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04 Nov 2026
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दोना-पत्तल निर्माण का हुनर सीखकर आत्मनिर्भर बनेंगी महिलाएं और किशोरियां, डोमनहिल में आयोजित हुई स्वावलंबन कार्यशाला

दोना-पत्तल निर्माण का हुनर सीखकर आत्मनिर्भर बनेंगी महिलाएं और किशोरियां, डोमनहिल में आयोजित हुई स्वावलंबन कार्यशाला
दोना-पत्तल निर्माण का हुनर सीखकर आत्मनिर्भर बनेंगी महिलाएं और किशोरियां, डोमनहिल में आयोजित हुई स्वावलंबन कार्यशाला। फोटो: आज का दिन न्यूज़

बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना के तहत दिया गया हस्तशिल्प प्रशिक्षण, महिलाओं को स्वरोजगार और लघु उद्योग शुरू करने के लिए किया गया प्रेरित

चिरमिरी।

महिलाओं एवं किशोरी बालिकाओं को कौशल विकास के माध्यम से आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मंगलवार को डोमनहिल, चिरमिरी में हस्तशिल्प एवं स्वावलंबन कार्यशाला सह जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना के अंतर्गत आयोजित इस कार्यशाला में महिलाओं एवं किशोरी बालिकाओं को दोना-पत्तल निर्माण का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।

जिला कलेक्टर सुश्री संतन देवी जांगड़े के निर्देशानुसार एवं जिला कार्यक्रम अधिकारी आदित्य शर्मा के मार्गदर्शन में जिला महिला सशक्तिकरण केंद्र (हब), महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रशिक्षिका श्रीमती शिवानी ने प्रतिभागियों को दोना-पत्तल बनाने की प्रक्रिया समझाई और इस हुनर को आजीविका का साधन बनाकर स्वरोजगार शुरू करने की संभावनाओं से अवगत कराया।

कार्यशाला में महिलाओं को हस्तशिल्प के जरिए छोटे व्यवसाय एवं लघु उद्योग स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। साथ ही बताया गया कि स्थानीय संसाधनों और अपने कौशल का उपयोग कर महिलाएं घर से ही स्वरोजगार की शुरुआत कर सकती हैं। कार्यक्रम में महिला सशक्तिकरण, आर्थिक आत्मनिर्भरता और उद्यमिता के महत्व पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

इस दौरान महिलाओं की परिवार एवं समाज के निर्णयों में सक्रिय भागीदारी, उनके अधिकारों, आत्मसम्मान और आत्मविश्वास के महत्व पर जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि कौशल विकास एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के साथ उन्हें आत्मनिर्भर जीवन की दिशा में आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

बालिकाओं की शिक्षा, सुरक्षा और उज्ज्वल भविष्य पर दिया जोर

कार्यक्रम में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना के उद्देश्यों की जानकारी देते हुए बालिकाओं की शिक्षा, सुरक्षा और बेहतर भविष्य के निर्माण में परिवार, विद्यालय एवं समाज की सामूहिक जिम्मेदारी पर प्रकाश डाला गया। बालिकाओं को शिक्षा के समान अवसर उपलब्ध कराने, उनके अधिकारों का सम्मान करने तथा उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार करने की अपील की गई।

विभागीय योजनाओं और हेल्पलाइन नंबरों की दी गई जानकारी

कार्यशाला के दौरान महिला एवं बाल विकास विभाग की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के बारे में भी जानकारी दी गई। सखी वन स्टॉप सेंटर एवं प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की जानकारी देते हुए पात्र महिलाओं, विशेषकर गर्भवती महिलाओं को योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया गया।

इसके अलावा महिलाओं एवं बच्चों की सहायता, सुरक्षा और शिकायतों के निराकरण के लिए टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 181, 1098, 1930 एवं 1515 की जानकारी देकर इनके उपयोग के प्रति जागरूक किया गया।

कार्यक्रम में प्रभारी एकीकृत बाल विकास परियोजना अधिकारी चिरमिरी सुश्री आरती, मिशन शक्ति से जेंडर विशेषज्ञ सुश्री शैलजा गुप्ता एवं कार्यालय सहायक दाऊ लाल, सखी वन स्टॉप सेंटर की केंद्र प्रशासक श्रीमती प्रियंका राजवाड़े, विधिक सेवा प्राधिकरण से अधिकार मित्र श्रीमती अंजनी यादव तथा जिला बाल संरक्षण इकाई के डाटा एनालिस्ट सुनील प्रजापति सहित संबंधित विभागों के अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में महिलाएं और किशोरी बालिकाएं उपस्थित रहीं।

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