्वीपर' और 'रसोइया' की मांग की थी क्योंकि वर्तमान में रसोइया और चौकीदार ही सफाई और खाना बनाने का काम कर रहे हैं।

पार्ट-टाइम शिक्षकों पर गंभीर आरोप: "बच्चों की पढ़ाई छोड़ सीएसी के काम में व्यस्त"

ग्रामीणों ने केवल कर्मचारियों की कमी ही नहीं, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं:

पढ़ाई का अभाव: ग्रामीणों का आरोप है कि छात्रावास में पार्ट-टाइम टीचर द्वारा बच्चों की पढ़ाई पर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया जा रहा है, जिससे उनका भविष्य खतरे में है।

निजी काम को प्राथमिकता: ग्रामीणों के अनुसार, पार्ट-टाइम टीचर ने अपना अलग केंद्र (CAC) खोल रखा है और वे अधिकांश समय वहीं के कार्यों में व्यस्त रहते हैं।

नियम विरुद्ध नियुक्ति: एक ही परिवार के पति-पत्नी को मनमाने ढंग से शिक्षक के रूप में रखने को लेकर ग्रामीण पहले ही आक्रोशित हैं।

ग्रामीणों की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि अधीक्षक द्वारा तथ्यों को छिपाकर प्रशासन को गुमराह किया जा रहा है। उनकी मांग है कि केवल समिति का गठन ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि नियमित रसोइया, स्वीपर की भर्ती की जाए और बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए गैर-जिम्मेदार शिक्षकों पर कार्रवाई की जाए।

अब ग्रामीणों की नजरें शिक्षा विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं कि क्या विभाग इस 'अधूरे' स्पष्टीकरण को स्वीकार करता है या बच्चों के भविष्य के लिए कड़े कदम उठाता है।