सूक्ष्म सिंचाई योजना के तहत 55% अनुदान का मिला लाभ, सरगुजा के किसान आनंद राम पैकरा आधुनिक खेती से बने अन्य किसानों के लिए प्रेरणा,
रायपुर | 2 अगस्त 2026।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक खेती अपनाने के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रही है। कृषि एवं उद्यानिकी विभाग की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों को नई तकनीकों से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में सूक्ष्म सिंचाई योजना किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रही है। योजना के तहत ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली पर अनुदान देकर कम पानी में अधिक उत्पादन और बेहतर आय सुनिश्चित की जा रही है।
सरगुजा जिले के लुण्ड्रा विकासखंड अंतर्गत ग्राम झेराडीह के प्रगतिशील किसान आनंद राम पैकरा ने सूक्ष्म सिंचाई योजना का लाभ लेकर अपनी खेती को आधुनिक तकनीक से जोड़ा है। उनके पास कुल 0.909 हेक्टेयर कृषि भूमि है, जिसमें 0.509 हेक्टेयर में धान तथा 0.400 हेक्टेयर में टमाटर और गोभी जैसी सब्जियों की खेती की जाती है।
उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन एवं तकनीकी सहयोग से उन्होंने लगभग डेढ़ एकड़ क्षेत्र में ड्रिप सिंचाई प्रणाली स्थापित की, जिसके लिए उन्हें शासन से 55 प्रतिशत अनुदान प्राप्त हुआ।
कम पानी, कम लागत और अधिक उत्पादन
किसान आनंद राम पैकरा ने बताया कि पहले पारंपरिक सिंचाई पद्धति में अधिक पानी, समय और श्रम लगता था तथा पूरे खेत में समान रूप से सिंचाई करना कठिन होता था। ड्रिप सिंचाई अपनाने के बाद पानी सीधे पौधों की जड़ों तक आवश्यक मात्रा में पहुंच रहा है। इससे जल संरक्षण के साथ पौधों का बेहतर विकास हो रहा है और फसल की गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार आया है।
उन्होंने बताया कि ड्रिप प्रणाली के माध्यम से उर्वरकों का उपयोग भी अधिक प्रभावी तरीके से किया जा रहा है। पौधों को आवश्यकता के अनुरूप पोषक तत्व मिलने से टमाटर और गोभी की फसल अधिक स्वस्थ एवं गुणवत्तापूर्ण तैयार हो रही है। उत्पादन बढ़ने के साथ खेती की लागत में कमी आई है, जिससे सब्जी उत्पादन पहले की तुलना में अधिक लाभकारी बन गया है।
तकनीक आधारित खेती को बढ़ावा
राज्य सरकार सूक्ष्म सिंचाई जैसी आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देकर जल संरक्षण, उत्पादन वृद्धि और किसानों की आय बढ़ाने के लक्ष्य पर कार्य कर रही है। सरगुजा सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों में किसान शासन की योजनाओं का लाभ उठाकर पारंपरिक खेती से आगे बढ़ते हुए वैज्ञानिक एवं तकनीक आधारित कृषि अपना रहे हैं। इससे खेती अधिक टिकाऊ, लाभकारी और आत्मनिर्भर बन रही है।




पाठकों की टिप्पणियां 0