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27 Oct 2026
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आधुनिक तकनीक और एआई से बदलेगा छत्तीसगढ़ में अधोसंरचना विकास का स्वरूप, गृह निर्माण मंडल करेगा कार्यक्षेत्र का विस्तार

आधुनिक तकनीक और एआई से बदलेगा छत्तीसगढ़ में अधोसंरचना विकास का स्वरूप, गृह निर्माण मंडल करेगा कार्यक्षेत्र का विस्तार
आधुनिक तकनीक और एआई से बदलेगा छत्तीसगढ़ में अधोसंरचना विकास का स्वरूप, गृह निर्माण मंडल करेगा कार्यक्षेत्र का विस्तार। फोटो: आज का दिन न्यूज़

ओ.पी. चौधरी बोले—आवास निर्माण तक सीमित न रहे मंडल, सड़क, पुल, स्टेडियम और शहरी पुनर्विकास परियोजनाओं में भी बढ़ाए भागीदारी

रायपुर, 27 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ में अधोसंरचना विकास को नई दिशा देने के लिए छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल अब आधुनिक तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), नवाचार और बेहतर वित्तीय प्रबंधन के साथ अपनी कार्यप्रणाली में व्यापक बदलाव की तैयारी कर रहा है। राज्य सरकार का लक्ष्य मंडल को आर्थिक रूप से मजबूत, आत्मनिर्भर और बहुआयामी अधोसंरचना विकास संस्था के रूप में विकसित करना है। इसके तहत मंडल अब आवास निर्माण के साथ सड़क, पुल-पुलिया, खेल परिसर, स्टेडियम, सार्वजनिक भवन, टाउन प्लानिंग और शहरी पुनर्विकास जैसी परियोजनाओं में भी अपनी भागीदारी बढ़ाएगा।

इसी उद्देश्य से नवा रायपुर अटल नगर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद के ऑडिटोरियम में मंडल की राज्य स्तरीय तकनीकी प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें प्रदेशभर से आए अधिकारियों और कर्मचारियों को आधुनिक निर्माण तकनीक, एआई, वित्तीय प्रबंधन, संपदा प्रबंधन, टाउन प्लानिंग स्कीम और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल की जानकारी दी गई।

आर्थिक मजबूती के साथ नए क्षेत्रों में उतरेगा मंडल : ओ.पी. चौधरी

आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार मंडल को आर्थिक रूप से सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। बदलती जरूरतों के अनुरूप मंडल को अपनी तकनीकी दक्षता, कार्यक्षमता और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ानी होगी।

उन्होंने कहा कि मंडल के पास अनुभवी अभियंताओं, तकनीकी अधिकारियों और कर्मचारियों का बड़ा मानव संसाधन है। इस विशेषज्ञता का उपयोग केवल आवास निर्माण तक सीमित नहीं रहना चाहिए। मंडल को सड़क, पुल-पुलिया, स्टेडियम, खेल परिसर, सार्वजनिक भवन और शहरी पुनर्विकास जैसी बड़ी परियोजनाओं में भी अपनी पहचान स्थापित करनी चाहिए।

मंत्री ने अधिकारियों-कर्मचारियों से आधुनिक निर्माण तकनीकों, गुणवत्ता नियंत्रण, वित्तीय अनुशासन और बेहतर परियोजना प्रबंधन को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मंडल को अपनी क्षमताओं का विस्तार करते हुए दूसरे राज्यों की निविदाओं में भी भागीदारी के अवसर तलाशने चाहिए।

लगभग 700 करोड़ रुपये की ऋण देनदारी समाप्त

मंत्री ओ.पी. चौधरी ने बताया कि मंडल की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए राज्य सरकार के सहयोग से लगभग 700 करोड़ रुपये की ऋण देनदारी समाप्त की गई है। इसके साथ ही वन टाइम सेटलमेंट (ओटीएस-2) योजना और प्रभावी विपणन प्रयासों के माध्यम से लंबे समय से अविक्रित आवासीय एवं व्यावसायिक संपत्तियों के विक्रय को गति मिली है।Example Image

उन्होंने कहा कि भविष्य की आवासीय योजनाओं में वास्तविक मांग का आकलन, निर्माण गुणवत्ता, वित्तीय व्यवहार्यता और नागरिक सुविधाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। पीपीपी मॉडल, टाउन प्लानिंग स्कीम और पुनर्विकास जैसे विकल्पों से मंडल अपनी भूमिका का विस्तार कर सकता है।

अधिनियम संशोधन से बढ़ा मंडल का कार्यक्षेत्र

मंडल अध्यक्ष अनुराग सिंह देव ने कहा कि छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल का नाम बदलकर छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल किए जाने के साथ संस्था के कार्यक्षेत्र और जिम्मेदारियों का विस्तार हुआ है। 24 अप्रैल 2026 को छत्तीसगढ़ राजपत्र में प्रकाशित अधिनियम संशोधन संस्था के लिए नए अवसर लेकर आया है।

उन्होंने कहा कि यह बदलाव केवल नाम तक सीमित नहीं है, बल्कि मंडल की कार्यशैली, सोच और भविष्य की संभावनाओं में परिवर्तन का अवसर है। अब मंडल को आवास निर्माण के साथ नगर विकास और विभिन्न अधोसंरचना परियोजनाओं में भी अपनी विशेषज्ञता का उपयोग करना होगा।

अध्यक्ष ने बताया कि पिछले लगभग 18 महीनों में संपत्ति विक्रय, राजस्व अर्जन और नई परियोजनाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। ओटीएस योजना और विपणन प्रयासों से लंबे समय से अविक्रित संपत्तियों के विक्रय में तेजी आई है। बकायादारों को राहत देने के लिए विलंबित अवधि की ब्याज राशि में 50 प्रतिशत तथा जलकर पर भारित सरचार्ज में भी 50 प्रतिशत की छूट दी जा रही है।

उन्होंने अधिकारियों को बकाया वसूली के लिए क्षेत्रीय स्तर पर प्रभावी प्रयास करने और शून्य बकाया राशि के लक्ष्य की दिशा में गंभीरता से काम करने के निर्देश दिए।

33 जिलों में आधुनिक सुविधाओं वाले आवासीय परिसर विकसित करने का लक्ष्य

अनुराग सिंह देव ने कहा कि प्रदेश के सभी 33 जिलों में नागरिकों को बेहतर सुविधाओं से युक्त व्यवस्थित, सुरक्षित और आधुनिक आवासीय परिसर उपलब्ध कराना मंडल का लक्ष्य है। नई आवासीय योजनाओं में भवन निर्माण के साथ उद्यान, बाजार, सामुदायिक सुविधाएं, पर्यावरण संरक्षण और इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन जैसी सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि अधोसंरचना विकास की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए केवल सरकारी बजट पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। पीपीपी मॉडल, टाउन प्लानिंग स्कीम और पुनर्विकास जैसे वित्तीय विकल्प नई परियोजनाओं को गति देने और मंडल की आर्थिक क्षमता बढ़ाने में सहायक हो सकते हैं।

आईआईएम, आईआईआईटी और एनआईटी के विशेषज्ञों ने दिया प्रशिक्षण

मंडल की तकनीकी प्रशिक्षण कार्यशाला में प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों ने सुशासन, प्रशासनिक प्रबंधन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक निर्माण तकनीकों पर मार्गदर्शन दिया।

आईआईएम रायपुर के निदेशक डॉ. संजीव पाराशर ने सुशासन, नेतृत्व क्षमता, कर्तव्यनिष्ठा और प्रभावी प्रशासनिक प्रबंधन पर विचार साझा किए। उन्होंने महाभारत के विभिन्न पात्रों के माध्यम से राजधर्म और जिम्मेदारियों के महत्व को समझाया।

आईआईआईटी नवा रायपुर के प्रोफेसर डॉ. श्रीनिवास के.जी. ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उसके व्यावहारिक उपयोग की जानकारी दी। एनआईटी रायपुर के प्रोफेसर डॉ. जी.डी. रामटेकर ने स्ट्रक्चरल डिजाइन, आरसीसी संरचनाओं की मजबूती और आधुनिक निर्माण तकनीकों पर प्रशिक्षण दिया।

कार्यशाला में वित्तीय जोखिम प्रबंधन, संपदा प्रबंधन, परियोजना विपणन, टाउन प्लानिंग और पीपीपी मॉडल सहित विभिन्न विषयों पर भी विशेषज्ञों ने जानकारी दी।

निर्माण गुणवत्ता और पारदर्शिता पर जोर

मंडल आयुक्त अवनीश कुमार शरण ने कहा कि अधोसंरचना विकास की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप अधिकारियों और कर्मचारियों का निरंतर क्षमता विकास आवश्यक है। प्रशिक्षण में प्राप्त जानकारी का उपयोग कार्यक्षेत्र में किया जाना चाहिए, ताकि निर्माण गुणवत्ता, समयबद्धता, वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।

उन्होंने कहा कि एआई सहित आधुनिक तकनीकों का उचित उपयोग प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाने में मददगार होगा। अधिकारियों और कर्मचारियों को नवाचार, जिम्मेदारी तथा टीमवर्क के साथ काम करते हुए नागरिकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने पर ध्यान देना चाहिए।

कार्यशाला में आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव अंकित आनंद, मंडल अध्यक्ष अनुराग सिंह देव, आयुक्त अवनीश कुमार शरण, अपर आयुक्त हर्ष कुमार जोशी, अजीत सिंह पटेल, एम.डी. पनारिया, एस.के. भगत, सीईओ बी.बी. सिंह, सीएओ पूजा शुक्ला मिश्रा, स्टाफ ऑफिसर अरुण कुमार वंजारी सहित मंडल के वरिष्ठ अधिकारी, अभियंता, तकनीकी विशेषज्ञ और प्रदेशभर से आए अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य मंडल की तकनीकी दक्षता, निर्णय क्षमता और प्रबंधन कौशल को मजबूत करना तथा आधुनिक तकनीक के माध्यम से छत्तीसगढ़ में आवास और अधोसंरचना विकास की नई संभावनाओं को आगे बढ़ाना रहा।

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