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22 Sep 2026
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एमसीबी : आयुर्वेद दिवस पर विशेष लेख : वनांचल से शहर तक पहुंचेगा स्वस्थ जीवन का संदेश, आयुर्वेद से जुड़ेगा एमसीबी का प्राकृतिक जीवन

एमसीबी : आयुर्वेद दिवस पर विशेष लेख : वनांचल से शहर तक पहुंचेगा स्वस्थ जीवन का संदेश, आयुर्वेद से जुड़ेगा एमसीबी का प्राकृतिक जीवन
एमसीबी : आयुर्वेद दिवस पर विशेष लेख : वनांचल से शहर तक पहुंचेगा स्वस्थ जीवन का संदेश, आयुर्वेद से जुड़ेगा एमसीबी का प्राकृतिक जीवन। फोटो: आज का दिन न्यूज़

प्राकृतिक वनों से समृद्ध एमसीबी में आयुर्वेद दिवस बनेगा स्वस्थ जीवनशैली, संतुलित आहार, योग और नशामुक्ति के संकल्प का अवसर

एमसीबी/22 सितंबर 2026

क्या स्वस्थ जीवन की शुरुआत किसी बड़े बदलाव से ही होती है हमारी रसोई में मौजूद सामान्य खाद्य सामग्री, मौसम के अनुरूप खान-पान, नियमित दिनचर्या, थोड़ी शारीरिक सक्रियता, योग, ध्यान और नशे से दूरी जैसे छोटे-छोटे कदम भी स्वस्थ जीवन की मजबूत नींव बन सकते हैं। आयुर्वेद का मूल दर्शन हमें इसी संतुलित जीवनशैली की ओर प्रेरित करता है। मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर यानी एमसीबी प्राकृतिक विविधता, वनांचल और ग्रामीण परिवेश से समृद्ध जिला है। भरतपुर का दूरस्थ वन क्षेत्र हो, खड़गवां का ग्रामीण अंचल या मनेन्द्रगढ़ के ग्रामीण और शहरी क्षेत्र-प्रकृति और मानव जीवन का संबंध यहां की जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे जिले में आयुर्वेद का संदेश केवल चिकित्सा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि भोजन, दिनचर्या, प्रकृति और स्वस्थ जीवन के संतुलन से भी जुड़ जाता है।

भारत की प्राचीन चिकित्सा परंपरा आयुर्वेद बीमारी के उपचार के साथ स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा, रोगों की रोकथाम, संतुलित आहार, नियमित दिनचर्या और शरीर-मन के संतुलन पर भी जोर देता है। बदलती जीवनशैली के दौर में अनियमित खान-पान, तनाव, शारीरिक निष्क्रियता और नशे जैसी चुनौतियां बढ़ रही हैं। ऐसे समय में स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूकता का महत्व और बढ़ जाता है। इसी संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से 23 सितंबर 2026 को 11वां आयुर्वेद दिवस मनाया जा रहा है। इस वर्ष की थीम “स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद” है। देश का मुख्य राष्ट्रीय आयोजन महाराष्ट्र के नागपुर में हो रहा है और देशभर में विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से आयुर्वेद तथा स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जनजागरूकता बढ़ाई जा रही है।

अब हर साल 23 सितंबर को आयुर्वेद दिवस
आयुर्वेद दिवस के लिए 23 सितंबर की स्थायी तारीख निर्धारित किया जाना महत्वपूर्ण बदलाव है। इससे पहले आयुर्वेद दिवस धनतेरस के अवसर पर मनाया जाता था, जिसके कारण इसकी तारीख हर वर्ष बदलती थी। अब प्रत्येक वर्ष 23 सितंबर को आयुर्वेद दिवस मनाया जाएगा।
इस वर्ष देश के 30 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में 9,700 से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। भारत के बाहर भी करीब दस देशों और क्षेत्रों में आयुर्वेद दिवस से जुड़ी गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। यह आयुर्वेद और भारतीय पारंपरिक स्वास्थ्य ज्ञान को लेकर देश और दुनिया में बढ़ती रुचि को दर्शाता है।

छत्तीसगढ़ में निवारक स्वास्थ्य पर जोर
छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के साथ नागरिकों को स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करने पर भी जोर दिया जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य सेवाओं के साथ निवारक स्वास्थ्य और जनजागरूकता से जुड़ी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। आयुर्वेद दिवस इसी सोच को जनभागीदारी से जोड़ने का अवसर है। इसका उद्देश्य केवल बीमारी होने के बाद उपचार प्राप्त करना नहीं, बल्कि बीमारी से बचाव और स्वास्थ्य की देखभाल को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने के लिए लोगों को प्रेरित करना भी है।

प्राकृतिक वनों के बीच आयुर्वेद का संदेश
एमसीबी भौगोलिक और प्राकृतिक दृष्टि से विविध जिला है। भरतपुर, खड़गवां और मनेन्द्रगढ़ के अनेक ग्रामीण एवं वनांचल क्षेत्रों में प्राकृतिक वन बड़े भू-भाग को आच्छादित करते हैं। इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों का जीवन प्रकृति और स्थानीय संसाधनों से गहराई से जुड़ा हुआ है। दूरस्थ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना अपने आप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। ऐसे में आयुष स्वास्थ्य शिविर, स्वास्थ्य परामर्श, योग, ध्यान, संतुलित खान-पान और जीवनशैली संबंधी जागरूकता गतिविधियां ग्रामीण और वनांचल आबादी तक स्वास्थ्य का संदेश पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बन सकती हैं। आयुर्वेद प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने की अवधारणा से जुड़ा है। ऋतु के अनुसार खान-पान, दिनचर्या में आवश्यक बदलाव, पर्याप्त विश्राम, शारीरिक सक्रियता और मानसिक संतुलन जैसे विषय आज ग्रामीण और शहरी-दोनों जीवन में समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।

जिले में आयुष सेवाओं का विस्तार
मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में आयुष विभाग द्वारा समय-समय पर ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य एवं जनजागरूकता गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। निःशुल्क आयुष स्वास्थ्य शिविरों में आयुर्वेद एवं होम्योपैथी चिकित्सकों द्वारा स्वास्थ्य परामर्श, आवश्यकतानुसार निःशुल्क औषधि वितरण और स्वस्थ जीवनशैली से संबंधित जानकारी दी जाती है।
योग, ध्यान, ऋतुचर्या, दिनचर्या, संतुलित आहार और नशामुक्ति जैसे विषयों को इन गतिविधियों से जोड़कर स्वास्थ्य जागरूकता को व्यापक बनाया जा सकता है। उद्देश्य यही है कि स्वास्थ्य सेवाओं और जागरूकता का लाभ केवल शहरों तक सीमित न रहे, बल्कि भरतपुर के दूरस्थ वनांचल से लेकर खड़गवां और मनेन्द्रगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचे।

किन स्वास्थ्य समस्याओं में उपयोगी हो सकता है आयुर्वेद
आम नागरिकों के मन में यह सवाल स्वाभाविक है कि आयुर्वेद किन स्वास्थ्य समस्याओं में उपयोगी हो सकता है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय की सामग्री में आयुर्वेद के उपयोग से जुड़े विभिन्न रोग-समूहों का उल्लेख मिलता है। इनमें साइनसाइटिस, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा, अनिद्रा, कुछ मनोसामाजिक समस्याएं, पाचन संबंधी विकार, श्वसन संबंधी समस्याएं तथा मांसपेशी और हड्डियों से जुड़े कुछ रोग शामिल हैं। हालांकि किसी भी रोग में आयुर्वेदिक उपचार की उपयोगिता व्यक्ति की स्थिति, रोग की प्रकृति और उसकी गंभीरता पर निर्भर करती है। इसलिए किसी बीमारी के उपचार के लिए योग्य चिकित्सक की सलाह लेना आवश्यक है। गंभीर या आपातकालीन परिस्थितियों में आवश्यक आधुनिक चिकित्सा एवं विशेषज्ञ चिकित्सा देखभाल में देरी नहीं की जानी चाहिए। जटिल मामलों में उचित रेफरल और आवश्यकता के अनुसार विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों के समन्वय का महत्व भी बना रहता है।

रसोई से स्वास्थ्य का रास्ता
इस वर्ष आयुर्वेद दिवस की गतिविधियों में “रसोई घर से स्वास्थ्य” की अवधारणा विशेष महत्व रखती है। हमारी रसोई केवल भोजन तैयार करने का स्थान नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन शैली की शुरुआत का महत्वपूर्ण केंद्र भी हो सकती है।
संतुलित भोजन, मौसम के अनुरूप खान-पान और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक खाद्य पदार्थों का उचित उपयोग स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। एमसीबी के ग्रामीण एवं वनांचल क्षेत्रों में स्थानीय खाद्य परंपराओं की अपनी विशेषता है। इन्हें वैज्ञानिक एवं स्वास्थ्यपरक दृष्टिकोण से समझना और सुरक्षित खान-पान की आदतों को बढ़ावा देना जनजागरूकता का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है। किसी भी औषधीय पौधे, घरेलू नुस्खे या आयुर्वेदिक औषधि का उपयोग विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार करना अधिक सुरक्षित है।

ऋतु चर्या और दिनचर्या - मौसम के साथ बदले जीवन का तरीका
आयुर्वेद में ऋतुचर्या और दिनचर्या को विशेष महत्व दिया गया है। मौसम के बदलाव के साथ खान-पान और दैनिक जीवन में आवश्यक परिवर्तन किए जा सकते हैं। समय पर सोना-जागना, नियमित भोजन, पर्याप्त विश्राम, व्यक्तिगत स्वच्छता और शारीरिक सक्रियता जैसी आदतें स्वस्थ जीवनशैली का आधार बन सकती हैं। डिजिटल जीवनशैली के बढ़ते प्रभाव के कारण देर रात तक जागना और शारीरिक गतिविधियों में कमी जैसी आदतें आम होती जा रही हैं। ऐसे में नियमित दिनचर्या और शारीरिक सक्रियता के महत्व को समझना और भी जरूरी हो गया है।

मानसिक स्वास्थ्य और नशामुक्ति भी स्वास्थ्य का हिस्सा
स्वास्थ्य केवल शरीर के स्वस्थ रहने का नाम नहीं है। मानसिक स्वास्थ्य भी उतना ही महत्वपूर्ण है। आयुर्वेद दिवस से जुड़ी जागरूकता गतिविधियों में तनाव प्रबंधन, सकारात्मक जीवनशैली और मानसिक संतुलन जैसे विषयों पर चर्चा की जा सकती है। युवाओं और विद्यार्थियों को विशेष रूप से स्वस्थ आदतों को अपनाने तथा नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करना समय की आवश्यकता है। नशे का प्रभाव केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परिवार और सामाजिक जीवन को भी प्रभावित कर सकता है। इसलिए नशामुक्ति का संदेश स्वस्थ समाज के निर्माण से सीधे जुड़ता है।

योग और ध्यान से तन-मन का संतुलन
स्वस्थ जीवनशैली में योग और ध्यान को भी महत्वपूर्ण अभ्यासों के रूप में अपनाया जा सकता है। नियमित योगाभ्यास शरीर को सक्रिय रखने और शारीरिक क्षमता बनाए रखने में सहायक हो सकता है, जबकि ध्यान एकाग्रता और तनाव प्रबंधन के लिए उपयोगी अभ्यास है। एमसीबी के प्राकृतिक परिवेश में योग और ध्यान की गतिविधियों को जनजागरूकता से जोड़ना स्वस्थ जीवन के संदेश को और प्रभावी बना सकता है। भरतपुर का शांत वनांचल हो, खड़गवां का ग्रामीण परिवेश या मनेन्द्रगढ़ का शहरी क्षेत्र-नियमित शारीरिक सक्रियता और मानसिक संतुलन हर आयु वर्ग के लिए महत्वपूर्ण है।

आयुर्वेद दिवस पर निःशुल्क स्वास्थ्य परामर्श
23 सितंबर को आयोजित निःशुल्क आयुष स्वास्थ्य शिविर में नागरिकों को आयुर्वेद एवं होम्योपैथी चिकित्सकों से स्वास्थ्य संबंधी परामर्श प्राप्त होगा। आवश्यकता के अनुसार निःशुल्क औषधियों का वितरण भी किया जाएगा। नागरिकों को अपनी प्रकृति के संबंध में जानकारी प्राप्त करने के साथ ऋतुचर्या, दिनचर्या, रसोई घर से स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य और नशामुक्ति जैसे विषयों पर भी जागरूक किया जाएगा। इस तरह आयुर्वेद दिवस केवल एक आयोजन न रहकर स्वस्थ जीवनशैली को दैनिक व्यवहार से जोड़ने का अवसर बन सकता है।

वनांचल से शहर तक-स्वास्थ्य का साझा संकल्प
एमसीबी की पहचान केवल उसके प्रशासनिक क्षेत्र से नहीं, बल्कि उसके विविध प्राकृतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक परिवेश से भी बनती है। भरतपुर के दूरस्थ वनांचल, खड़गवां के ग्रामीण क्षेत्र और मनेन्द्रगढ़ के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र मिलकर जिले की समग्र तस्वीर प्रस्तुत करते हैं। इन अलग-अलग क्षेत्रों तक स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता का संदेश स्थानीय परिस्थितियों और लोगों की जरूरतों के अनुरूप पहुंचाना जरूरी है। आयुर्वेद दिवस इस दिशा में जनभागीदारी का अवसर देता है। आयुर्वेद हमें यह समझने का अवसर देता है कि स्वस्थ जीवन के लिए हमेशा बड़े बदलाव जरूरी नहीं होते। संतुलित भोजन, नियमित दिनचर्या, पर्याप्त विश्राम, योग, ध्यान, शारीरिक सक्रियता और नशे से दूरी जैसे छोटे-छोटे कदम जीवन की गुणवत्ता में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।

प्राकृतिक वनों से समृद्ध एमसीबी में आयुर्वेद दिवस का यह संदेश है प्रकृति के करीब रहें, अपनी जीवनशैली को संतुलित बनाएं और स्वास्थ्य को उपचार का विषय बनने से पहले जीवन का हिस्सा बनाएं।

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