छत्तीसगढ़ में नैनो यूरिया और नैनो DAP बने किसानों की नई पसंद, लागत में कमी और बेहतर उत्पादन से खेती हुई आसान,,

छत्तीसगढ़ में नैनो यूरिया और नैनो DAP बने किसानों की नई पसंद, लागत में कमी और बेहतर उत्पादन से खेती हुई आसान,,

रायपुर, 30 मई 2026:

खेती में बढ़ती लागत, मिट्टी की घटती उर्वरा शक्ति और रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से पैदा हो रही चुनौतियों के बीच छत्तीसगढ़ सहित देश के विभिन्न राज्यों में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। पारंपरिक यूरिया और डीएपी (DAP) के मुकाबले अब नैनो यूरिया और नैनो डीएपी किसानों के लिए एक उपयोगी और लोकप्रिय विकल्प बनकर उभरे हैं। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि किसान संतुलित और वैज्ञानिक तरीके से इनका उपयोग करें, तो इससे खेती की लागत कम करने, उत्पादन बेहतर बनाने और मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में बड़ी मदद मिल सकती है।

लागत और बचत का गणित: प्रति एकड़ 100 रुपये से 150 रुपये तक की सीधी बचत

छत्तीसगढ़ सहित देश के अधिकांश धान उत्पादक क्षेत्रों में सामान्यतः प्रति एकड़ 2 से 3 बोरी पारंपरिक यूरिया और 1 बोरी डीएपी का उपयोग किया जाता है। मौजूदा कीमतों के अनुसार, एक बोरी यूरिया की कीमत लगभग 270 रुपये और एक बोरी डीएपी की कीमत लगभग 1350 रुपये है। इस प्रकार केवल इन दोनों खादों पर ही प्रति एकड़ करीब 1900 से 2200 रुपये तक खर्च हो जाता है।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, नैनो उर्वरकों को अपनाकर इस खर्च को काफी कम किया जा सकता है:

यूरिया में बचत: 2 बोरी पारंपरिक ठोस यूरिया का मूल्य लगभग 540 रुपये होता है। इसके स्थान पर फसल के दो चरणों में नैनो यूरिया का उपयोग करने से अनुमानित खर्च लगभग 450-500 रुपये आता है। इससे सीधे खाद की लागत में प्रति एकड़ करीब 100 रुपये की बचत होती है। इसके अलावा भारी बोरियों के परिवहन, भंडारण और मजदूरी खर्च में भी बड़ी कमी आती है।

डीएपी (DAP) में बचत: कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, 50 किलो डीएपी की पूरी मात्रा उपयोग करने के बजाय यदि किसान 25 किलो पारंपरिक डीएपी के साथ नैनो डीएपी का उपयोग करें, तो प्रति एकड़ लगभग 75 से 150 रुपये तक की बचत होती है।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण: पारंपरिक खाद से क्यों बेहतर हैं नैनो उर्वरक?

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, नैनो उर्वरक पौधों को पोषण देने की तकनीक में एक बड़ा सुधार हैं:

पोषक तत्वों का सीधा अवशोषण: पारंपरिक यूरिया का एक बड़ा हिस्सा मिट्टी, पानी और वातावरण में मिलकर नष्ट हो जाता है। इसके विपरीत, नैनो यूरिया के सूक्ष्म कण सीधे पौधों द्वारा तेजी से अवशोषित किए जाते हैं, जिससे पौधों को संतुलित पोषण मिलता है।

उत्पादन में वृद्धि: संतुलित उपयोग की स्थिति में फसल की बढ़वार बेहतर होती है, पौधों की हरियाली लंबे समय तक बनी रहती है और दानों का भराव मजबूत होता है। कई कृषि परीक्षणों में इससे 5 से 8 प्रतिशत तक उत्पादन वृद्धि के संकेत मिले हैं।

मिट्टी और पर्यावरण का संरक्षण: लगातार अधिक मात्रा में रासायनिक खाद के उपयोग से मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरा शक्ति प्रभावित होती है। नैनो उर्वरकों का संतुलित उपयोग मिट्टी में पोषक तत्वों का संतुलन बनाए रखता है, रासायनिक अवशेषों को कम करता है और भूजल प्रदूषण को घटाता है।

रायपुर जिले में खाद की उपलब्धता: सरकार के पास पर्याप्त स्टॉक

कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में पारंपरिक उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण उपलब्ध है और किसानों को किसी भी तरह से परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। रायपुर जिले की समितियों में वर्तमान उपलब्धता इस प्रकार है:

पारंपरिक यूरिया: समितियों में उपलब्धता 9,102 मीट्रिक टन और कुल भंडारित मात्रा 10,732 मीट्रिक टन है।

पारंपरिक डीएपी: समितियों में उपलब्धता 3,092 मीट्रिक टन और कुल भंडारित मात्रा 3,927 मीट्रिक टन है।

इसके साथ ही, कृषि सेवा केंद्रों और समितियों के माध्यम से नैनो यूरिया और नैनो डीएपी की उपलब्धता को भी लगातार बढ़ाया जा रहा है, ताकि किसान अपनी आवश्यकता और सुविधा के अनुसार इन आधुनिक विकल्पों का चुनाव कर सकें।

आने वाले समय में वैज्ञानिक खेती, संतुलित उर्वरक उपयोग और आधुनिक तकनीकों का समन्वय ही कृषि को लाभकारी बनाएगा। नैनो उर्वरक न केवल किसानों का मुनाफा बढ़ा रहे हैं, बल्कि आयातित उर्वरकों पर निर्भरता कम करके देश को कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर ले जा रहे हैं।