सुशासन तिहार में संवेदनशील पहल 85 प्रतिशत दिव्यांग छोटेलाल को मिला मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल,,,

सुशासन तिहार में संवेदनशील पहल 85 प्रतिशत दिव्यांग छोटेलाल को मिला मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल,,,

जनदर्शन में पहुंची फरियाद पर कलेक्टर ने मौके पर दिए निर्देश, चेहरे पर लौटी मुस्कान,,,

मनेंद्रगढ़ । राज्य में चल रहे ‘सुशासन तिहार’ के बीच जिले में प्रशासन की संवेदनशीलता और त्वरित कार्यवाही का एक प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया है। साप्ताहिक जनदर्शन में पहुंचे 85 प्रतिशत दिव्यांग हितग्राही छोटेलाल को कलेक्टर के निर्देश पर मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तत्काल शुरू कर दी गई है।

     जनपद पंचायत भरतपुर के दूरस्थ ग्राम जामथान (पोस्ट कॅजिया) निवासी 55 वर्षीय छोटेलाल अपने आवेदन के साथ जनदर्शन में पहुंचे थे। उन्होंने कलेक्टर से निवेदन किया कि शारीरिक असमर्थता के कारण उन्हें आवागमन में भारी परेशानी होती है, इसलिए उन्हें मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल उपलब्ध कराई जाए।

कलेक्टर ने दिखाई संवेदनशीलता, मौके पर दिए निर्देश

     हितग्राही की बात सुनते ही कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लिया और तत्काल समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। दस्तावेजों की जांच में छोटेलाल की 85 प्रतिशत दिव्यांगता प्रमाणित पाई गई, जिसके आधार पर उन्हें योजना के तहत पात्र माना गया।    

    कलेक्टर ने अधिकारियों से कहा कि सुशासन की भावना के अनुरूप बिना अनावश्यक औपचारिकता के हितग्राही को जल्द से जल्द मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल उपलब्ध कराई जाए।

“अब सफर आसान होगा”

    मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल की स्वीकृति की जानकारी मिलते ही छोटेलाल के चेहरे पर खुशी लौट आई। उन्होंने जिला प्रशासन और कलेक्टर के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अब उनका दैनिक आवागमन काफी आसान हो सकेगा।

सुशासन तिहार का दिख रहा असर

    जिले में आयोजित ‘सुशासन तिहार’ का उद्देश्य शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। प्रशासन लगातार जनदर्शन और शिविरों के माध्यम से लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान कर रहा है।

दिव्यांग और बुजुर्गों की सेवा प्राथमिकता कलेक्टर

     कलेक्टर ने कहा कि दिव्यांगजनों और बुजुर्गों की समस्याओं का त्वरित समाधान प्रशासन की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। जिला प्रशासन यह सुनिश्चित कर रहा है कि पात्र हितग्राहियों को अपने अधिकारों के लिए अनावश्यक भटकना न पड़े।

संवेदनशील प्रशासन की मिसाल

   छोटेलाल को मिली यह राहत केवल एक सहायता नहीं, बल्कि प्रशासन की संवेदनशील कार्यशैली और सुशासन की प्रतिबद्धता का जीवंत उदाहरण बन गई है।