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30 Oct 2026
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बाघों की सुरक्षा के लिए वन विभाग की बड़ी पहल, सूरजपुर में दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला संपन्न

बाघों की सुरक्षा के लिए वन विभाग की बड़ी पहल, सूरजपुर में दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला संपन्न
बाघों की सुरक्षा के लिए वन विभाग की बड़ी पहल, सूरजपुर में दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला संपन्न। फोटो: आज का दिन न्यूज़

नदीम खान, सूरजपुर

सूरजपुर, 14 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ शासन, वन विभाग के निर्देशानुसार तथा मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) एवं क्षेत्रीय निदेशक, गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व, सरगुजा के मार्गदर्शन में सूरजपुर वनमंडल में 12 एवं 13 सितंबर 2026 को टाइगर प्रोटेक्शन एवं मॉनिटरिंग विषय पर दो दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का उद्देश्य बाघ संरक्षण, मैदानी निगरानी, वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष की परिस्थितियों में प्रभावी कार्रवाई के लिए वन अमले की तकनीकी एवं व्यावहारिक दक्षता बढ़ाना रहा।

प्रशिक्षण के प्रथम दिवस सूरजपुर वनमंडल कार्यालय के सभागार में कक्षा आधारित सत्र आयोजित किए गए। इसमें सरगुजा वन वृत्त में बाघों की वर्तमान एवं ऐतिहासिक उपस्थिति, उनके मूवमेंट, सेंट्रल लैंडस्केप कॉरिडोर एवं लैंडस्केप कनेक्टिविटी तथा राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की टाइगर मैपिंग से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गई।

कार्यशाला में बाघों के संरक्षण एवं निगरानी के साथ उनकी मृत्यु के संभावित कारणों की पहचान और रोकथाम पर भी वैज्ञानिक दृष्टिकोण से चर्चा हुई। बीमारी, आपसी संघर्ष, प्राकृतिक वृद्धावस्था तथा मानवजनित कारणों, जिनमें शिकार और विद्युत करंट जैसे खतरे शामिल हैं, की पहचान करने तथा समय रहते प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के तरीकों पर प्रशिक्षण दिया गया।

प्रशिक्षण के दूसरे दिन कोरिया वनमंडल के कटकोना कोलियरी/टेमरी बीट क्षेत्र में व्यावहारिक फील्ड प्रशिक्षण आयोजित किया गया। इस दौरान प्रशिक्षणार्थियों को बाघों की निगरानी एवं संरक्षण से जुड़ी तकनीकों का प्रत्यक्ष अभ्यास कराया गया। ट्रैप कैमरा इंस्टॉलेशन एवं मॉनिटरिंग (टीओटीआर) के माध्यम से पेट्रोलिंग और डेटा संकलन, मवेशियों के शिकार की पहचान एवं रिकॉर्डिंग, पगमार्क एवं डंग एनालिसिस, एंटी-स्नेर वॉक के जरिए अवैध फंदों एवं अन्य खतरों की पहचान तथा नियमित एवं व्यवस्थित फुट पेट्रोलिंग की तकनीक समझाई गई।

कार्यशाला में मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) एवं फील्ड डायरेक्टर, गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व, उप निदेशक एलिफेंट रिजर्व सरगुजा, वनमंडलाधिकारी सूरजपुर तथा उप निदेशक गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व सहित वरिष्ठ वन अधिकारियों का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।

प्रशिक्षण के प्रमुख सत्रों का संचालन श्री गौरव निहलानी, सदस्य छत्तीसगढ़ राज्य वन्यजीव बोर्ड एवं उप निदेशक, एलिफेंट रिजर्व सरगुजा द्वारा किया गया। उन्होंने बाघ मॉनिटरिंग की आधुनिक तकनीकों, फील्ड प्रोटेक्शन तथा पेट्रोलिंग के दौरान अपनाई जाने वाली वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी प्रशिक्षणार्थियों को दी।

मैदानी अमले की सुरक्षा और प्रभावी कार्य निष्पादन को ध्यान में रखते हुए ट्रैप कैमरा, वॉकी-टॉकी, टॉर्च, ग्लव्स, वेटरनरी किट तथा टाइगर ट्रैकर्स के पहचान-पत्र जैसे आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराने और उनके समुचित उपयोग पर भी जोर दिया गया।

प्रशिक्षण के दौरान बाघ संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने को भी महत्वपूर्ण विषय के रूप में शामिल किया गया। स्थानीय ग्रामीणों, चरवाहों एवं स्कूली बच्चों को वन्यजीव संरक्षण गतिविधियों से जोड़ने, स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित टाइगर ट्रैकर्स तैयार करने तथा ‘वाघ चौपाल’ जैसे जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से बाघ संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर चर्चा की गई।

दो दिवसीय कार्यशाला में सूरजपुर, कोरिया एवं मनेन्द्रगढ़ वनमंडल, गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व तथा एलिफेंट रिजर्व/तमोर पिंगला वन्यजीव अभयारण्य के अधिकारियों एवं मैदानी कर्मचारियों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण में उप वनमंडलाधिकारी (एसडीओ), वन परिक्षेत्राधिकारी (रेंजर), डिप्टी रेंजर, फॉरेस्टर, बीट गार्ड एवं टाइगर ट्रैकर सहित मैदानी स्तर के अधिकारियों और कर्मचारियों ने भाग लिया।

कार्यशाला के माध्यम से बाघ संरक्षण के लिए आधुनिक निगरानी तकनीक, वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन, मैदानी सुरक्षा, नियमित पेट्रोलिंग और स्थानीय समुदाय की भागीदारी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई।

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