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वक़्त करवट लेता है-१९९० में जब कश्मीर में पंडित,मुस्लिम आतताई के शिकार हुए थे तब भाजपा गठबंधन की सरकार की विफलता पर रथ ने पर्दा डाला अब,आर्थिक विसमता के दौर में नागरिक बिल पर्दा बन टंग गया है..,

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नितिन राजीव सिन्हा

यह तो वक़्त की फ़ितरत है कि वह घड़ी के काँटों में क़ैद हुआ है जब घड़ी नहीं थे तब सूर्य की रौशनी और इंसान की परछाई का आंकलन कर पहर का निर्धारण होता था..,

१९९० का जनवरी माह और दिसम्बर १९८९ का पहला हफ़्ता देश की दशा बदलने वाला माना जा सकता है वीपी सिंह बीजेपी के सहयोग से सरकार बनाते हैं मुफ़्ती उस सरकार में गृह मंत्री बनते हैं ३.१२.१९८९ को शपथ ग्रहण होने के अगले हफ़्ते ही सईद की बिटिया मेडिकल छात्रा रबैय्या सईद का कश्मीर घाटी में नाटकीय अपहरण होता है पाँच ख़ूँख़ार आतंकी नेता जेल से रिहा कराये जाते हैं यह सौदा बीजेपी गठबंधन की सरकार कश्मीर की शांति को खंडित करने की शर्तों पर करती है फलतः२१ जनवरी १९९० की शाम मस्जिदें एलान करती हैं के,पंडित घाटी छोड़ दें फिर हत्याओं और बलात्कार का सिलसिला थमता नहीं है यहाँ सरकार विफल हुई थी मुफ़्ती मोहम्मद सईद देश गृह मंत्री थे वो कश्मीर से थे और कश्मीर जल रहा था हालात क़ाबू से बाहर थे ऐसे समय मे सितम्बर १९९० में अडवाणी रथ लेकर सोमनाथ से अयोध्या की यात्रा पर निकल पड़ते हैं कश्मीर के साथ पूरा देश सुलग उठता है “कश्मीरी पंडित का मुद्दा तब दब जाता है,यह सरकार की किरकिरी का विषय न होकर नेहरु के हिस्से की समस्या बन जाता है..,”

आर्थिक मोर्चे पर मोदी सरकार की विफलता,महिला सुरक्षा के मामले में अवांछित माहौल इन दिनों देश में निर्मित हुआ है स्थिति सरकार के नियंत्रण से बाहर हुई है देश चिंतित हुआ है सरकार के पास किसी सवाल का जवाब नहीं है..,

माहौल पुनःअराजक हुआ है नागरिकता संशोधन विधेयक संसद के दोनों सदनों में पारित हुआ है देश में अराजक तत्व सक्रिय हुए हैं सरकार की विफलताओं पर पर्दा पड़ गया है वक़्त करवट लिया है १९९० की लिखी हुई सियासी स्क्रिप्ट लौट कर आई है..,

कांग्रेस एक बार फिर निशाने पर है मोदी ने झारखंड की चुनावी रैली में पूर्वोत्तर में हुई हाल की हिंसक प्रतिक्रिया को कांग्रेस के हिस्से डाल दिया है इस बीच पूरा देश सुलग उठा है लगता है कि फिर राष्ट्रवाद उबाल मारेगा और मोदी सरकार मीडिया की बनाई हुई पतली गली से निकल लेगी निशानेबाज़ कांग्रेस की ओर निशाना साधेंगे..,राजधर्म की विकलता पर और देश की मौजूदा दशा पर दिनकर का लिखा हुआ प्रासंगिक बन पड़ता है के,-

चोरों के हैं

जो हितु

ठगों के बल

हैं,जिनके प्रताप

से पलते पाप

सकल हैं..,

“यह पाप उन्ही

का हमको मार

गया है,भारत

अपने घर में

ही हार गया है..,”

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