बालोद : केन्द्र व राज्य सरकार आदिवासी समाज के सर्वांगीण विकास के लिए कृतसंकल्पित: मंत्री टंकराम वर्मा
डौण्डी विकासखण्ड के ग्राम नर्राटोला में अखिल भारतीय हल्बा-हल्बी समाज द्वारा आयोजित
शहीद गैंदसिंह नायक के शहादत दिवस समारोह में हुए शामिल
राष्ट्रीय महासभा द्वारा आयोजित कार्यक्रम में उमड़ा विशाल जनसैलाब
प्रदेश के राजस्व, आपदा प्रबंधन एवं उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंकराम वर्मा ने कहा कि केन्द्र व राज्य सरकार आदिवासियों के संरक्षण एवं संवर्धन के साथ-साथ उनके सर्वांगीण विकास के लिए कृतसंकल्पित है। उन्होंने आदिवासी समाज को सहज, सरल, निश्चल, मेहनकश एवं स्वाभिमानी समाज बताते हुए कहा कि जनजातीय समाज का विरासत एवं संस्कृति अत्यंत वैभवशाली है। कैबिनेट मंत्री श्री वर्मा आज जिले के डौण्डी विकासखण्ड के ग्राम नर्राटोला में अखिल भारतीय हल्बा-हल्बी समाज द्वारा आयोजित शहीद गैंदसिंह नायक शहादत दिवस के अवसर पर अपना उद्गार व्यक्त कर रहे थे। मंत्री श्री वर्मा कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता अखिल भारतीय हल्बा, हल्बी समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक श्री मंतूराम पवार ने किया। कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में डौण्डीलोहारा विधानसभा क्षेत्र की विधायक श्रीमती अनिला भेड़िया, छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष श्री रूप नारायण सिन्हा, पूर्व विधायक श्री जनक ठाकुर एवं श्री डोमेन्द्र भेड़िया, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष श्री देवलाल ठाकुर, हल्बा, हल्बी समाज के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जीआर राणा, अधिकारी-कर्मचारी प्रकोष्ठ के अध्यक्ष श्री आरएस नायक, सेवा निवृत्त आईएएस श्री बीएल ठाकुर एवं श्री जीआर चुरेन्द्र, सेवा निवृत्त आईपीएस श्री जेआर ठाकुर, डॉ. जितेन्द्र मीणा सहित अन्य अतिथि एवं समाज प्रमुखगण उपस्थित थे।
इस अवसर पर मंत्री श्री वर्मा ने आदिवासी समाज के गौरवशाली विरासत के अलावा शहीद गैंदसिंह नायक के अदम्य वीरता के साहस एवं पराक्रम के साथ-साथ उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व के संबंध में भी विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अमर शहीद गैंदसिंह नायक ने अंग्रेजी हुकुमत के दमन एवं क्रूरता का प्रतिकार करने हेतु आदिवासी समाज को संगठित कर सन् 1824 एवं 1825 में अंग्रेजों के विरूद्ध क्रांति का शंखनाद किया था। इस तरह से शहीद गैंदसिंह नायक के नेतृत्व में आदिवासी समाज के द्वारा 1857 के क्रांति के पूर्व मध्य भारत के सघन आरण्य छत्तीसगढ़ में सर्वप्रथम क्रांति के लौ को प्रज्ज्वलित की थी। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी हुकुमत के द्वारा 20 जनवरी 1825 को शहीद गैंदसिंह नायक को सरेआम फासी दे दी गई थी। इस तरह से देश के आजादी के क्रांति का सर्वप्रथम बिगुल फुंकने का कार्य आदिवासी समाज के महापुरूषों एवं जननायकों द्वारा प्रारंभ किया गया था। श्री वर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाले केन्द्र सरकार एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाले छत्तीसगढ़ सरकार के द्वारा जनजातीय समाज के हितो की रक्षा के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार के द्वारा बस्तर के सुदर अंचलों में शिक्षा की बेहतर व्यवस्था के अलावा सड़क, पुल-पुलिया, बिजली, शुद्ध पेयजल आदि बुनियादी की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।
वर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि ’हम न केवल आदिवासियों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करेंगे वरन उनके गौरवशाली विरासत एवं संस्कृति को भी वैश्विक पहचान दिलाने का कार्य करेंगे।’ उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा सन् 2047 तक देश को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया गया है। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा भी उसी तर्ज पर 2047 तक छत्तीसगढ़ को विकसित राज्य बनाने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। इस अवसर पर मंत्री श्री वर्मा ने सुमधुर छत्तीसगढ़ी गीत की प्रस्तुति से सभी को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम में अध्यक्षीय उद्बोधन प्रस्तुत करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मंतूराम पवार ने हल्बा, हल्बी समाज के महत्ता एवं विरासत के अलावा कार्यक्रम के आयोजन के उद्देश्यों के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डौण्डीलोहारा विधानसभा क्षेत्र के विधायक श्रीमती अनिला भेड़िया ने शहीद गैंदसिंह नायक के वीरता एवं साहस का उल्लेख करते हुए 20 जनवरी के दिन को संपूर्ण आदिवासी समाज के लिए काला दिवस बताया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्य योग आयोग के अध्यक्ष श्री रूपनारायण सिन्हा ने निष्कपट, निश्छल, स्वाभिमानी एवं मेहनतकश समाज बताते हुए उनके स्वभावगत विशेषताओं की भूरी-भूरी सराहना की। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष श्री देवलाल ठाकुर ने केन्द्र व राज्य सरकार के द्वारा जनजातीय समाज के हितों की रक्षा के लिए संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की विस्तारपूर्वक जानकारी दी। इस अवसर पर दिल्ली विश्वविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डॉ. जितेन्द्र मीणा एवं सामाजिक कार्यकर्ता श्री विनोद कोसले ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केन्द्र व राज्य सरकार से संवैधानिक प्रावधानों के आधार पर आदिवासी समाज का संरक्षण एवं संवर्धन सुनिश्चित करने की मांग की। इस अवसर पर कार्यक्रम का स्वागत भाषण महासचिव श्री श्याम सिंह तारम ने प्रस्तुत किया। इस अवसर पर कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों एवं सामाजिक जनों को आंगादेव एवं आदिवासी एवं हल्बा समाज के अन्य आराध्य देवी-देवताओं का जीवंत साक्षात्कार भी कराया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि श्री टंकराम वर्मा ने डॉ. कृष्णकांत राणा द्वारा रचित पुस्तक कैंकर चो गौरव (कांकेर के गौरव) पुस्तक का विमोचन भी किया।
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