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18 Oct 2026
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भक्ति और गरबा के रंग में रंगा चिरमिरी, भव्य आयोजन के साथ संपन्न हुआ ‘पंखिड़ा-2026’

भक्ति और गरबा के रंग में रंगा चिरमिरी, भव्य आयोजन के साथ संपन्न हुआ ‘पंखिड़ा-2026’
भक्ति और गरबा के रंग में रंगा चिरमिरी, भव्य आयोजन के साथ संपन्न हुआ ‘पंखिड़ा-2026’। फोटो: आज का दिन न्यूज़

चिरमिरी। एमसीबी जिले के चिरमिरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में आयोजित तीन दिवसीय रास गरबा महोत्सव ‘पंखिड़ा-2026’ का समापन भक्ति, उत्साह और सांस्कृतिक उल्लास के बीच हुआ। अंतिम दिन गरबा प्रेमियों की भारी भीड़ उमड़ी। पारंपरिक वेशभूषा में सजे महिला-पुरुष और युवाओं ने भक्ति गीतों की धुन पर देर रात तक गरबा किया।

कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री एवं स्थानीय विधायक श्याम बिहारी जायसवाल अपनी पत्नी कांति जायसवाल के साथ शामिल हुए। उनकी उपस्थिति में प्रतिभागियों का उत्साह देखने लायक रहा।

भक्ति गीतों पर देर रात तक झूमे गरबा प्रेमी

महोत्सव के अंतिम दिन स्टेडियम में ‘राधे-राधे चले आएंगे बिहारी’ और ‘राम-राम सिया राम’ जैसे भक्ति गीतों की धुन गूंजती रही। रंग-बिरंगी रोशनी और पारंपरिक परिधानों के बीच प्रतिभागियों ने सामूहिक गरबा प्रस्तुत कर माहौल को भक्तिमय बना दिया।

सनातन संस्कृति और आस्था का प्रतीक है गरबा: मंत्री

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने रास गरबा को सनातन संस्कृति, माता की आराधना और सामाजिक मेल-मिलाप का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उन्होंने आयोजन में शामिल माताओं-बहनों, युवाओं, गरबा प्रेमियों और समिति के सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया।Example Image

कार्यक्रम में शामिल महिलाओं ने भी महोत्सव की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन परिवारों, युवाओं और महिलाओं को एक साथ आकर सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ने का अवसर देते हैं।

विभिन्न श्रेणियों में प्रतिभागियों को मिले पुरस्कार

तीन दिवसीय महोत्सव के दौरान गरबा की विभिन्न श्रेणियों में प्रतिभागियों को प्रोत्साहित करने के लिए सैकड़ों पुरस्कार वितरित किए गए। पारंपरिक वेशभूषा, गरबा प्रस्तुतियों और सामूहिक सहभागिता ने आयोजन को खास बनाया।

सांस्कृतिक उत्साह के साथ हुआ समापन

‘पंखिड़ा-2026’ का समापन भक्ति संगीत, गरबा की थाप और उत्साहपूर्ण माहौल के बीच हुआ। लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में उमड़ी भीड़ ने चिरमिरी में इस सांस्कृतिक आयोजन के प्रति लोगों की भागीदारी और उत्साह को दर्शाया। तीन दिनों तक चले महोत्सव ने धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और सामूहिक उल्लास का संदेश दिया।

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