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15 Aug 2026
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जहां गूंजा था दुनिया का पहला रंगमंच, वहां पहुंचे मुख्यमंत्री साय; रामगढ़ की ऐतिहासिक धरोहरों को मिलेगा नया संरक्षण,

जहां गूंजा था दुनिया का पहला रंगमंच, वहां पहुंचे मुख्यमंत्री साय; रामगढ़ की ऐतिहासिक धरोहरों को मिलेगा नया संरक्षण,
जहां गूंजा था दुनिया का पहला रंगमंच, वहां पहुंचे मुख्यमंत्री साय; रामगढ़ की ऐतिहासिक धरोहरों को मिलेगा नया संरक्षण, । फोटो: आज का दिन न्यूज़

 रामगढ़ महोत्सव-2026 के समापन समारोह में मुख्यमंत्री ने सीताबेंगरा, जोगीमारा गुफा और हाथीपोल का किया अवलोकन, कहा— सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण ही भविष्य की सबसे बड़ी जिम्मेदारी

रायपुर, 30 जून। सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखंड स्थित ऐतिहासिक रामगढ़ एक बार फिर अपनी हजारों वर्ष पुरानी सांस्कृतिक विरासत के कारण चर्चा में है। रामवनगमन पर्यटन परिपथ से जुड़े इस ऐतिहासिक स्थल पर आयोजित दो दिवसीय रामगढ़ महोत्सव-2026 के समापन समारोह में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय शामिल हुए। उन्होंने विश्व की प्राचीनतम नाट्यशाला मानी जाने वाली सीताबेंगरा गुफा, जोगीमारा गुफा के प्राचीन शिलालेख एवं भित्तिचित्रों तथा प्राकृतिक धरोहर हाथीपोल का अवलोकन कर इनके ऐतिहासिक महत्व की जानकारी ली।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि रामगढ़ केवल सरगुजा ही नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक चेतना, साहित्य, कला और गौरवशाली इतिहास का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि विश्व की प्राचीनतम नाट्यशाला के रूप में प्रसिद्ध यह स्थल संस्कृति, इतिहास, साहित्य और पर्यटन का अद्भुत संगम है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ऐसी ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण, संवर्धन और पर्यटन विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटक छत्तीसगढ़ की समृद्ध विरासत से परिचित हो सकें और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार एवं आजीविका के नए अवसर भी सृजित हों।Example Image

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ केवल प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य नहीं है, बल्कि इसकी सांस्कृतिक और पुरातात्विक धरोहरें भी विश्व स्तर पर विशिष्ट पहचान रखती हैं। उन्होंने कहा कि रामगढ़ जैसी ऐतिहासिक धरोहरें हमारी सांस्कृतिक अस्मिता की अमूल्य निधि हैं, जिनका संरक्षण वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।

रामगढ़ पर्वत की पश्चिमी ढलान पर स्थित सीताबेंगरा और जोगीमारा गुफाओं को भारतीय इतिहास, स्थापत्य कला, शिलालेख और चित्रकला की अनमोल धरोहर माना जाता है। मान्यता है कि महाकवि कालिदास ने अपनी कालजयी रचना 'मेघदूतम्' की रचना इसी क्षेत्र में की थी, जिसकी शुरुआत प्रसिद्ध पंक्ति 'आषाढस्य प्रथमदिवसे' से होती है। इसी साहित्यिक और ऐतिहासिक परंपरा को जीवित रखने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष आषाढ़ मास के प्रथम दिवस पर रामगढ़ महोत्सव का आयोजन किया जाता है।

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करीब 44 फीट लंबी सीताबेंगरा गुफा का प्राकृतिक रंगमंच, जोगीमारा गुफा में दूसरी-तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व के भित्तिचित्र और यहां प्राप्त प्राचीन शिलालेख इस क्षेत्र को विश्व स्तर पर विशिष्ट पहचान प्रदान करते हैं। इतिहासकारों के अनुसार यह स्थल भारतीय रंगमंच और प्राचीन सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है।

रामगढ़ की एक और प्रमुख पहचान हाथीपोल नामक प्राकृतिक सुरंग है। लगभग 180 फीट लंबी तथा 15 से 20 फीट ऊंची यह प्राकृतिक संरचना वर्षों तक जल प्रवाह से निर्मित हुई मानी जाती है। सुरंग के दूसरे छोर पर स्थित सीताबेंगरा और जोगीमारा गुफाएं इस पूरे क्षेत्र को और अधिक आकर्षक, रहस्यमयी तथा ऐतिहासिक महत्व प्रदान करती हैं। रामायणकालीन परंपराओं से जुड़े होने की मान्यता के कारण यह स्थल धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन की दृष्टि से भी विशेष महत्व रखता है।

इस अवसर पर कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

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