खुलेआम मुख्य मार्ग में बिक रहा मांस मछली स्थानीय प्रशासन बेसुध, छात्र और आमजन हलाकान,
चिरमिरी । चिरमिरी शहर के मुख्य मार्ग गोदरीपारा एवं बड़ाबाजार में खुले में मांस की बिक्री चालू है । ये मुख्य मार्ग जो कि पेट्रोल पंप, लिटिल फ्लावर स्कूल, डीएवी स्कूल, कन्या शाला, बॉयज हायर सेकेंडरी स्कूल, सरस्वती शिशु मंदिर एवं धार्मिक स्थल हनुमान मंदिर, शनि मंदिर साथ ही नागेश्वर काली मंदिर से निकटतम दूरी पर स्थित है, उसके बाद भी मुख्य मार्ग के दोनों किनारों पर मटन मांस एवं मछली की बिक्री धड़ल्ले से की जा रही है । इन मांस व्यापारियों को ना किसी का भय है ना किसी का डर ना ही कोर्ट के आदेश का खौफ।
कई बार जनप्रतिनिधियों के शिकायत पर प्रशासन द्वारा आदेश दिया लेकिन इन मांस मछली व्यापारियों ने किसी की नहीं मानी और हद तो इतनी ज्यादा हो गई है कि यह मांस बेचेंगे जरूर, लेकिन हरे कलर का पर्दा लगाकर । शासन की फटकार पर कुछ दिन जब अधिकारियों का खौफ रहता है, तो यह हरे रंग का पर्दा लगाकर मांस की बिक्री करते हैं और मांस को खुले में नहीं टांगते हैं। लेकिन जैसे ही थोड़ा समय बीतता है, अपनी मर्जी से अपनी दुकान के सामने मांस को लटका कर धड़ल्ले से बेचते हैं जैसे कि मानो लोग मांस को देखकर ही उनकी दुकान पर मांस खरीदने आएंगे । जबकि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन है कि आप खुले में मांस की बिक्री नहीं कर सकते ।
नगरीय निकाय में मांस की बिक्री के लिए स्लॉटर हाउस बने हैं चिरमिरी नगर पालिक निगम ने लगभग सभी स्थानों पर स्लॉटर हाउस बना हुआ है । बावजूद इसके खुले में मांस की बिक्री आखिर किसकी शह पर हो रही है?
प्रश्न तो तब उठता है जब इस मुख्य मार्ग से छोटे-छोटे बच्चे अपने स्कूल सुबह सुबह जाते हैं, लोग मंदिर आराधना करने जाते हैं, धार्मिक आयोजनों में सम्मिलित होने के लिए जाने का मुख्य मार्ग यही है और आंख के सामने यह लटका हुआ मांस और इसकी बदबू लोगों के नाक तक जाती है और कई बार तो देखा गया है कि वाहनों में जाते समय छोटे- छोटे बच्चों को उल्टियां भी हो गई है।
अब इन दुकानों को पर्दा लगाकर बिक्री नहीं अपितु इन दुकानों को ही यहां से कहीं स्थानांतरित करके स्लॉटर हाउस में लगाया जाए तब जाकर कहीं स्कूली बच्चों, राहगीरों को और श्रद्धालुओं को राहत मिलेगी ।
देखना है आखिर प्रशासन कब इस कुंभकर्णी नींद से जगाता है और मुख्य मार्ग पर चलने वाले राहगीरों को आंख में इस गंदी तस्वीर को ना देखना पड़ेगा।आखिर इस पर रोक कब लगेगी और देखना है कि इन व्यापारियों का साहस बड़ा है कि प्रशासन का आदेश और प्रशासन की सख्ती ।
खुले में मांस बिक्री की जगह से अनुविभागीय दंडाधिकारी एवं तहसील कार्यालय की भी दूरी बहुत ही कम है । यहां से दिन में कई बार शहर के प्रशासनिक अधिकारीओ का आना-जाना भी होता है । बावजूद इसके उनकी आंख के सामने यह मांस की खुली बिक्री आखिर हो क्यों रही है ।
मुख्य मार्ग पर अवैध चबूतरे पर तिरपाल बनाकर मांस की बिक्री करने की अनुमति आखिर किसने दी है? और यदि अनुमति नहीं दी है तो किसके आदेश पर यह चबूतरा का निर्माण और टपरी का निर्माण हुआ है और यदि यह अवैध निर्माण है तो इस पर सुशासन का बुलडोजर आखिर कब चलेगा ।
नगर पालिका अधिनियम में विशेष रूप से यह प्रावधान वर्णित है कि शहर के ऐसे कोई भी स्थान जहां आम नागरिकों का आवागमन हो, धर्मालय, स्कूल, स्वास्थ्य एवं सार्वजनिक संस्थाएं आदि संचालित हो, उनके आसपास खुले में मांस बिक्री पूर्णतः प्रतिबंधित हो और यह सुनिश्चित किया जाए कि अनिवार्य रूप से मांस बिक्री केवल निर्दिष्ट बूचड़खाने या पूरी तरह से कांच से बंद दुकानों में संचालित किया जाए । साथ ही खुले में मांस के अवशेष फेंकने से होने वाले प्रदूषण के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित हो, पर निगम द्वारा कथित कड़ाई अब तक सिफर है ।
मुख्य मार्ग या सार्वजनिक स्थानों पर खुलेआम मांस मछली की बिक्री न केवल स्वच्छता के लिए चिंताजनक है बल्कि कानूनी रूप से भी लोकहित विरुद्ध है । उक्त संबंध में सुप्रीम कोर्ट के सख्त एवं स्पष्ट निर्देश हैं। भारतीय न्याय संहिता की धारा 272 और 273 लोक न्यूसेंस के तहत आता है यदि खुलेआम मांस बिक्री के कारण आम जन को असुरक्षा अथवा मानसिक विचलित होने का खतरा हो तो यह अपराध की श्रेणी में आता है ।
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