छ.ग. शासन की सहायक वाचन पुस्तकों के लेखन में मल्लिका रुद्रा का उल्लेखनीय योगदान
चिरमिरी - शिक्षा के क्षेत्र में अपनी बुलंद उपस्थिति दर्ज करते हुए, अब कोयलांचल शहर चिरमिरी भी अपनी अमिट छाप दर्ज कर रहा है। गौरतलब है कि प्रदेश के पाठ्यक्रम निर्धारित करने वाली संस्था छत्तीसगढ़ राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) ने कक्षा तीसरी से आठवीं तक के विद्यार्थियों के लिए सहायक वाचन नामक पुस्तक श्रृंखला की पाठ्यपुस्तकें तैयार की है। इन पुस्तकों के लेखन में साहित्यकार एवं डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल, चिरमिरी की हिंदी शिक्षिका श्रीमती मल्लिका रुद्रा का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। यह पुस्तकें पूरे छत्तीसगढ़ के सरकारी संस्थानों के विद्यार्थियों द्वारा पढ़ी जा रही हैं। इन पुस्तकों का उद्देश्य विद्यार्थियों में भाषागत दक्षता का विकास करना, उन्हें लोक संस्कृति से जोड़ना और नैतिक मूल्यों की शिक्षा देना है। पुस्तकें सरल भाषा में लिखी गई हैं ताकि बच्चे स्वयं पढ़ सकें, समझ सकें और अपने विचारों को अभिव्यक्त कर सकें। पाठों में सहज भाषा और समृद्ध शब्दावली का प्रयोग हुआ है।
लोक जीवन, परंपरा और छत्तीसगढ़ी संस्कृति को पाठों में समाहित किया गया है। विद्यार्थियों को स्वयं पढ़ने और लिखने की आदत डालने पर बल दिया गया है। कहानियों, कविताओं और संवादों के माध्यम से नैतिक शिक्षा और संवेदनाओं का विकास होगा। मूल्यांकन के लिए खुले प्रश्न दिए गए हैं, जिससे बच्चों में आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति कौशल का विकास हो सके। लेखन समूह में इनके साथ - साथ बलदाऊ राम साहू, विनय शरण सिंह, श्याम नारायण श्रीवास्तव, पोखन लाल जायसवाल, द्रोण साहू एवं श्रीमती प्रिया जोशी ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई।
चिरमिरी शिक्षा जगत के लिये एक नई भूमिका तैयार कर रहीं श्रीमती मल्लिका रुद्रा के साहित्यिक अनुभव और शिक्षण कौशल ने पुस्तकों को बच्चों के लिए और अधिक रोचक एवं उपयोगी बनाया। उनकी लेखनी ने, न केवल भाषा को सहज बनाया बल्कि बच्चों के लिए सीखने को आनंददायक भी कर दिया।
एस.सी.ई.आर.टी. रायपुर का यह प्रयास नई शिक्षा नीति के अनुरूप है, जिसमें स्थानीय परिवेश, संस्कृति और जीवन मूल्यों को शिक्षा से जोड़ने पर बल दिया गया है। इस दिशा में श्रीमती रुद्रा का योगदान शिक्षा जगत के लिए प्रेरणादायी है। यह समाचार शिक्षा जगत के लिए गर्व का विषय है कि मल्लिका जैसी साहित्यकार लेखिका ने बच्चों के सर्वांगीण विकास हेतु इन पुस्तकों में योगदान दिया। उनकी सहभागिता से तैयार हुई सहायक वाचन पुस्तकें आने वाले समय में विद्यार्थियों के लिए ज्ञान और संस्कार का अमूल्य स्रोत सिद्ध होंगी। चिरमिरी क्षेत्र के लिए मल्लिका रुद्रा का नाम अविस्मरणीय रहेगा।




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