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15 Aug 2026
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डिजिटल न्याय व्यवस्था से मिलेगा त्वरित इंसाफ, नए आपराधिक कानूनों ने न्याय प्रणाली में लाया ऐतिहासिक बदलाव : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय,

डिजिटल न्याय व्यवस्था से मिलेगा त्वरित इंसाफ, नए आपराधिक कानूनों ने न्याय प्रणाली में लाया ऐतिहासिक बदलाव : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय,
डिजिटल न्याय व्यवस्था से मिलेगा त्वरित इंसाफ, नए आपराधिक कानूनों ने न्याय प्रणाली में लाया ऐतिहासिक बदलाव : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय,। फोटो: आज का दिन न्यूज़

स्ट्रेंथिंग डिजिटल जस्टिस' कार्यशाला में बोले मुख्यमंत्री: तकनीक, फॉरेंसिक और डिजिटल साक्ष्य से न्याय होगा अधिक पारदर्शी, तेज और जवाबदेह; मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने कहा- क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ बनेगा देश का अग्रणी राज्य,

रायपुर | 2 अगस्त 2026।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि वर्तमान समय की चुनौतियों और आवश्यकताओं के अनुरूप बनाए गए नए आपराधिक कानून भारत की न्याय व्यवस्था में ऐतिहासिक परिवर्तन लेकर आए हैं। इन कानूनों का उद्देश्य केवल अपराधियों को दंडित करना नहीं, बल्कि आम नागरिक को त्वरित, पारदर्शी, सुलभ और समयबद्ध न्याय उपलब्ध कराना है। आधुनिक तकनीक, डिजिटल प्रणालियों और वैज्ञानिक साक्ष्यों के समावेश से न्याय प्रणाली पहले से अधिक प्रभावी, विश्वसनीय और जवाबदेह बनी है।Example Image

मुख्यमंत्री राजधानी रायपुर में आयोजित 'स्ट्रेंथिंग डिजिटल जस्टिस' राज्य स्तरीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लगभग 150 वर्ष पुराने औपनिवेशिक कानूनों की जगह भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) लागू किए गए हैं, जिनकी मूल भावना नागरिक-केंद्रित न्याय व्यवस्था स्थापित करना है।

डिजिटल साक्ष्य और फॉरेंसिक जांच से मजबूत होगी न्याय प्रक्रिया

मुख्यमंत्री ने कहा कि पुराने कानून उस दौर में बने थे जब डिजिटल तकनीक, सीसीटीवी, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और आधुनिक फॉरेंसिक विज्ञान का अस्तित्व नहीं था। नए कानूनों में डिजिटल साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल चैट, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और वैज्ञानिक फॉरेंसिक जांच को कानूनी मान्यता देकर अपराध अनुसंधान और अभियोजन को नई मजबूती मिली है।

उन्होंने बताया कि राज्य में नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी की शाखा प्रारंभ होने से अपराध अनुसंधान और न्यायिक प्रक्रिया को नई दिशा मिलेगी। वहीं ई-साक्ष्य प्रणाली इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के सुरक्षित संरक्षण और उनकी प्रामाणिकता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

ई-समन, न्याय श्रुति और सीसीटीएनएस से बढ़ी न्याय व्यवस्था की गति

मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल तकनीक के उपयोग से न्याय प्रक्रिया पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज और प्रभावी हुई है। ई-समन के माध्यम से समन की तामील तत्काल हो रही है और उसकी डिजिटल ट्रैकिंग भी संभव है। वहीं न्याय श्रुति प्रणाली न्यायालयीन कार्यवाही का सुरक्षित डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने के साथ-साथ ऑनलाइन और हाइब्रिड सुनवाई को भी सशक्त बना रही है।

उन्होंने बताया कि क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (CCTNS) के जरिए देशभर के पुलिस थाने डिजिटल रूप से जुड़े हैं। छत्तीसगढ़ के सभी थाने ऑनलाइन मोड में कार्यरत हैं और अब तक 1,97,547 ऑनलाइन एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। नागरिकों को डिजिटल हस्ताक्षरित एफआईआर की प्रति भी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही है।

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आईसीजेएस से संस्थाओं के बीच बढ़ा समन्वय

मुख्यमंत्री ने कहा कि इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) न्यायपालिका, पुलिस, अभियोजन, जेल और अन्य संबंधित संस्थाओं के बीच सुरक्षित डिजिटल समन्वय स्थापित कर रहा है। इससे सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान संभव हुआ है और न्यायिक प्रक्रिया में होने वाली अनावश्यक देरी में उल्लेखनीय कमी आई है।

उन्होंने कहा कि साइबर अपराध जैसी नई चुनौतियों से निपटने के लिए राज्य सरकार ने 9 नए साइबर थाने शुरू किए हैं तथा व्यापक जनजागरूकता अभियान भी संचालित किया जा रहा है। साथ ही नए कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सतत प्रशिक्षण, तकनीकी क्षमता विकास और नियमित मॉनिटरिंग पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

मुख्य न्यायाधीश बोले- क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ बनेगा अग्रणी राज्य

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने कहा कि तीनों नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन से राज्य की आपराधिक न्याय प्रणाली अधिक पारदर्शी, वैज्ञानिक, तकनीक आधारित और त्वरित बनेगी। उन्होंने कहा कि ई-साक्ष्य, ई-चालान, न्याय श्रुति और डिजिटल फॉरेंसिक जैसी व्यवस्थाएं नए कानूनों की मूल भावना को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

उन्होंने बताया कि जून माह में जिला न्यायालयों में 9,910 मामलों तथा उच्च न्यायालय में 58 मामलों की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की गई। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी संबंधित संस्थाओं के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ नए आपराधिक कानूनों और डिजिटल न्याय प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन में देश का अग्रणी राज्य बनेगा।

गृह मंत्री विजय शर्मा ने बताया मील का पत्थर

उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि यह कार्यशाला न्याय व्यवस्था के आधुनिकीकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) के क्रियान्वयन में तेजी आई है। उन्होंने 'वन डेटा, वन एंट्री', ई-फॉरेंसिक, ई-साक्ष्य, न्याय श्रुति, सीसीटीएनएस, नेफिस, सीआरपीआई एप्लिकेशन और डीएनए सैंपलिंग जैसी आधुनिक प्रणालियों के व्यापक उपयोग पर बल दिया।

कार्यक्रम में विधि एवं विधायी कार्य मंत्री गजेंद्र यादव, उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एन.के. चन्द्रवंशी, प्रमुख सचिव गृह निहारिका बारिक सिंह, प्रमुख सचिव विधि सुषमा सावंत, पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम, न्यायिक अधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, अभियोजन अधिकारी, एफएसएल विशेषज्ञ, चिकित्सक एवं विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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