नदीम खान | सूरजपुर
सूरजपुर। जनपद पंचायत भैयाथान अंतर्गत ग्राम पंचायत डबरीपारा (खुटरापारा) में गोबरी नदी पर हाल ही में निर्मित रपटा पुल के महज 15 दिनों के भीतर तेज बहाव में बह जाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। निर्माण की गुणवत्ता और जिम्मेदारी तय करने की मांग को लेकर बुधवार, 23 सितंबर को बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने जिला कलेक्ट्रेट पहुंचकर कलेक्टर रेना जमील को ज्ञापन सौंपा।
ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने तत्काल आवागमन बहाल करने, स्थायी पुल निर्माण शुरू कराने तथा रपटा पुल के निर्माण की तकनीकी जांच कराकर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग रखी। साथ ही 10 दिनों के भीतर ठोस कार्रवाई नहीं होने पर NH-43 पर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन और चक्काजाम की चेतावनी दी।
जनसहयोग से शुरू हुआ था पुल निर्माण
ग्रामीणों के अनुसार, 30 जून 2025 को गोबरी नदी पर बना मुख्य पुल पूरी तरह क्षतिग्रस्त होकर ध्वस्त हो गया था। इसके बाद क्षेत्र के ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने कई बार शासन-प्रशासन से पुल निर्माण की मांग की।
बताया गया कि लंबे समय तक समाधान नहीं होने पर ग्रामीणों ने जनसहयोग से रपटा पुल निर्माण का प्रयास शुरू किया। इसके बाद प्रशासन की ओर से हस्तक्षेप करते हुए रपटा पुल निर्माण के लिए 15 लाख रुपये की शासकीय स्वीकृति दी गई।
निर्माण के 15 दिन बाद ही बह गया रपटा
ग्रामीणों का कहना है कि पुराने पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद आवागमन की समस्या को देखते हुए रपटा पुल का निर्माण कराया गया था। लेकिन निर्माण पूरा होने के करीब 15 दिनों के भीतर ही नदी में तेज पानी आने के बाद पुल बह गया।
पुल के बह जाने से स्कूली बच्चों, किसानों, मजदूरों, मरीजों और अन्य ग्रामीणों के आवागमन में गंभीर परेशानी उत्पन्न हो गई है। ग्रामीणों का दावा है कि आपातकालीन स्थिति में 108 एंबुलेंस के आवागमन पर भी इसका असर पड़ रहा है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि 7 जुलाई 2026 को अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), भैयाथान को पत्र के माध्यम से संभावित खतरे की जानकारी दी गई थी। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि यदि समय रहते आवश्यक कदम उठाए जाते तो वर्तमान स्थिति से बचा जा सकता था।
कलेक्टर ने 15 दिनों में काम शुरू कराने का दिया आश्वासन
ग्रामीण प्रतिनिधिमंडल से चर्चा के दौरान कलेक्टर रेना जमील ने मामले को गंभीरता से लेते हुए 15 दिनों के भीतर धरातल पर काम शुरू कराने का आश्वासन दिया।
वहीं, ग्रामीणों को मिली जानकारी के अनुसार पूर्व में निर्मित रपटा पुल की गुणवत्ता को लेकर उठे सवालों के बाद संबंधित ठेकेदार के भुगतान पर भी रोक लगी हुई है। मामले में निर्माण कार्य की गुणवत्ता और तकनीकी मानकों की जांच की मांग भी सामने आई है।
ग्रामीणों की तीन प्रमुख मांगें
ग्रामीणों ने प्रशासन के समक्ष मुख्य रूप से तीन मांगें रखी हैं—
1. तत्काल आवागमन बहाल हो:
ध्वस्त रपटा पुल की आवश्यक मरम्मत अथवा वैकल्पिक व्यवस्था कर ग्रामीणों, विद्यार्थियों और मरीजों के लिए सुरक्षित आवागमन बहाल किया जाए।
2. स्थायी पुल का निर्माण:
बारिश के दौरान बार-बार उत्पन्न होने वाली समस्या से स्थायी समाधान के लिए गुणवत्तापूर्ण पक्के पुल का निर्माण स्वीकृत कर जल्द कार्य शुरू कराया जाए।
3. निर्माण की निष्पक्ष तकनीकी जांच:
15 दिनों में क्षतिग्रस्त हुए रपटा पुल के निर्माण में इस्तेमाल सामग्री, डिजाइन, तकनीकी मानकों और निर्माण गुणवत्ता की विशेषज्ञों से जांच कराई जाए। जांच में जिम्मेदारी तय होने पर संबंधित ठेकेदार, निर्माण एजेंसी अथवा जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
10 दिन में कार्रवाई नहीं हुई तो NH-43 पर चक्काजाम की चेतावनी
ग्रामीणों ने प्रशासन को स्पष्ट अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि निर्धारित समय में मांगों पर ठोस कार्रवाई शुरू नहीं हुई तो जनपद सभापति राजू कुमार गुप्ता के नेतृत्व में क्षेत्र के जनप्रतिनिधि, युवा और ग्रामीण NH-43 पर धरना-प्रदर्शन करेंगे।
ज्ञापन में डुमरिया स्थित विश्वकर्मा ढाबा के पास चक्काजाम किए जाने की चेतावनी दी गई है। जनपद सभापति राजू कुमार गुप्ता ने भी कहा है कि यदि कलेक्टर द्वारा दिए गए आश्वासन के अनुसार निर्धारित समय में काम शुरू नहीं होता है तो वे ग्रामीणों के साथ धरने पर बैठेंगे।
बड़ी संख्या में ग्रामीण रहे मौजूद
ज्ञापन सौंपने के दौरान जनपद सभापति राजू कुमार गुप्ता के साथ डबरीपारा, बांसापारा और गंगौटी पंचायतों के सरपंच एवं उपसरपंच सहित निरज साहू, प्रवीण कुमार साहू, दिपनारायण साहू, जगतपाल सिंह, चन्द्रदेव साहू, अवधेश कांशी, लाकेश्वर सिंह मरावी, राजेंद्र यादव, हरिओम नारायण पाण्डेय, राकेश साहू, रामदत्त पाण्डेय, लवकेश यादव, मनोज यादव, दीपक साहू, छैला बाबू, कृष्णा यादव, ललन साहू, चीनू गुप्ता सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि और ग्रामीण उपस्थित रहे।




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