राष्ट्रीय सम्मेलन में विभिन्न राज्यों की उपलब्धियों और नवाचारों की समीक्षा, सहकारिता के विस्तार की रणनीति पर हुआ विमर्श
रायपुर, 08 अक्टूबर 2026
देश में सहकारिता आंदोलन को नई दिशा देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की राष्ट्रीय रणनीति तय करने के लिए बस्तर के जगदलपुर में देशभर के वरिष्ठ अधिकारी जुटे हैं। भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय समीक्षा सम्मेलन में विभिन्न राज्यों में सहकारिता के क्षेत्र में हुए नवाचारों, उपलब्धियों और सफल मॉडलों की समीक्षा के साथ उन्हें व्यापक स्तर पर लागू करने की संभावनाओं पर विमर्श किया जा रहा है।
‘सहकार से समृद्धि’ के संकल्प को धरातल पर उतारने की दिशा में महत्वपूर्ण इस सम्मेलन में सहकारी संस्थाओं के आधुनिकीकरण, डिजिटलीकरण और कारोबार विस्तार की समीक्षा की गई। साथ ही राज्यों के अनुभवों के आधार पर सहकारिता को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और आत्मनिर्भर बनाने की आगामी कार्ययोजना पर विचार-विमर्श हुआ।
सम्मेलन में छत्तीसगढ़ के सहकारिता सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना की अध्यक्षता में पूर्वी एवं पूर्वोत्तर राज्यों की सहकारी पहलों की समीक्षा हुई। इसमें छत्तीसगढ़ सहित असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, नागालैंड, सिक्किम, बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा ने अपनी उपलब्धियों और सफल अनुभवों को साझा किया। सत्र का संचालन मिजोरम के सहकारी समितियों के पंजीयक ने किया।
पश्चिमी एवं दक्षिणी राज्यों के सत्र में राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, केरल, तमिलनाडु, गोवा और महाराष्ट्र के प्रतिनिधियों ने अपने सहकारी मॉडलों और प्रगति की जानकारी दी। इस सत्र की अध्यक्षता तमिलनाडु के अपर मुख्य सचिव ने की, जबकि संचालन महाराष्ट्र के सहकारी समितियों के पंजीयक ने किया।
सम्मेलन के तकनीकी सत्रों में एमपैक्स के गठन एवं विस्तार, पैक्स के कंप्यूटरीकरण, विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना, सहकारी बैंकिंग और व्यावसायिक विविधीकरण की प्रगति पर चर्चा हुई। राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस, तकनीकी सहायता इकाई (टीएसयू) और नई राष्ट्रीय सहकारी नीति की आगामी कार्ययोजना पर भी प्रस्तुतियां दी गईं।
सम्मेलन में विभिन्न राज्यों के अनुभवों और उपलब्धियों के आधार पर सहकारी संस्थाओं के विस्तार, कार्यप्रणाली में पारदर्शिता तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था में उनकी भागीदारी बढ़ाने के उपायों पर विचार-विमर्श हुआ।




पाठकों की टिप्पणियां 0