लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 31 के तहत कार्रवाई की आशंका निराधार, निर्वाचन आयोग ने जारी किया स्पष्टीकरण
एमसीबी/04 नवंबर 2026
विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्यक्रम के दौरान प्रारूप मतदाता सूची में नाम नहीं होने पर पूर्व में पंजीकृत मतदाता भी फॉर्म-6 भरकर अपना नाम दोबारा जुड़वा सकेंगे। भारत निर्वाचन आयोग ने इस संबंध में स्पष्टीकरण जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि पहले मतदाता सूची में नाम दर्ज होने के बावजूद वर्तमान प्रारूप सूची में नाम नहीं होने पर फॉर्म-6 भरना गलत घोषणा नहीं माना जाएगा। ऐसे आवेदकों के विरुद्ध केवल पूर्व पंजीकरण के आधार पर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
पूर्व में पंजीकृत मतदाताओं की आशंका आयोग ने की दूर
आयोग के संज्ञान में आया था कि कई ऐसे मतदाता, जिनका नाम पहले मतदाता सूची में दर्ज था, लेकिन वर्तमान प्रारूप सूची में शामिल नहीं है, वे फॉर्म-6 भरने में संकोच कर रहे हैं। दरअसल, फॉर्म-6 में पहली बार मतदाता सूची में नाम शामिल कराने संबंधी घोषणा के कारण उन्हें आशंका थी कि पूर्व पंजीकरण की स्थिति में यह गलत घोषणा मानी जा सकती है और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत कानूनी कार्रवाई हो सकती है। आयोग ने इस आशंका को निराधार बताते हुए स्पष्ट किया है कि वर्तमान प्रारूप सूची में नाम नहीं होने पर पूर्व मतदाता भी नियमानुसार फॉर्म-6 प्रस्तुत कर सकते हैं।
दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्णय के अनुरूप जारी निर्देश
निर्वाचन आयोग ने दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा याचिका क्रमांक डब्ल्यू.पी. (सी) 14955/2026, निलोत्पल दत्ता एवं अन्य बनाम भारत निर्वाचन आयोग एवं अन्य में 14 अक्टूबर 2026 को दिए गए निर्णय का भी उल्लेख किया है। आयोग के अनुसार, न्यायालय ने ऐसी परिस्थितियों में फॉर्म-6 भरने को लेकर गलत घोषणा संबंधी आशंका को निराधार माना है।
निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों को दिए निर्देश
भारत निर्वाचन आयोग ने सभी निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ईआरओ) को निर्देश दिए हैं कि केवल इस आधार पर किसी आवेदक के विरुद्ध धारा 31 के तहत कार्रवाई नहीं की जाए कि उसका नाम पूर्व की मतदाता सूची में दर्ज था। हालांकि, आवेदक को यह सुनिश्चित करना होगा कि उसका नाम किसी अन्य संसदीय अथवा विधानसभा क्षेत्र की वर्तमान मतदाता सूची में पहले से दर्ज न हो तथा आवेदन निर्धारित नियमों के अनुरूप हो।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, छत्तीसगढ़ ने नागरिकों से अपील की है कि वे प्रारूप मतदाता सूची में अपने नाम की जांच अवश्य करें। नाम नहीं होने की स्थिति में निर्धारित समय-सीमा के भीतर फॉर्म-6 भरकर मतदाता सूची में अपना पंजीकरण सुनिश्चित कराएं, ताकि कोई भी पात्र नागरिक मतदान के अधिकार से वंचित न रहे।



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